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घोषणा पत्र सिर्फ लुभावना न हो, अमल भी करें दल
फैजाबाद
Updated Wed, 25 Jan 2017 10:53 PM IST
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फैजाबाद में बुधवार को देवकाली मंदिर स्थित अमर उजाला के सियासी अड् डा में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विकास के फोकस पर पिछड़ जाने का दर्द हर किसी को है। सभी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र लुभावने होते हैं, मगर अमर नहीं होता। यदि अमल हुआ होता तो बेरोजगारी, करप्शन, अपराध और संसाधनों की कमी का रोना नहीं रहता। फैजाबाद और अयोध्या को संवारने की समन्वित योजना का अभाव हर किसी को खल रहा है।
मांग उठी कि सैलानी आएं तो कई दिनों तक यहां ठहर सकें, ऐसा इंतजाम होना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा। अमर उजाला की ओर से बुधवार को देवकाली परिसर में सियासी-अड्डा का माहौल कुछ यूं दिखा।
लोगों का दर्द इस बात को लेकर छलका कि गुणवत्तापरक साखदार शैक्षिक संस्थान होते तो युवाओं के सामने पलायन की ऐसी समस्या न खड़ी होती। सहज-सरल और सर्वसुलभ जनप्रतिनिधियों को महत्व देने की वकालत की गई जिससे जनता की समस्याओं का शीघ्रता के साथ समाधान हो सके।
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फैजाबाद और अयोध्या का उसकी गरिमा के अनुकूल विकास कराने की मांग उठी। दोनों नगरों में सांस्कृतिक धरोहरों को गिनाते हुए एक वक्ता ने कहा कि हमारे शहर में क्या नहीं है। हम भी आगरा और मथुरा जैसे बन सकते हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों ने खास पहल नहीं की।
लोगों में सांस्कृतिक दृष्टि को विकसित किए जाने की जरूरत बताई गई। कॉलोनियों में जलभराव का मुद्दा उठा। सीवर लाइन की मांग भी उठी। नगर पालिका पर भी सवालों के तीर खूब चले। एक वक्ता ने वोट देते समय सजग रहने को जरूरी बताया।
कहा कि धनबलियों और बाहुबलियों को नकारने से ही लोकतंत्र मजबूत होगा। कागजों में विकास किए जाने का आरोप लगाते हुए एक वक्ता ने कहा कि लोगों ने कागजों में विकास का सब्जबाग दिखाया और अपने-अपने पेट भर लिए।
फैक्ट्रियां लगे तो युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता और तरक्की दिखती। दलों के लुभावने घोषणापत्र पर भी सवाल उठे। शहर की कॉलोनियों में जलभराव और उससे होने वाली बीमारियों को बड़ी समस्या बताते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि हम लोगों ने कई बार प्रशासन को ज्ञापन देकर जलभराव से मुक्ति दिलाने की मांग की लेकिन हमारी आवाज अनसुनी ही रह गई। नेता ऐसा हो जो जनसमस्याओं के समाधान में दिलचस्पी ले।
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मांग उठी कि सैलानी आएं तो कई दिनों तक यहां ठहर सकें, ऐसा इंतजाम होना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा। अमर उजाला की ओर से बुधवार को देवकाली परिसर में सियासी-अड्डा का माहौल कुछ यूं दिखा।
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लोगों का दर्द इस बात को लेकर छलका कि गुणवत्तापरक साखदार शैक्षिक संस्थान होते तो युवाओं के सामने पलायन की ऐसी समस्या न खड़ी होती। सहज-सरल और सर्वसुलभ जनप्रतिनिधियों को महत्व देने की वकालत की गई जिससे जनता की समस्याओं का शीघ्रता के साथ समाधान हो सके।
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फैजाबाद और अयोध्या का उसकी गरिमा के अनुकूल विकास कराने की मांग उठी। दोनों नगरों में सांस्कृतिक धरोहरों को गिनाते हुए एक वक्ता ने कहा कि हमारे शहर में क्या नहीं है। हम भी आगरा और मथुरा जैसे बन सकते हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों ने खास पहल नहीं की।
लोगों में सांस्कृतिक दृष्टि को विकसित किए जाने की जरूरत बताई गई। कॉलोनियों में जलभराव का मुद्दा उठा। सीवर लाइन की मांग भी उठी। नगर पालिका पर भी सवालों के तीर खूब चले। एक वक्ता ने वोट देते समय सजग रहने को जरूरी बताया।
कहा कि धनबलियों और बाहुबलियों को नकारने से ही लोकतंत्र मजबूत होगा। कागजों में विकास किए जाने का आरोप लगाते हुए एक वक्ता ने कहा कि लोगों ने कागजों में विकास का सब्जबाग दिखाया और अपने-अपने पेट भर लिए।
फैक्ट्रियां लगे तो युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता और तरक्की दिखती। दलों के लुभावने घोषणापत्र पर भी सवाल उठे। शहर की कॉलोनियों में जलभराव और उससे होने वाली बीमारियों को बड़ी समस्या बताते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि हम लोगों ने कई बार प्रशासन को ज्ञापन देकर जलभराव से मुक्ति दिलाने की मांग की लेकिन हमारी आवाज अनसुनी ही रह गई। नेता ऐसा हो जो जनसमस्याओं के समाधान में दिलचस्पी ले।