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कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए टॉस्क ग्रुप ने अध्ययन रिपोर्ट सौंपी

Sat, 17 Jul 2021 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 10:39 PM IST
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Task group submits study report to avoid third wave
अयोध्या। कोविड की तीसरी लहर से बचाव के लिए राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के आनुषंगिक संगठन भारतीय शिक्षण मंडल के टॉस्क ग्रुप आरएफआरएफ ने एक एक्शन प्लान तैयार किया है।
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सर्वे व अध्ययन के आधार पर 101 पेज के इस एक्शन प्लान में कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए कई सुझाव बताए गए हैं। इस रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण शिक्षण मंडल द्वारा स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष किया गया है। यह जानकारी अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य मनोज दीक्षित ने दी।
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उन्होंने बताया कि शिक्षण मंडल कोरोना से लड़ाई में सरकार के साथ है। इसके लिए उनके संगठन के टॉस्क ग्रुप आरएफआरएफ (रिसर्च फॉर रिसर्चेस फाउंडेशन) द्वारा तैयार किए गए एक्शन प्लान की 101 पेज की रिपोर्ट टॉस्क ग्रुप के ट्रस्टी मुकुल कानिटकर की अगुवाई में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख को सौंपी जा चुकी है।
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टॉस्क ग्रुप में शामिल आईआईटी मद्रास के प्रो. सरित केदास, सीएसआर नागपुर के डॉ. राजेश बिनीवाले, केजी मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के प्रो. एमएलबी भट्ट, आईआईएम संभलपुर के प्रो. महादेव जायसवाल, आईआईटी गांधीनगर के डॉ. उदित भाटिया सहित मुकुल कानिटकर ने सर्वे व अध्ययन के आधार पर यह सुझाव रिर्पोट तैयार की है। शिक्षण मंडल का विश्वास है कि यदि इस रिपोर्ट के आधार पर कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी की जाए तो काफी हद तक सभी सुरक्षित रहेंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि दो महीने तक देश के ज्यादातर प्रदेशों में 100 से कम केस मिले तो यह माना जाएगा कि कोरोना की तीसरी लहर कंट्रोल में है। प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि किसी एक पैथी को लेकर हम साथ न चलें कि बल्कि आयुष को भी इसमें शामिल किया जाए।
आयुष के जरिए कोरोना को नियंत्रित करने में ज्यादा सफलता मिली है। श्रमिकों की घर वापसी को लेकर भी कहा गया है कि विपदा आते ही श्रमिक फिर से घरों की तरफ वापसी करेंगे, इससे कोरोना बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। इसकी रोकथाम को लेकर समय रहते उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
इसमें विभिन्न प्रकार के उत्पादों की वायरस को रोकने में भूमिका और कोरोना के सामानों के सुरक्षित डिस्पोजल को लेकर भी सुझाव शामिल है। वार्ता के दौरान गुरूकुल के निदेशक डॉ. दिलीप सिंह, कोषाध्यक्ष प्रो.आरके सिंह, सह प्रबंधक आदर्श सिंह ऋषभ सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षक मौजूद रहे।
प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए अब कोरोना गन की अहम भूमिका होगी। बताया कि भारतीय वैज्ञानिकों के स्तर पर तैयार कोरोना गन संक्रमण को 99 फीसदी तक रोकने में सहायक है। वैज्ञानिकों ने एक छोटा सा यंत्र बनाया है जिसे कोरोना गन का नाम दिया गया है। एक कोरोना गन यंत्र एक हजार स्क्वायर फीट एरिया को कवर कर सकता है। इसको घर में फिक्स कर दिया जाता है यह फोटोंस उत्पन्न करता है।
बताया कि एस बैंड प्रोटीन ही कोरोना का कारक है, यह यंत्र इस प्रोटीन को निष्क्रिय कर देती है। भारत में बड़ी संख्या में इस यंत्र का निर्माण हो रहा है। इसकी कीमत अभी करीब 25 हजार है, देश की 12 कंपनियां इस यंत्र को बनाने में जुटी हैं।

अब तक अमेरिका सहित विश्व के 59 देशों ने इसको मान्यता दे दी है। इस यंत्र का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पाया गया है। यह कोरोना संक्रमण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाएगा, इसको प्रयोग में लाने को लेकर भी सरकार को सुझाव दिया गया है।
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