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माननीयों के दबाव में दागी स्कूल बनते रहे हैं केंद्र
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jan 2016 11:22 PM IST
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केस-एक
सार्वजनिक इंटर कालेज रनापुर और शिवकली इंटर कालेज सुबेहटा में बोर्ड परीक्षा के दौरान डीआईओएस के सचल दस्ते ने नकल पकड़ी। सार्वजनिक इंटर कालेज में उत्तरपुस्तिकाएं एक दूसरे से मेल खा रही थी तथा परीक्षार्थियों ने भी स्वीकार किया था कि नकल कराई जा रही थी। कमोबेश ऐसी ही नकल शिवकली इंटर कॉलेज में भी मिली थी। डीआईओएस ने दोनों परीक्षा केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति बोर्ड से की थी।
केस-दो
डायनेमिक इंटर कॉलेज रानीमऊ और चौधरी चरण सिंह इंटर कॉलेज महोली में भी सचल दस्ते ने सामूहिक नकल पकड़ी थी। बच्चे एक दूसरे का टीपते हुए तो मिले ही थे, इसके अलावा नकल सामग्री भी खूब मिली थी। इन दोनों केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति बोर्ड के सचिव से की गई थी।
आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि डीआईओएस के सचल दस्ते ने खुद आधा दर्जन परीक्षा केंद्रों में नकल पकड़ी थी और उन्हें डिबार करने की संस्तुति सचिव माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इलाहाबाद से की गई थी लेकिन उन संस्तुतियां धूल फांक रही हैं। पिछले वर्ष जिन परीक्षा केंद्रों की परीक्षा की शुचिता सवालों के घेरे में थी, वहां फिर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा होगी।
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यूपी बोर्ड की नकल विहीन परीक्षा कराने के दावे तो खूब किए जा रहे है लेकिन हकीकत तो यह है कि पहले से ही नकल की पिच तैयार कर दी गई है। जिनका आचरण संदिग्ध है, उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही न करने फिर से परीक्षा केंद्र बना दिए जाने से उनके हौसले बुलंद है। दरअसल परीक्षा केंद्रों के बनाने के पीछे का सच तो यह है कि माननीयों के दबाव के आगे शिक्षा महकमा ज्यादा देर तक टिक नहीं पाता है।
माननीयों का दबाव बोर्ड और शासन तक रहता है। इसी दबाव के कारण ही जिन दागी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही के लिए डीआईओएस ने संस्तुति की थीं, उसको बोर्ड ने नजरअंदाज कर दिया। शिक्षा क्षेत्र में माननीयों का दखल खूब है। स्कूलों से सीधा संबंध भले उनका न हो लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर विद्यालयों की कमान उन्हीं के हाथों में रहती है।
सोहावल इलाके के एक स्कूल को फिर से परीक्षा केंद्र बना दिया गया जबकि वहां पर पिछले वर्ष सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। यह पूर्व मंत्री से जुड़ा विद्यालय है। मिल्कीपुर इलाके के एक विद्यालय के परीक्षा केंद्र बनने में भी सत्ता का दबाव काम आया। बीते वर्ष जिले में 201 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे जबकि इस बार 205 हो गए हैं।
पिछले वर्ष जहां भी नकल पकड़ी गई थी, उन परीक्षा केंद्रों के खिलाफ कार्यवाही के लिए बोर्ड से संस्तुति की थी। हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई, इसके बाद क्या हुआ, हम नहीं जानते।
-राजेंद्र कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक
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सार्वजनिक इंटर कालेज रनापुर और शिवकली इंटर कालेज सुबेहटा में बोर्ड परीक्षा के दौरान डीआईओएस के सचल दस्ते ने नकल पकड़ी। सार्वजनिक इंटर कालेज में उत्तरपुस्तिकाएं एक दूसरे से मेल खा रही थी तथा परीक्षार्थियों ने भी स्वीकार किया था कि नकल कराई जा रही थी। कमोबेश ऐसी ही नकल शिवकली इंटर कॉलेज में भी मिली थी। डीआईओएस ने दोनों परीक्षा केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति बोर्ड से की थी।
केस-दो
डायनेमिक इंटर कॉलेज रानीमऊ और चौधरी चरण सिंह इंटर कॉलेज महोली में भी सचल दस्ते ने सामूहिक नकल पकड़ी थी। बच्चे एक दूसरे का टीपते हुए तो मिले ही थे, इसके अलावा नकल सामग्री भी खूब मिली थी। इन दोनों केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति बोर्ड के सचिव से की गई थी।
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आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि डीआईओएस के सचल दस्ते ने खुद आधा दर्जन परीक्षा केंद्रों में नकल पकड़ी थी और उन्हें डिबार करने की संस्तुति सचिव माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इलाहाबाद से की गई थी लेकिन उन संस्तुतियां धूल फांक रही हैं। पिछले वर्ष जिन परीक्षा केंद्रों की परीक्षा की शुचिता सवालों के घेरे में थी, वहां फिर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा होगी।
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यूपी बोर्ड की नकल विहीन परीक्षा कराने के दावे तो खूब किए जा रहे है लेकिन हकीकत तो यह है कि पहले से ही नकल की पिच तैयार कर दी गई है। जिनका आचरण संदिग्ध है, उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही न करने फिर से परीक्षा केंद्र बना दिए जाने से उनके हौसले बुलंद है। दरअसल परीक्षा केंद्रों के बनाने के पीछे का सच तो यह है कि माननीयों के दबाव के आगे शिक्षा महकमा ज्यादा देर तक टिक नहीं पाता है।
माननीयों का दबाव बोर्ड और शासन तक रहता है। इसी दबाव के कारण ही जिन दागी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही के लिए डीआईओएस ने संस्तुति की थीं, उसको बोर्ड ने नजरअंदाज कर दिया। शिक्षा क्षेत्र में माननीयों का दखल खूब है। स्कूलों से सीधा संबंध भले उनका न हो लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर विद्यालयों की कमान उन्हीं के हाथों में रहती है।
सोहावल इलाके के एक स्कूल को फिर से परीक्षा केंद्र बना दिया गया जबकि वहां पर पिछले वर्ष सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। यह पूर्व मंत्री से जुड़ा विद्यालय है। मिल्कीपुर इलाके के एक विद्यालय के परीक्षा केंद्र बनने में भी सत्ता का दबाव काम आया। बीते वर्ष जिले में 201 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे जबकि इस बार 205 हो गए हैं।
पिछले वर्ष जहां भी नकल पकड़ी गई थी, उन परीक्षा केंद्रों के खिलाफ कार्यवाही के लिए बोर्ड से संस्तुति की थी। हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई, इसके बाद क्या हुआ, हम नहीं जानते।
-राजेंद्र कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक