{"_id":"627e9ee598b9925782253456","slug":"stem-cell-therapy-will-start-in-medical-college-faizabad-news-lko6304645122","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा स्टेम सेल थेरेपी से इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा स्टेम सेल थेरेपी से इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में अब स्टेम सेल थेरेपी की शुरुआत की जा रही है। इस विशेष विधि से हड्डी व शुगर के गंभीर मरीजों का उपचार किया जा सकेगा।
यह सुविधा शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज पूर्वांचल का पहला अस्पताल होगा। इसके लिए एक कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है और पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक भी शुरू किया गया है।
उम्मीद है कि जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के लगभग सभी विभागों को एक-एक करके और हाइटेक किया जा रहा है। हाल ही में यहां पीआरपी थेरेपी की योजना बनाई गई थी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
अगले चरण में अब बहु प्रतीक्षित स्टेम सेल थेरेपी की शुरुआत भी की जा रही है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक भी खोल दी गई है।
इस विशेष प्रकार की थेरेपी से हड्डी व शुगर के गंभीर मरीजों को बहुत लाभ मिलेगा। क्लीनिक खुलने के बाद शुक्रवार को ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग भी शुरू की गई है, जिन्हें इस विशेष विधि से उपचार दिया जाएगा।
आर्थो बायोजिक यूनिट के इंचार्ज डॉ. मनीष खन्ना ने बताया कि बहुत से ऐसे मरीज होते हैं, जिनका सर्जिकल उपचार करने के बाद भी हड्डियां नहीं जुड़ पाती हैं।
इसके अलावा कई मरीजों के कूल्हे की हड्डी सूख जाती है, जिसकी वजह से लोगों को बहुत असहनीय कष्ट झेलना पड़ता है। वहीं, शुगर के मरीजों में गंभीरता तक पहुंचने पर खून की नलियों में खून का प्रवाह खत्म हो जाता है तो पैरों में अल्सर बनने लगते हैं।
घुटने में स्पोर्ट्स घाव होने के कारण भी उनका उपचार आसानी से नहीं हो पाता है। इन विशेष परिस्थितियों में स्टेम सेल थेरेपी काफी लाभकारी है। बताया कि इस थेरेपी के जरिए मरीज के पेल्विस की हड्डी से बोनमैरो (गूदा) निकालकर उसे कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन में डाला जाता है।
इसके बाद एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ प्राप्त होता है। इस तरल पदार्थ को इंजेक्शन के जरिए या ऑपरेशन के जरिए संबंधित क्षतिग्रस्त अंग में डाला जाता है। इसकी वजह से निष्क्रिय हुई हड्डियां या सूखी हुई खून की नलियां दोबारा विकसित हो जाती हैं।
बताया कि इसे सेल्युलर थेरेपी भी कहते हैं। बताया कि हर मरीज को यह थेरेपी नहीं की जा सकती है, विशेष परिस्थितियों में मरीजों की यह थेरेपी की जाती है। इसके लिए एक विशेष रूप में कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन स्थापित करके सफाई से कार्य किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में जल्द ही स्टेम सेल थेरेपी (सेल्युलर थेरेपी) शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक शुक्रवार को पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक शुरू की गई है। पहले ही पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। ऐसे मरीजों का हर मंगलवार और गुरुवार को पंजीकरण किया जा रहा है। इससे विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों का आसानी से उपचार हो सकेगा। इसके लिए कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। -डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, अयोध्या
विज्ञापन
यह सुविधा शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज पूर्वांचल का पहला अस्पताल होगा। इसके लिए एक कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है और पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक भी शुरू किया गया है।
विज्ञापन
उम्मीद है कि जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के लगभग सभी विभागों को एक-एक करके और हाइटेक किया जा रहा है। हाल ही में यहां पीआरपी थेरेपी की योजना बनाई गई थी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
अगले चरण में अब बहु प्रतीक्षित स्टेम सेल थेरेपी की शुरुआत भी की जा रही है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक भी खोल दी गई है।
इस विशेष प्रकार की थेरेपी से हड्डी व शुगर के गंभीर मरीजों को बहुत लाभ मिलेगा। क्लीनिक खुलने के बाद शुक्रवार को ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग भी शुरू की गई है, जिन्हें इस विशेष विधि से उपचार दिया जाएगा।
आर्थो बायोजिक यूनिट के इंचार्ज डॉ. मनीष खन्ना ने बताया कि बहुत से ऐसे मरीज होते हैं, जिनका सर्जिकल उपचार करने के बाद भी हड्डियां नहीं जुड़ पाती हैं।
इसके अलावा कई मरीजों के कूल्हे की हड्डी सूख जाती है, जिसकी वजह से लोगों को बहुत असहनीय कष्ट झेलना पड़ता है। वहीं, शुगर के मरीजों में गंभीरता तक पहुंचने पर खून की नलियों में खून का प्रवाह खत्म हो जाता है तो पैरों में अल्सर बनने लगते हैं।
घुटने में स्पोर्ट्स घाव होने के कारण भी उनका उपचार आसानी से नहीं हो पाता है। इन विशेष परिस्थितियों में स्टेम सेल थेरेपी काफी लाभकारी है। बताया कि इस थेरेपी के जरिए मरीज के पेल्विस की हड्डी से बोनमैरो (गूदा) निकालकर उसे कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन में डाला जाता है।
इसके बाद एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ प्राप्त होता है। इस तरल पदार्थ को इंजेक्शन के जरिए या ऑपरेशन के जरिए संबंधित क्षतिग्रस्त अंग में डाला जाता है। इसकी वजह से निष्क्रिय हुई हड्डियां या सूखी हुई खून की नलियां दोबारा विकसित हो जाती हैं।
बताया कि इसे सेल्युलर थेरेपी भी कहते हैं। बताया कि हर मरीज को यह थेरेपी नहीं की जा सकती है, विशेष परिस्थितियों में मरीजों की यह थेरेपी की जाती है। इसके लिए एक विशेष रूप में कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन स्थापित करके सफाई से कार्य किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में जल्द ही स्टेम सेल थेरेपी (सेल्युलर थेरेपी) शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक शुक्रवार को पुनर्योजी ऑर्थोबायोलॉजी क्लीनिक शुरू की गई है। पहले ही पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। ऐसे मरीजों का हर मंगलवार और गुरुवार को पंजीकरण किया जा रहा है। इससे विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों का आसानी से उपचार हो सकेगा। इसके लिए कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। -डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, अयोध्या