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अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक में खुला बंदियों का खाता
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:45 PM IST
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रामनगरी में श्रीमणिराम दास जी की छावनी के बाल्मीकि रामायण भवन में स्थित अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक में गोंडा के जिला जेल के नाम से खाता खुलवाया गया है।
ये खाता हम आपके साथ फाउंडेशन की अध्यक्ष ने शनिवार को जेल में बंद 100 बंदियों व कैदियों द्वारा 97 लाख 14 हजार 816 बार लिखे गए सीताराम नाम से खुलवाया है।
फाउंडेशन की अध्यक्ष रुचि मोदी ने बताया कि गोंडा कारागार में बंद कैदियों व बंदियों में आत्मिक सुधार की दिशा में फाउंडेशन प्रयासरत है। जेल में लाइब्रेरी खोली गई, जिसमें सीताराम लेखन शुरू कराया गया।
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तीन माह में सौ बंदियों/कैदियों ने 97 लाख 14 हजार 816 बार सीताराम नाम लिखा है। इसमें कुछ उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी भी शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक के सहायक मैनेजर कन्हैया दास बताते हैं कि पुराणों में लिखा है कि 84 लाख रामनाम लिखने पर चौरासी लाख योनियों से मानव को मुक्ति मिल जाती है।
पुरुषार्थ सफल करने व आत्म कल्याण के लिए ये कार्य किया जाता है। बताया कि पांच लाख रामनाम से बैंक खाता खुलता है। प्रतिवर्ष एक लाख सीताराम नाम बैंक में जमा करना होता है, नहीं तो खाता बंद कर दिया जाता है।
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ये खाता हम आपके साथ फाउंडेशन की अध्यक्ष ने शनिवार को जेल में बंद 100 बंदियों व कैदियों द्वारा 97 लाख 14 हजार 816 बार लिखे गए सीताराम नाम से खुलवाया है।
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फाउंडेशन की अध्यक्ष रुचि मोदी ने बताया कि गोंडा कारागार में बंद कैदियों व बंदियों में आत्मिक सुधार की दिशा में फाउंडेशन प्रयासरत है। जेल में लाइब्रेरी खोली गई, जिसमें सीताराम लेखन शुरू कराया गया।
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तीन माह में सौ बंदियों/कैदियों ने 97 लाख 14 हजार 816 बार सीताराम नाम लिखा है। इसमें कुछ उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी भी शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक के सहायक मैनेजर कन्हैया दास बताते हैं कि पुराणों में लिखा है कि 84 लाख रामनाम लिखने पर चौरासी लाख योनियों से मानव को मुक्ति मिल जाती है।
पुरुषार्थ सफल करने व आत्म कल्याण के लिए ये कार्य किया जाता है। बताया कि पांच लाख रामनाम से बैंक खाता खुलता है। प्रतिवर्ष एक लाख सीताराम नाम बैंक में जमा करना होता है, नहीं तो खाता बंद कर दिया जाता है।