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रामायणकालीन वृक्षों से आच्छादित होगा राम वन गमन गार्म

Mon, 17 Aug 2020 10:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2020 10:42 PM IST
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Shriram
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन होने के साथ ही मंदिर निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। वहीं, दूसरी तरफ केंद्र सरकार राम वन गमन क्षेत्रों का सुंदरीकरण कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राम वन गमन क्षेत्रों का सर्वेक्षण शुरू करने की योजना बन रही है। सरकार का प्रयास है कि राम वन गमन मार्ग को मनरेगा के तहत शामिल कर लिया जाए ताकि इसके सुंदरीकरण में फंड की कमी न हो। पूरे मार्ग को रामायणकालीन वृक्षों से आच्छादित किया जाएगा, जिससे यह मार्ग आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।
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अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि लखनऊ में हुए एक वेबिनार में शामिल हुए एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ग्राम्य विकास (पंचायतीराज) मनोज श्रीवास्तव ने राम वन गमन मार्ग के सुंदरीकरण की योजना का जिक्र करते हुए बताया कि रामवनगमन क्षेत्रों का सर्वेक्षण शुरू करने की तैयारी की जा रही है। खासकर मध्यप्रदेश के रामवनगमन मार्ग का पहले सर्वेक्षण किया जाएगा। कहा कि यदि रूट बनाकर दे दिया जाए तो मध्यप्रदेश वाला रामवनगमन का जो हिस्सा है उसको मनरेगा के तहत ले लिया जाएगा।
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मनरेगा के तहत लेने से फंड की कमी नहीं होगी। पूरे मार्ग को रामायणकालीन दृश्यों से सुसज्जित करने के साथ-साथ त्रेतायुगीन वृृक्षों से भी आच्छादित किया जाएगा ताकि यहां से गुजरने वाले यात्रियों, भक्तों को त्रेतायुग का अहसास हो। वाईपी सिंह कहते हैं कि सरकार की यह योजना राम संस्कृति के संरक्षण की दिशा में अहम साबित हो सकती है। यदि अयोध्या से राम-जानकी मार्ग व अयोध्या से रामवनगमन मार्ग का सुंदरीकरण कराकर रामायणकालीन वृक्ष लगा दिए जाएं तो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन जाएगा और रामायण संस्कृति का भी सवंर्धन होगा।
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राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में अब तक की गई खोदाई में मिले अवशेषों से भी परिसर में एक मंदिर बनाने की योजना है। यदि मंदिर नहीं बन पाता है तो म्यूजियम बनाकर इन अवशेषों को संरक्षित किया जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह कहते हैं कि खोदाई में अभी कुछ ही पिलर मिले हैं और गहराई तक खोदाई की जाएगी तो मंदिर के और भी अवशेष, पिलर आदि मिलेगें। बताया कि किसी भी विष्णु मंदिर में परफेक्ट रूप से कम से कम 56 पिलर होत हैं, ऐसे में यह कहा जा सकता है कि मंदिर परिसर में खोदाई आगे होने पर बड़ी संख्या में पिलर मिलेगें। हमारा प्रयास होगा इन पिलरों को उसी तरह खड़ा कर दिया जाए, जिस तरह मंदिर रहा होगा, जो खोदाई में निकल रहा है वह हमारी विरासत है। कहा कि फिलहाल अभी सब कुछ योजना तक ही है, सारे निर्णय ट्रस्ट को लेना है, यदि हमें जिम्मेदारी मिली तो हम ऐसा करना चाहेंगें।
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