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पौराणिक मणिपर्वत का लौटेगा धार्मिक गौरव

Fri, 11 Feb 2022 01:17 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Feb 2022 01:17 AM IST
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Religious glory will return to the legendary Mani mountain
अयोध्या। वैष्णवनगरी अयोध्या की पौराणिकता का गवाह मणिपर्वत का धार्मिक गौरव पुर्नस्थापित होगा। पुरातत्व विभाग ने 45 लाख की लागत से इसका सुंदरीकरण शुरू करा दिया है।
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पहले चरण में मणिपर्वत की नई सीढ़ियां बनाई जा रही हैं। दूसरे चरण में जर्जर मणिपर्वत की इमारत को दुरुस्त करते हुए उसके फसाड (अग्रभाग) को सुंदरता प्रदान की जाएगी।
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मणिपर्वत के संरक्षण एवं सुंदरीकरण को लेकर रामनगरी के संत-धर्माचार्य आवाज उठाते रहे हैं। एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा द्वारा अयोध्या की पौराणिकता बयां करने वाले 148 स्थानों को 1902 में चिह्नित कर उस पर पत्थर लगाए गए थे, ताकि इन धरोहरों को संरक्षित किया जा सके।
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इन्हीं में से एक मणिपर्वत भी है। मणिपर्वत त्रेतायुगीन माना जाता है। यह पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक है, लेकिन वर्षों से यह पौराणिक स्थल उपेक्षित रहा।
संत-धर्माचार्यों द्वारा लगातार जर्जर मणिपर्वत के सुंदरीकरण को लेकर आवाज उठाई जाती रही है। यही नहीं प्रशासन द्वारा मणिपर्वत पर जर्जर भवन होने की सूचना भी लगाई गई है।
वर्तमान में मणिपर्वत परिसर में पीएसी का कैंप है। फिलहाल इस प्राचीन धरोहर के संरक्षण को लेकर प्रशासन के निर्देश के बाद पुरातत्व विभाग 45 लाख की लागत से इसका सुंदरीकरण करा रहा है।
पहले चरण में मणिपर्वत के प्रवेश मार्ग पर सीढ़ियां बनाई जा रही हैं। पहले प्रवेश मार्ग पूरी तरह सपाट था। जिससे अयोध्या की उत्तुंग इमारत में शामिल मणिपर्वत पर चढ़ने में भक्तों को परेशानी होती थी।
बरसात के मौसम में तो मणिपर्वत पर चढ़ना बहुत कठिन होता था। अब प्रवेश मार्ग पर नई सीढ़ियां बनाई जा रही है। मणिपर्वत के पीछे के प्रवेश मार्ग पर भी नई सीढ़ियां बनाई जाएगी।
इन सीढ़ियों में मिर्जापुर के लाल पत्थर लगाए जाएंगे। अगले चरण में मणिपर्वत का फसाड (अग्रभाग) दुरुस्त किया जाएगा। जर्जर इमारत को ध्वस्त कराकर नए सिरे से इसे आकर्षक बनाने की योजना है।
मणिपर्वत के प्रधान पुजारी रामचरन दास की मांग है कि त्रेतायुगीन मणिपर्वत का सुंदरीकरण उसकी गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मणिपर्वत का सुंदरीकरण कराने की पहल तो स्वागत योग्य है लेकिन इसकी जर्जर इमारत को भी भव्यता प्रदान करने की ओर ध्यान देना चाहिए।
मणिपर्वत के गर्भगृह को भी सुंदरता प्रदान करने के बारे में शासन-प्रशासन को सोचना चाहिए। पंडित कौशल्यानंदन वर्धन बताते हैं कि मणिपर्वत का जो इतिहास रुद्रयामल व सत्योपाख्यान में बताया गया है।
उसके तहत जब राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघभन चारों भाई शादी करने जनकपुर गए तो कैैकेई ने एक कनक भवन बनवाने का हठ किया। महाराजा दशरथ ने विश्वकर्मा को बुलवाकर बहुत ही कम समय में बहुत ही सुंदर कनक भवन बनवा दिया।
महारानी कैकेई ने यह महल जानकी को उपहार में दे दिया था। साथ ही इंद्राणि से मिली मणि भगवान राम को दे दी। बाद में भगवान राम ने इस मणि को भरत को, फिर भरत ने लक्ष्मण को और लक्ष्मण ने शत्रुघभन को दे दी।
शत्रुघभन ने सोचा कि जब बड़े भाईयों ने इस मणि को धारण नहीं किया तो मैं कैसे करूं, उन्होंने जानकी के चरणों में वह मणि अर्पित कर दी। यह बात सामने आई कि मणि का जोड़ा न होने के कारण राम इसे नहीं पहन रहे हैं।
कैकेई ने महाराजा दशरथ से कहा कि इस मणि का जोड़ा लगा दीजिए। बाद में जानकी के आशीर्वाद से जनकपुर में मणियों का अंबार लग गया। जनक ने इसे पुत्री का धन मानते हुए अयोध्या भेज दिया।
पंडित कौशल्यानंदन बताते हैं कि अयोध्या के रामकोट के दक्षिण दिशा में यह मणियां रख दी गईं। जिसका महल बन गया जो एक योजन ऊंचा पहाड़ बन गया। जो मणिपर्वत के रूप में आस्था का केंद्र हैं।
यहां हर वर्ष सावन मास में आस्था उमड़ती है। रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों के विग्रह को रथ पर सवार कर मणिपर्वत लाया जाता है और यहां झुला झुलाया जाता है।
इसके बाद रामनगरी के मंदिरों में श्रावण झूलनोत्सव का श्रीगणेश होता है। जो पूरे एक पखवारे तक चलता है। मणिपर्वत के गर्भगृह में भी भगवान श्रीराम माता जानकी के साथ विराजमान हैं।

45 लाख की लागत से रामनगरी की पौराणिक विरासत मणिपर्वत का सुंदरीकरण कार्य शुरू किया गया है। पहले चरण में प्रवेश मार्ग पर सीढ़ियां बनाई जा रही हैं। उसके बाद मणिपर्वत की जर्जर इमारत को नए सिरे से भव्यता प्रदान की जाएगी। इमारत के अग्रभाग को भव्य बनाया जाएगा, अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है।- पवन गुप्ता, सर्किल अफसर, पुरातत्व विभाग
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