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रामनगरी में दिवाली की धूम, घर-घर जले दीप
फैजाबाद
Updated Sun, 30 Oct 2016 07:20 PM IST
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दीपावली पर्व पर पटाखों की रोशनी से जगमगाता आकाश।
- फोटो : अमर उजाला
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कंचन कलस बिचित्र संवारे, सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे। बंदनवार पताका केतू, सबन्हि बनाए मंगल हेतू। बीथीं सकल सुगंध सिंचाई, गजमनि रचि बहु चौक पुराई। नाना भांति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे। गोस्वामी तुलसीदास रचित यह चौपाई आज भी दिवाली के उल्लास में रविवार को साकार होती दिखी। हालांकि आतिशबाजी व पटाखों के प्रदूषण से अयोध्या भी अछूती नहीं है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को 14 वर्ष बाद प्रभु राम अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में इस दिन अयोध्यावासियों ने अपने घरों को दीपों से सजाया था और प्रभु की आरती उतारी थी। तभी से दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई।
दीपावली पर्व पर रामनगरी में दीपक के साथ ध्यान और अनुष्ठान की भी लौ जगी। सरयू तट से मठ-मंदिरों में आयोजित दीपोत्सव पर्व पर संतों व गृहस्थों ने गणेश-लक्ष्मी पूजन किया। मठ-मंदिरों में शास्त्रोक्त विधि से पूजन देर रात्रि तक चला।
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परंपरा के अनुरूप मंदिरों की साज-सज्जा दीपोत्सव पर्व को प्रगाढ़ करती रही। शाम की गोधुली बेला आते-आते रामनगरी के आकाश व सड़कों रंग-बिरंगी रोशनियों व पटाखों के धमाकों से गुंजायमान होने लगे।
नन्हें-मुन्ने बच्चों के साथ युवा व किशोर व नौजवानों की भीड़ सड़कों पर पटाखे छुड़ाती रही। महिलाएं व पुरुष आस-पड़ोस में बधाईयां देते रहे। यज्ञाचार्य पं. श्रुतिधर द्विवेदी बताते हैं कि दिवाली पर अयोध्या में दर्शन-पूजन व सरयू स्नान बेहद फलदायी होता है।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को 14 वर्ष बाद प्रभु राम अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में इस दिन अयोध्यावासियों ने अपने घरों को दीपों से सजाया था और प्रभु की आरती उतारी थी। तभी से दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई।
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दीपावली पर्व पर रामनगरी में दीपक के साथ ध्यान और अनुष्ठान की भी लौ जगी। सरयू तट से मठ-मंदिरों में आयोजित दीपोत्सव पर्व पर संतों व गृहस्थों ने गणेश-लक्ष्मी पूजन किया। मठ-मंदिरों में शास्त्रोक्त विधि से पूजन देर रात्रि तक चला।
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परंपरा के अनुरूप मंदिरों की साज-सज्जा दीपोत्सव पर्व को प्रगाढ़ करती रही। शाम की गोधुली बेला आते-आते रामनगरी के आकाश व सड़कों रंग-बिरंगी रोशनियों व पटाखों के धमाकों से गुंजायमान होने लगे।
नन्हें-मुन्ने बच्चों के साथ युवा व किशोर व नौजवानों की भीड़ सड़कों पर पटाखे छुड़ाती रही। महिलाएं व पुरुष आस-पड़ोस में बधाईयां देते रहे। यज्ञाचार्य पं. श्रुतिधर द्विवेदी बताते हैं कि दिवाली पर अयोध्या में दर्शन-पूजन व सरयू स्नान बेहद फलदायी होता है।