{"_id":"5ee102e18ebc3e42cf7f1b28","slug":"ram-mandir-faizabad-news-lko5253656144","type":"story","status":"publish","title_hn":"28 साल बाद रामजन्मभूमि परिसर में हुआ कुबेरेश्वर महादेव का रूद्राभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
28 साल बाद रामजन्मभूमि परिसर में हुआ कुबेरेश्वर महादेव का रूद्राभिषेक
विज्ञापन
कुबेरेश्वर महादेव का अभिषेक करते महंत कमलनयन दास व अन्य।
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। राममंदिर का निर्माण की कामना से बुधवार को श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने 28 वर्षों बाद कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया।
विज्ञापन
मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण वर्षों से कुबेरेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना नहीं हो पाई थी। कोरोना के शमन, विश्व की बाधाएं दूर करने और राममंदिर निर्माण के लिए शंकरजी से संतों ने आशीर्वाद मांगा। महंत कमलनयन दास ने कहा कि शीघ्र ही मंदिर निर्माण की तारीख तय होगी। अभी रामजन्मभूमि परिसर में कोई निर्माण कार्य नहीं शुरू हुआ है। हम केवल शिव की आराधना करने आए थे, हमारी तैयारी पूरी है। जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
विज्ञापन
अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में कुबेर टीले पर कुबेरेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया गया। यहां 28 साल से यहां पूजा नहीं हुई थी। महंत कमलनयन दास ने बुधवार को करीब दो घंटे तक (सुबह 8 से 10 बजे तक) 11 लीटर दूध से अभिषेक किया और फिर बाहर निकले।
विज्ञापन
पूजा के बाद लौटे महंत कमलनयन दास ने कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव की उपासना के बाद भगवान श्री राम का लंका विजय का अभियान निर्विघ्न संपन्न हुआ। उसी प्रकार यहां पर कुबेेरेश्वर महादेव की पूजा के बाद श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य निर्विघ्न फलीभूत होगा।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के पहले रामेश्वरम में शिव की आराधना की थी, उसी विरासत के अनुरूप रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से पूर्व शिव की आराधना की गई। कमलनयनदास के अनुसार इसके पीछे मकसद भव्य राममंदिर निर्माण से पूर्व भगवान शिव को प्रसन्न करना है।
उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या आते पर कोरोना संकट के चलते हर जगह भीड़भाड़ की आशंका उन्हें अयोध्या आने से रोक रही है।
बताया कि बीते दिनों समतलीकरण के दौरान रामजन्मभूमि परिसर का भ्रमण करने के दौरान उनकी निगाह कुबेर टीला पर स्थित भगवान कुबेरेश्वर महादेव पर गई और उसी समय उन्होंने तय किया कि जिस प्रकार भगवान राम ने लंका विजय के पूर्व रामेश्वरम में भोलेनाथ की पूजा की। उसी तरह श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से पहले वह शशांक शेखर के रूप में भोले की पूजा करेंगे। रुद्राभिषेक में संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी, संत आनंद शास्त्री सहित अन्य वैदिक पंडित मौजूद रहे।
शिव अभिषेक से दूर होंगी विघ्न-बाधाएं: कन्हैयादास
संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने भी भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। अभिषेक पूजन के बाद लौटे महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर राममंदिर निर्माण की मंगलकामना की गयी है, भगवान शिव की कृपा से सारी विघ्न बाधाएं दूर होंगी और शीघ्र ही राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। संत समाज अयोध्या में दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण के लिए बेसब्र है।
पौराणिक एवं पुरातात्विक महत्व का है कुबेर टीला
रामजन्मभूमि के जिस परिसर में दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण की तैयारी चल रही है उसी परिसर में पौराणिक एवं पुरातात्विक महत्व का कुबेर टीला भी है। अयोध्या का इतिहास विवेचित करने वाले ग्रंथ रूद्रयामल के अनुसार युगों पूर्व इस स्थान पर धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। उन्होंने रामजन्मभूमि के निकट ऊंचे टीले पर शिवलिंग की स्थापना की थी, कालांतर में यहां मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, कुबेर सहित कुल नौ देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गई और श्रद्घालुओं के बीच यह स्थल नौ रत्न के नाम से पूजित-प्रतिष्ठित हुआ। सन 1902 में एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने 84 कोस की परिधि में रामनगरी के जिन 148 पुरास्थलों को चिह्नित किया, उसमें से एक कुबेर टीला भी था। कुबेर टीला एएसआई के द्वारा भी संरक्षित स्मारक है।