फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Poverty prevents the feet of its limits

गरीबी ने रोके अपनी सीमा के पांव

Sat, 22 Jun 2019 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2019 11:09 PM IST
विज्ञापन
Poverty prevents the feet of its limits
आर्थिक तंगी ने रोकी सीमा पांडेय की राह। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। केंद्र व प्रदेश सरकार खेल व खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, वहीं कुछ ऐसी प्रतिभाएं हैं जो उचित सहायता के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
विज्ञापन

प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली सीमा पांडेय का सिलेक्शन 7 व 8 जुलाई को रूस में होने वाली अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हुआ है।
विज्ञापन

सीमित संसाधन के बावजूद जिले व प्रदेश का नाम रोशन करने वाली सीमा आर्थिक अभाव के चलते इस प्रतियोगिता में भाग लेने में असक्षम है, उसने आर्थिक मदद के लिए प्रदेश से लेकर जिले तक के खेल अधिकारियों से गोहार लगाई है लेकिन सभी ने मदद से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

निराश व हताश सीमा का कहना है कि उसने अधिकारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद मांगी लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी।
अयोध्या के दंतधावनकुंड इलाके की 24 वर्षीय सीमा स्ट्रांग वुमेन के रूप में जानी जाती है, उसकी चार बहन और दो भाई भी हैं। पिता भवननाथ पांडेय गाइड का काम कर किसी तरह घर का खर्चा चलाते हैं।
सीमा ने पूर्व में छत्तीसगढ़ में हुए नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में एक गोल्ड व तीन सिल्वर, हरिद्वार में हुए सीनियर ओपन प्रतियोगिता में गोल्ड, नागपुर में हुए जूनियर नेशनल में गोल्ड सहित अन्य प्रतियोगिताओं में गोल्ड व सिल्वर जीता है। उसने पिछले वर्ष अयोध्या में अपने दम पर जूनियर स्टेट चैंपियन भी करवाया था।
दिसंबर 2018 में उत्तराखंड में हुए चयन में उसका सिलेक्शन 7 व 8 जुलाई को रूस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है।
सीमा का कहना है कि पावरलिफ्टिंग जैसे खेल के लिए सरकार बजट का रोना रोती है, ऐसे में उसे अपने खर्चे पर रूस जाना होगा। इसके लिए करीब तीन लाख रुपये का खर्चा आएगा।
कहा कि इतना पैसा उसके घरवालों के पास नहीं है, ऐसे में लगता है उसकी वर्षों की मेहनत बेकार जाएगी और वह इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएगी।
उसने बताया कि इसके लिए वो बीते एक माह से प्रदेश के खेल अधिकारियों से मदद की गोहार लगा रही है लेकिन, उसकी किसी ने मदद की। बताया कि उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गोहार लगाई लेकिन वहां से भी उसे निराशा हाथ लगी।

सीमा के पिता भवननाथ निराश होकर कहते हैं कि उनके सीमित खर्च से घर का खर्च उठाना मुश्किल होता है, ऐसे में तीन लाख रुपये वो कहां से लाए ये सोचकर वो परेशान है। कहा कि लगता है उनकी बेटी का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed