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विसरा के नमूनों को जांच का इंतजार
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अयोध्या। जिले में सैकड़ों की मौत का राज पोस्टमार्टम हाउस के कमरों में रखी बोतलों में बंद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर सुरक्षित किए गए विसरा की जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
हाल ये है कि वर्ष 2016 से 30 नवंबर 2019 तक सुरक्षित किए गए कुल 427 विसरा में से अधिकांश की जांच रिपोर्ट पेंडिंग में ही पड़ी है। इसके चलते पुलिस ही क्या मृतकों के परिवारीजन भी मौत के कारणों से अंजान हैं। वहीं, थानों पर विसरा सुरक्षित रखने के उचित इंतजाम नहीं होने के कारण वह निष्प्रयोज्य हो जा रहे हैं।
जिले के पोस्टमार्टम हाउस में 1 जनवरी 2016 से 30 नवंबर 2019 तक कुल 427 लोगों की मौत के बाद उनके विसरे जांच के लिए भेजे गए हैं। यह विसरे अब संबंधित थाने की पुलिस ही जांच के लिए भेजती है।
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यह बात और है कि जांच कितने दिनों में पूरी हुई या फिर उनकी क्या रिपोर्ट आई, इस बात की जानकारी स्वयं किसी भी थाना पुलिस को स्पष्ट नहीं है। जिससे कहा जा सकता है कि विसरा सुरक्षित रखे जाने का मतलब मौत का राज ही दफन होना ही है।
वहीं, कई विसरे जांच के लिए भेज तो दिए जाते हैं लेकिन उनकी रिपोर्ट पूरी होते-होते या तो थानेदार का तबादला हो जाता है या फिर परिवारीजन भी खामोश होकर बैठ जाते हैं।
अधिकांश मामलों में विसरा की रिपोर्ट आने से पहले ही यदि दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर केस ही खत्म कर दिया जाता है। वहीं थानों पर इसके रखरखाव का उचित इंतजाम न होने से इनके खराब होने की संभावना बनी रहती है।
पुराने मामलों की बात छोड़े, बीते 8 नवंबर को नगर कोतवाली के देवकाली चौकी अंतर्गत आदर्श नगर कालोनी में स्थित पूर्व स्व. एसडीएम के घर में उनकी पत्नी व बेटी का सड़ा गला कंकाल मिला था।
इस दौरान घर में एक बेटी जिंदा भी मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने से उसका विसरा सुरक्षित रख उसे जांच के लिए भेजा गया था। मामले में करीब 20 दिन बीतने के बाद अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आ सकी है। लगभग यही हाल अधिकांश उन विसरा रिपोर्ट का है, जिन्हें जांच के लिए भेजा तो गया लेकिन फिर उनका हुआ, इसका पता किसी को नहीं है।
सीएमओ डॉ. सीबी द्विवेदी ने कहा कि पोस्टमार्टम के वक्त यदि डॉक्टरों को मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता है तो वे तत्काल ही शव लेकर आए पुलिस कर्मी को विसरा सुपुर्द कर दिया जाता है। फिर उसे संबंधित थाना ही जांच के लिए भेजता और उसकी रिपोर्ट भी थाने ही आती है।
पोस्टमार्टम हाउस में फिलहाल विसरा रखने की कोई व्यवस्था नहीं है और न यहां रिपोर्ट की ही जानकारी होती है। सीओ सिटी अरविंद चौरसिया बताते हैं कि जांच के लिए भेजे गए विसरा की रिपोर्ट देखी जाती है। यह बात जरूर है कि अक्सर रिपोर्ट आने में देरी जरूर हो जाती है लेकिन, आती जरूर है और उस पर कार्रवाई भी होती है।
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हाल ये है कि वर्ष 2016 से 30 नवंबर 2019 तक सुरक्षित किए गए कुल 427 विसरा में से अधिकांश की जांच रिपोर्ट पेंडिंग में ही पड़ी है। इसके चलते पुलिस ही क्या मृतकों के परिवारीजन भी मौत के कारणों से अंजान हैं। वहीं, थानों पर विसरा सुरक्षित रखने के उचित इंतजाम नहीं होने के कारण वह निष्प्रयोज्य हो जा रहे हैं।
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जिले के पोस्टमार्टम हाउस में 1 जनवरी 2016 से 30 नवंबर 2019 तक कुल 427 लोगों की मौत के बाद उनके विसरे जांच के लिए भेजे गए हैं। यह विसरे अब संबंधित थाने की पुलिस ही जांच के लिए भेजती है।
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यह बात और है कि जांच कितने दिनों में पूरी हुई या फिर उनकी क्या रिपोर्ट आई, इस बात की जानकारी स्वयं किसी भी थाना पुलिस को स्पष्ट नहीं है। जिससे कहा जा सकता है कि विसरा सुरक्षित रखे जाने का मतलब मौत का राज ही दफन होना ही है।
वहीं, कई विसरे जांच के लिए भेज तो दिए जाते हैं लेकिन उनकी रिपोर्ट पूरी होते-होते या तो थानेदार का तबादला हो जाता है या फिर परिवारीजन भी खामोश होकर बैठ जाते हैं।
अधिकांश मामलों में विसरा की रिपोर्ट आने से पहले ही यदि दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर केस ही खत्म कर दिया जाता है। वहीं थानों पर इसके रखरखाव का उचित इंतजाम न होने से इनके खराब होने की संभावना बनी रहती है।
पुराने मामलों की बात छोड़े, बीते 8 नवंबर को नगर कोतवाली के देवकाली चौकी अंतर्गत आदर्श नगर कालोनी में स्थित पूर्व स्व. एसडीएम के घर में उनकी पत्नी व बेटी का सड़ा गला कंकाल मिला था।
इस दौरान घर में एक बेटी जिंदा भी मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने से उसका विसरा सुरक्षित रख उसे जांच के लिए भेजा गया था। मामले में करीब 20 दिन बीतने के बाद अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आ सकी है। लगभग यही हाल अधिकांश उन विसरा रिपोर्ट का है, जिन्हें जांच के लिए भेजा तो गया लेकिन फिर उनका हुआ, इसका पता किसी को नहीं है।
सीएमओ डॉ. सीबी द्विवेदी ने कहा कि पोस्टमार्टम के वक्त यदि डॉक्टरों को मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता है तो वे तत्काल ही शव लेकर आए पुलिस कर्मी को विसरा सुपुर्द कर दिया जाता है। फिर उसे संबंधित थाना ही जांच के लिए भेजता और उसकी रिपोर्ट भी थाने ही आती है।
पोस्टमार्टम हाउस में फिलहाल विसरा रखने की कोई व्यवस्था नहीं है और न यहां रिपोर्ट की ही जानकारी होती है। सीओ सिटी अरविंद चौरसिया बताते हैं कि जांच के लिए भेजे गए विसरा की रिपोर्ट देखी जाती है। यह बात जरूर है कि अक्सर रिपोर्ट आने में देरी जरूर हो जाती है लेकिन, आती जरूर है और उस पर कार्रवाई भी होती है।