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किस्तों में पहुंच रही ऑक्सीजन, अंटकने लगती हैं सांसें

Sat, 08 May 2021 11:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 08 May 2021 11:10 PM IST
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Oxygen reaching in installments, breath starts getting stuck
अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन आपूर्ति व्यवस्था अभी तक पूरी तरह पटरी पर नहीं उतर सकी है। किस्तों में ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे जा रहे हैं। इस बीच जिन मरीजों का सिलेंडर खत्म होने के कगार पर होता है, उनकी ऑक्सीजन सिलेंडर न मिलने तक सांसें अंटकने लगती हैं। किसी तरह निर्धारित अवधि से थोड़ा इधर-उधर होने तक ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाती है तो मरीज के तीमारदार राहत की सांस लेते हैं। वहीं, पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध न हो पाने के कारण एचएफएनसी मशीन का उपयोग भी सही ढंग से करने में कठिनाई हो रही है।
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जिले में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ-साथ ही ऑक्सीजन आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई। कोविड एल-2 अस्पताल मेडिकल कॉलेज दर्शननगर से लेकर जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई। ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर, ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट आदि की स्थापना करके व ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था सुधारने के लिए जिला प्रशासन की ओर से मोर्चा संभालने पर किसी तरह व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ। फिर भी अभी तक व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं उतर सकी है। आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन स्टॉक जब खत्म होने के कगार पर होता है, तभी से तीमारदारों में हलचल मच जाती है। मेडिकल कॉलेज में जगह-जगह फोन घनघनाने लगते हैं। तीमारदार बाहर लाइन लगाए सिलेंडर की गाड़ी पहुंचने का इंतजार करता है और गाड़ी पहुंचते ही लूट सी मच जाती है। शनिवार को भी लगभग ऐसे ही हालात रहे।
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मसौधा ब्लॉक के पलिया गोवा निवासी एक मरीज को ऑक्सीजन लेवल गिरने के कारण दोपहर में करीब 12 बजे भर्ती किया गया। रेगुलेटर न होने के कारण मरीज अपने पास से रेगुलेटर व थोड़ा ऑक्सीजन लेकर गया, जिससे करीब दो घंटे काम चलायागया। निजी सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने मरीज के परिजन भयभीत हो गए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन सिलेंडर की गाड़ी पहुंचने का आश्वासन देता रहा और करीब दो घंटे बाद मरीज को सिलेंडर की गाड़ी पहुंचने पर करीब साढ़े तीन बजे नया सिलेंडर मिल सका। हालांकि, तब तक मरीज की स्थिति गंभीर नहीं हुई, अन्यथा जान भी जा सकती थी।
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इसी तरह पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की उपलब्धता न होने के कारण मेडिकल कॉलेज में करीब तीस बेड पर लगी एचएफएनसी मशीन का उपयोग भी क्षमता के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि इस मशीन से अधिक दबावयुक्त ऑक्सीजन गंभीर मरीजों को दी जाती है। प्रतिघंटे यह मशीन करीब 50 लीटर ऑक्सीजन की खपत करती है, इससे अधिक सिलेेंडर की जरूरत होती है। जबकि सीधे सिलेंडर से देने पर करीब पंद्रह लीटर ऑक्सीजन की ही खपत होती है, लेकिन दबाव उतना अधिक नहीं रह पाता। ऐसे में जिन मरीजों को अधिक दबावयुक्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है, उन्हें पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती है।

ऑक्सीजन का एक वाहन आया था, जिसे मरीजों को वितरित कर दिया गया। दूसरी गाड़ी आने वाली है, आते ही मरीजों को सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। एचएफएनसी से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर खर्च होता है, फिर भी डॉक्टरों को कहा गया है
कि जैसे भी मरीजों की जान बच सके, बचाया जाय। सात वाई पैप भी मौजूद हैं, जिससे भी कार्य चलाया जा रहा है।
-डॉ विजय कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज दर्शननगर
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