{"_id":"57cb00074f1c1ba4242cca68","slug":"now-cmo-cms-see-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब सीएमओ, सीएमएस भी देख रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब सीएमओ, सीएमएस भी देख रहे मरीज
फैजाबाद
Updated Sat, 03 Sep 2016 10:23 PM IST
विज्ञापन
फैजाबाद ः इमरजेंसी में मरीज देखते सीएमएस।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शासन का आदेश आया तो स्वास्थ्य महकमा चौकस हो गया। सीएमएस से लेकर सीएमओ तक ओपीडी में मरीजों की सेवा में हाजिर मिले। अलग से ओपीडी रजिस्टर बनाया जा रहा है। अन्य चिकित्सकों की तरह ये अधिकारी भी डेली डायरी भरेंगे। डेली डायरी की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसी के साथ अब अधिकारी प्रशासनिक कार्य का हवाला देकर ड्यूटी से नदारद नहीं रह पाएंगे।
मुख्य सचिव ने आदेश दिया तो सीएमओ से लेकर सीएमएस तक का अलग से रजिस्टर बन गया। ये चिकित्सक जो मरीज देख रहे हैं उसे ओपीडी रजिस्टर में अंकित कर रहे थे। अब ये चिकित्सक अन्य चिकित्सकों की तरह अपनी डेली डायरी भी भरेंगे और अपनी प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।
सीएमओ कार्यालय में भी रजिस्टर खोल दिया गया है। वहां पर आने वाले मरीजों को किसी दूसरे चिकित्सक के पास रेफर करने के बजाए वह स्वयं मरीजों का इलाज करेंगे। जिला महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है।
विज्ञापन
महज चार चिकित्सकों से ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। मरीजों की तादाद अधिक होने पर सीएमएस अपने कक्ष में बैठ कर मरीजों का इलाज करती हैं। शासन का फरमान आया तो अब ये नियमित रूप से मरीजों को देखने के साथ साथ डेली डायरी भी मेंटेन कर रही हैं। उनकी माने तो औसतन 25 से 30 मरीजों का ओपीडी में इलाज करती हैं और सर्जन की गैर मौजूदगी में सर्जरी भी करती हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. हरिओम श्रीवास्तव को प्रमुख अधीक्षक पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रशासनिक पद संभालने के बाद ओपीडी कक्ष के बजाए अपने चैंबर में बैठ कर मरीजों को देखते हैं, लेकिन डेली डायरी मेंटेन नहीं हो रही थी। शासनादेश आने के बाद रजिस्टर मेंटेन करने लगे हैं। इसके अलावा हर माह औसतन 70 से 75 मरीजों की सर्जरी भी रिकार्ड है।
विज्ञापन
मुख्य सचिव ने आदेश दिया तो सीएमओ से लेकर सीएमएस तक का अलग से रजिस्टर बन गया। ये चिकित्सक जो मरीज देख रहे हैं उसे ओपीडी रजिस्टर में अंकित कर रहे थे। अब ये चिकित्सक अन्य चिकित्सकों की तरह अपनी डेली डायरी भी भरेंगे और अपनी प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।
विज्ञापन
सीएमओ कार्यालय में भी रजिस्टर खोल दिया गया है। वहां पर आने वाले मरीजों को किसी दूसरे चिकित्सक के पास रेफर करने के बजाए वह स्वयं मरीजों का इलाज करेंगे। जिला महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है।
विज्ञापन
महज चार चिकित्सकों से ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। मरीजों की तादाद अधिक होने पर सीएमएस अपने कक्ष में बैठ कर मरीजों का इलाज करती हैं। शासन का फरमान आया तो अब ये नियमित रूप से मरीजों को देखने के साथ साथ डेली डायरी भी मेंटेन कर रही हैं। उनकी माने तो औसतन 25 से 30 मरीजों का ओपीडी में इलाज करती हैं और सर्जन की गैर मौजूदगी में सर्जरी भी करती हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. हरिओम श्रीवास्तव को प्रमुख अधीक्षक पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रशासनिक पद संभालने के बाद ओपीडी कक्ष के बजाए अपने चैंबर में बैठ कर मरीजों को देखते हैं, लेकिन डेली डायरी मेंटेन नहीं हो रही थी। शासनादेश आने के बाद रजिस्टर मेंटेन करने लगे हैं। इसके अलावा हर माह औसतन 70 से 75 मरीजों की सर्जरी भी रिकार्ड है।