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मंत्री-विधायक की प्रतिष्ठा भी दांव पर
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2015 10:26 PM IST
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पहले चरण में मंत्री-विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। अपने बहू-बेटे और बेटियों समेत परिवारीजनों को मैदान में उतार तमाम दिग्गज जिला पंचायत अध्यक्ष की दौड़ में भी शामिल हैं।
ऐसे में इनकी हार-जीत न सिर्फ सदन की लड़ाई की दिशा तय करेगी, बल्कि नेताओं का चुनावी भविष्य भी तय होगा। साथ ही विरोधियों को निशाना लगाने की वजहें मिल सकती हैं।
गांव-गिरांव के चुनाव में बड़ों-बड़ों ने अपनी सियासी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। ‘सियासी-वंशवेलि’ को बढ़ाने के लिए नेताओं ने ताकत झोंक दी है।
मंत्री अवधेश प्रसाद बेटे अमित का झंडा लहराने में लगे है तो ‘लाल-जमीन’ से कभी पहचाने जाने वाली मिल्कीपुर से विधायक रहे मित्रसेन के कुनबे की तीन महिलाएं चुनाव मैदान में हैं।
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इसमें एक उनके आईपीएस अफसर बेटे की पत्नी हैं। विधायक रामचंद्र यादव की बहू भी दो-दो हाथ कर रही है।
शुक्रवार को अमानीगंज, मिल्कीपुर और हैरिंग्टनगंज ब्लॉक में होने वाले जिला पंचायत के चुनाव में सात सीटें ऐसी हैं जहां दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
मित्रसेन यादव की बेटी कुसुमलता हैरिंग्टनगंज प्रथम से, बड़ी बहू व आईपीएस की पत्नी प्रियंका सेन हैरिंग्टनगंज द्वितीय से, छोटी बहू पूर्व मंत्री आनंदसेन की पत्नी इंदूसेन हैरिंग्टनगंज तृतीय से चुनाव लड़ रही हैं।
कैबिनेट मंत्री अवधेश प्रसाद का बेटा अमित कुमार मिल्कीपुर चतुर्थ से चुनाव मैदान में है। ये बात दीगर है कि पिछली बार के जिला पंचायत चुनाव में मंत्री अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत कुमार लाख कोशिश के बाद भी अनजाने से चेहरे भोला भारतीय से हार गए थे।
विधायक रामचंद्र यादव के भाई हरिश्चंद्र की पत्नी कमलेश कुमार अमानीगंज तृतीय से मैदान में हैं।
लंबे अरसे से धनबल के सहारे जिले की सियासत में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे ठेकेदार अनिल सिंह मिल्कीपुर द्वितीय से अपनी भयहु श्वेता सिंह को लड़ा रहे हैं।
इसी सीट से कांग्रेस के उग्रसेन मिश्र की पत्नी उर्मिला भी भाग्य आजमा रही हैं। इस तरह से जिले की राजनीति में अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं।
एक ओर लक्ष्मी की माया है तो दूसरी ओर सेवा है। जनता किस ओर रीझती है, ये तो भविष्य के गर्भ में है।
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ऐसे में इनकी हार-जीत न सिर्फ सदन की लड़ाई की दिशा तय करेगी, बल्कि नेताओं का चुनावी भविष्य भी तय होगा। साथ ही विरोधियों को निशाना लगाने की वजहें मिल सकती हैं।
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गांव-गिरांव के चुनाव में बड़ों-बड़ों ने अपनी सियासी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। ‘सियासी-वंशवेलि’ को बढ़ाने के लिए नेताओं ने ताकत झोंक दी है।
मंत्री अवधेश प्रसाद बेटे अमित का झंडा लहराने में लगे है तो ‘लाल-जमीन’ से कभी पहचाने जाने वाली मिल्कीपुर से विधायक रहे मित्रसेन के कुनबे की तीन महिलाएं चुनाव मैदान में हैं।
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इसमें एक उनके आईपीएस अफसर बेटे की पत्नी हैं। विधायक रामचंद्र यादव की बहू भी दो-दो हाथ कर रही है।
शुक्रवार को अमानीगंज, मिल्कीपुर और हैरिंग्टनगंज ब्लॉक में होने वाले जिला पंचायत के चुनाव में सात सीटें ऐसी हैं जहां दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
मित्रसेन यादव की बेटी कुसुमलता हैरिंग्टनगंज प्रथम से, बड़ी बहू व आईपीएस की पत्नी प्रियंका सेन हैरिंग्टनगंज द्वितीय से, छोटी बहू पूर्व मंत्री आनंदसेन की पत्नी इंदूसेन हैरिंग्टनगंज तृतीय से चुनाव लड़ रही हैं।
कैबिनेट मंत्री अवधेश प्रसाद का बेटा अमित कुमार मिल्कीपुर चतुर्थ से चुनाव मैदान में है। ये बात दीगर है कि पिछली बार के जिला पंचायत चुनाव में मंत्री अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत कुमार लाख कोशिश के बाद भी अनजाने से चेहरे भोला भारतीय से हार गए थे।
विधायक रामचंद्र यादव के भाई हरिश्चंद्र की पत्नी कमलेश कुमार अमानीगंज तृतीय से मैदान में हैं।
लंबे अरसे से धनबल के सहारे जिले की सियासत में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे ठेकेदार अनिल सिंह मिल्कीपुर द्वितीय से अपनी भयहु श्वेता सिंह को लड़ा रहे हैं।
इसी सीट से कांग्रेस के उग्रसेन मिश्र की पत्नी उर्मिला भी भाग्य आजमा रही हैं। इस तरह से जिले की राजनीति में अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं।
एक ओर लक्ष्मी की माया है तो दूसरी ओर सेवा है। जनता किस ओर रीझती है, ये तो भविष्य के गर्भ में है।