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पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक व पूजन
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अयोध्या के बड़ा भक्तमाल मंदिर में पूजन करते भक्त।
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। सावन मास में रामनगरी शिवभक्ति में डूबी हुई है। रविवार को बड़ाभक्तमाल में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के पूजन महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।
151 परिवारों ने सवा लाख पार्थिव शिवलिंग का पूरे विधिविधान पूर्वक वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूजन-अर्चन व अभिषेक किया। इस अवसर पर सवेरा परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए 201 चंपा व तुलसी के पौधों सहित पक्षी संरक्षण के लिए घोंसलों का भी वितरण किया गया।
सवेरा परिवार के संस्थापक आचार्य शिवेंद्र ने कहा कि पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक-पूजन अत्यंत फलदायी है और यह परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।
जब भगवान शिव के अत्यंत प्रिय सावन मास का हो तो पार्थिव शिवलिंग पूजन पद्धति अत्यंत फलदाई साबित होती है। रामचरित मानस की चौपाई ‘तब मज्जनु करि रघुकुल नाथा, पूजि पार्थिव नायउ माथा...का उल्लेख करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही ऋषि महर्षि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस पद्धति का सहारा लेते रहे हैं।
प्रभु श्रीराम ने भी समय-समय पर पार्थिव पूजन कर शिव जी को प्रसन्न किया। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान राम शिव की व शिव भगवान राम की भक्ति करते है।
महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि सावन मास में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर उसकी पूजा अर्चना करना बहुत ही मंगलकारी माना गया है।
महंत दिलीप दास ने कहा कि शिव जी की आराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं। संस्था के अध्यक्ष राजीव त्रिपाठी, संजीव त्रिपाठी द्वारा संत-धर्माचार्यों एवं अतिथियों को स्वागत सम्मान किया गया।
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151 परिवारों ने सवा लाख पार्थिव शिवलिंग का पूरे विधिविधान पूर्वक वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूजन-अर्चन व अभिषेक किया। इस अवसर पर सवेरा परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए 201 चंपा व तुलसी के पौधों सहित पक्षी संरक्षण के लिए घोंसलों का भी वितरण किया गया।
सवेरा परिवार के संस्थापक आचार्य शिवेंद्र ने कहा कि पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक-पूजन अत्यंत फलदायी है और यह परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।
जब भगवान शिव के अत्यंत प्रिय सावन मास का हो तो पार्थिव शिवलिंग पूजन पद्धति अत्यंत फलदाई साबित होती है। रामचरित मानस की चौपाई ‘तब मज्जनु करि रघुकुल नाथा, पूजि पार्थिव नायउ माथा...का उल्लेख करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही ऋषि महर्षि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस पद्धति का सहारा लेते रहे हैं।
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प्रभु श्रीराम ने भी समय-समय पर पार्थिव पूजन कर शिव जी को प्रसन्न किया। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान राम शिव की व शिव भगवान राम की भक्ति करते है।
महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि सावन मास में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर उसकी पूजा अर्चना करना बहुत ही मंगलकारी माना गया है।
महंत दिलीप दास ने कहा कि शिव जी की आराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं। संस्था के अध्यक्ष राजीव त्रिपाठी, संजीव त्रिपाठी द्वारा संत-धर्माचार्यों एवं अतिथियों को स्वागत सम्मान किया गया।
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