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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Kodand Ram and Lavkush's statue will be presented to Modi

मोदी को भेंट की जाएगी कोदंड राम और लवकुश की प्रतिमा, ध्वंसावशेष प्रदर्शनी रद्द

Thu, 30 Jul 2020 12:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या 
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 30 Jul 2020 12:44 AM IST
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Kodand Ram and Lavkush's statue will be presented to Modi
तैयार हो रही है प्रतिमा... - फोटो : अमर उजाला

राममंदिर की आधारशिला रखने पांच अगस्त को अयोध्या आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की भी भव्य तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में काष्ठ कला की दुर्लभ कृति टीकवुड की डेढ़ फुट की कोदंड राम व एक फुट की लव कुश की प्रतिमा पीएम को भेंट की जाएगी। 

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यह प्रतिमा अयोध्या शोध संस्थान की ओर से कर्नाटक में तैयार कराई जा रही है जो चार अगस्त को अयोध्या पहुंच जाएगी। पांच अगस्त को रामजन्मभूमि परिसर में भूमि पूजन के दौरान यह प्रतिमा संस्क़ृति विभाग की ओर से भेंट की जाएगी।
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अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह ने बताया कि दोनों प्रतिमाएं कर्नाटक में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार एम राममूर्ति तैयार कर रहे हैं। यह प्रतिमा उत्तर और दक्षिण के समन्वय का भी प्रतीक है जो दक्षिण की हस्तशिल्प कला का अद्भुत नमूना है। प्रतिमा कर्नाटक की विशेष दक्षिण शैली में टीक वुड से तैयार की जा रही है।
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कोदंड के नाम से जाना जाता है भगवान राम का धनुष
भगवान राम के धनुष को कोदंड के नाम से जाना जाता है। जब वह माता सीता की खोज के लिए दक्षिण भारत पहुंचे, तो वनवासी रूप में उनके हाथ में उनका धनुष कोदंड था। उन्होंने अपनी पत्नी सीता की रक्षा के लिए धनुष उठाया था। लिहाजा दक्षिण भारत में उनका परिचय एक ऐसे पुरुष के तौर पर होता है जो स्त्री रक्षक हैं। इसलिए दक्षिण भारत में भगवान राम के कोदंड स्वरूप को पूजा जाता है।

विवाद से बचने को ध्वंसावशेष प्रदर्शनी रद्द
विवादित ढांचा गिराने का केस सीबीआई की विशेष अदालत में चल रहा है, इसलिए माना जा रहा है कि इससे जुड़े ध्वंसावशेष  की प्रदर्शनी को अनुमति नहीं दी गई है जबकि घोषित किया गया था कि अयोध्या शोध संस्थान की ओर से श्रीराम जन्मभूमि की खोदाई में मिले मंदिर को साबित करने वाले अवशेष प्रधानमंत्री को दिखाने के लिए रखे जाएंगे। 


सूत्र बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन ध्वंसावशेष से आगे जाकर श्रीराम जन्मस्थान की मौलिकता पर आधारित था, ऐसे में इनका प्रदर्शन पीएम मोदी के समक्ष उचित नहीं प्रतीत हुआ।

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