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आय प्रमाणपत्र से स्याह को सफेद करने की पेशबंदी
फैजाबाद
Updated Fri, 09 Dec 2016 10:44 PM IST
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जनसेवा केंद्र मीनापुर फगोली में प्रमाण पत्र बनवाती प्रेमलता।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को तरह-तरह से खपाए जाने का दौर है। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी घर में रखी नकदी को या तो सामान खरीदकर चलाए जाने की कोशिश हुई या फिर बैंक और डाकघर के खातों में डाल दिया गया है।
कई ने तो नए खाते खुलवाकर पैसे जमा किए हैं। स्याह को सफेद करने की पेशंबदी में खातों में जमा ज्यादा रकम गले की फांस न बने से इससे बचने के लिए महिलाओं के आय प्रमाण ज्यादा दिखाने की होड़ मची हुई है। हालांकि बीपीएल की ग्रामीण आय सीमा 46 हजार व शहरी 54 हजार से नीचे के ही आय प्रमाण पत्र बन रहे हैं।
जिले के आंकड़ें बताते हैं कि आठ नवंबर को नोटबंदी के पहले अक्तूबर में लगभग छह हजार 115 और नवंबर में 6 हजार 261 आय प्रमाण पत्र बनवाए गए हैं। जिले में पुरुष व महिला आय प्रमाणपत्र बनने का अलग-अलग कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
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फिर भी जनसेवा केंद्रों के संचालक बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से महिलाओं के आय प्रमाणपत्र बनने का औसत काफी अधिक हो गया है। अचानक खाते खोलकर एकमुश्त रकम जमा करने पर आयकर विभाग की नजर इस पर जा सकती है।
लिहाजा आय प्रमाण पत्र के सहारे बचने की जुगत चल रही है। जानकार बताते हैं कि महिलाओं के नाम से बैंकों में खुले जनधन खातों में हजार व पांच सौ के नोट खूब खपाए गए हैं। आरबीआई से इसके बारे में जानकारी मांगी गई है। ऐसे में इस पैसे को सुरक्षित बनाने में आय प्रमाण पत्र को एक सहारे के रूप में माना जा रहा है। इस प्रमाणपत्र के जरिए किसी हद तक पैसे को सुरक्षित किया जा सकता है।
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कई ने तो नए खाते खुलवाकर पैसे जमा किए हैं। स्याह को सफेद करने की पेशंबदी में खातों में जमा ज्यादा रकम गले की फांस न बने से इससे बचने के लिए महिलाओं के आय प्रमाण ज्यादा दिखाने की होड़ मची हुई है। हालांकि बीपीएल की ग्रामीण आय सीमा 46 हजार व शहरी 54 हजार से नीचे के ही आय प्रमाण पत्र बन रहे हैं।
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जिले के आंकड़ें बताते हैं कि आठ नवंबर को नोटबंदी के पहले अक्तूबर में लगभग छह हजार 115 और नवंबर में 6 हजार 261 आय प्रमाण पत्र बनवाए गए हैं। जिले में पुरुष व महिला आय प्रमाणपत्र बनने का अलग-अलग कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
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फिर भी जनसेवा केंद्रों के संचालक बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से महिलाओं के आय प्रमाणपत्र बनने का औसत काफी अधिक हो गया है। अचानक खाते खोलकर एकमुश्त रकम जमा करने पर आयकर विभाग की नजर इस पर जा सकती है।
लिहाजा आय प्रमाण पत्र के सहारे बचने की जुगत चल रही है। जानकार बताते हैं कि महिलाओं के नाम से बैंकों में खुले जनधन खातों में हजार व पांच सौ के नोट खूब खपाए गए हैं। आरबीआई से इसके बारे में जानकारी मांगी गई है। ऐसे में इस पैसे को सुरक्षित बनाने में आय प्रमाण पत्र को एक सहारे के रूप में माना जा रहा है। इस प्रमाणपत्र के जरिए किसी हद तक पैसे को सुरक्षित किया जा सकता है।