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अस्पताल स्टाफ की हड़ताल से भटकते रहे मरीज, नहीं मिला इलाज

Wed, 21 Sep 2016 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Wed, 21 Sep 2016 12:15 AM IST
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Hospital staff strike wandered patient, not cure
जिला अस्पताल में हड़ताल के चलते लौटते रोगी। - फोटो : अमर उजाला
ई अस्पताल होय कि कसाईबाड़ा। अपनै तनखाह कै चिंता बाटै, यहर हमार जान जात बाटै...। लड़िका बोखार से मरत अहै। डाक्टरै कहत अहैं कि हम का करी, पर्ची-सुई-दवा देय वाले नाय अहैं। हमरे कमरा मा ताला बंद कई देहे अहैं। कइसे होय इलाज, सबही जान बचावै का होय तौ इहंा से चला जाव।
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कुछ ऐसी ही आवाजें जिला अस्पताल में दौड़ते, चीखते मरीजों और तीमारदारों की सुबह से लेकर दोपहर तक सुनाई देती रही। सातवें वेतन आयोग व विसंगतियों को लेकर अस्पताल कर्मियों की हड़ताल ने मंगलवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी समेत सभी सेवाएं की ठप कर दी।
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दर्द से कराह रहे मरीजों पर किसी को दया नहीं आई। प्रशासन की ओर से न कोई अफसर पहुंचा न आपात इंतजाम ही दिखा। दो बजते-बजते इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह खाली हो गया। संक्रामक रोग से पीड़ित बच्चा वार्ड में एक गरीब मजबूर बाप अपने बेटे को लेकर बचा था, बाकी सब चले गए।
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अस्पताल में भर्ती क्रिटिकल मरीजों को समझाकर डॉक्टर ही उन्हें निजी अस्पताल में जाने की सलाह देते दिखे। दोपहर बाद डॉ. नानक सरन इमरजेंसी में दिखे। डॉ रामकिशोर, डॉ. शैलेश सिंह भी इमरजेंसी में पहुंचे और कुछ केस देखते दिखे।


सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव का कहना है कि आपात इंतजाम किए गए थे, लेकिन कर्मियों ने ताला नहीं खोला, जिससे ओपीडी से लेकर आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। रोजाना 17 सौ मरीजों की ओपीडी का औसत है, जो मंगलवार को शून्य रहा।

 
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