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जन गण मन का गान है हिंदी, भारत का स्वाभिमान है हिंदी
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अयोध्या। हिंदी दिवस पर बुधवार शाम आर्य समाज मंदिर में काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक रामचंद्र यादव ने कहा कि कवि अपनी लेखनी के बल पर समाज को नई दिशा प्रदान करता है।
वह बड़ी ही मजबूती के साथ अपनी बात देश और समाज के निर्माण के लिए रखता है। समाजसेवी डॉ. निहाल रजा ने प्रधानमंत्री से मांग की कि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।
इस अवसर पर उप निरीक्षक, युवा समाजसेवी, व साहित्यकार रंजीत यादव को अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आर्य समाज के मंत्री शतींद्र प्रकाश शास्त्री ने सभी कवियों का माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
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काव्य गोष्ठी का प्रारंभ चंदा लाल राही ने मां वीणा पाणी की वंदना करते हुए कहा कि ‘बीना स्वर झंकार दे माता, जीवन वृंदावन हो जाए...’। साहित्य भूषण से सम्मानित पुलिस उपनिरीक्षक रंजीत यादव ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा की ‘प्रिय जन हेलमेट रखिए सदा अपने पास...’।
युवा कवि एवं साहित्यकार अशोक कुमार कौशल ने पढ़ा कि ‘जहां स्नेह सरिता की बहती है धारा, उसी पुण्य वसुधा की वाणी है हिंदी...’। राजेंद्र कुमार झकझोर ने कहा ‘हिंदी दिवस मनाना है तो हिंदी को अपनाना होगा...’।
विंध्यवासिनी प्रसाद मिश्र चंचल ने पढ़ा ‘जन गण मन का गान है हिंदी, भारत का स्वाभिमान है हिंदी...’। कार्यक्रम के आयोजक सेवा निवृत्त अध्यापक कृष्णानंद गुप्त ने पढ़ा कि ‘हिंदी भाषा है कल्पवृक्ष, घर-घर में इसे उगाना है...’।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अध्यापक देवेंद्र चरण खरे ने पढ़ा कि ‘मैं संभावनाओं के द्वारे खड़ा हूं, जहां भी हूं मैं फिक्र तेरी ही रहती है...’।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध कवि सत्यदेव गुप्त सत्य ने पढ़ा कि ‘राष्ट्रभाषा, राष्ट्र स्वर राष्ट्र की पहचान है हिंदी...’। हर प्रसाद पांडेय, चंदा लाल राही सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई। मौके पर पूर्व चेयरमैन अशोक कसौधन, राजेश गुप्ता, सुभाष चंद्र चौरसिया, देवेश अग्रवाल समेत अन्य मौजूद रहे।
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वह बड़ी ही मजबूती के साथ अपनी बात देश और समाज के निर्माण के लिए रखता है। समाजसेवी डॉ. निहाल रजा ने प्रधानमंत्री से मांग की कि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।
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इस अवसर पर उप निरीक्षक, युवा समाजसेवी, व साहित्यकार रंजीत यादव को अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आर्य समाज के मंत्री शतींद्र प्रकाश शास्त्री ने सभी कवियों का माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
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काव्य गोष्ठी का प्रारंभ चंदा लाल राही ने मां वीणा पाणी की वंदना करते हुए कहा कि ‘बीना स्वर झंकार दे माता, जीवन वृंदावन हो जाए...’। साहित्य भूषण से सम्मानित पुलिस उपनिरीक्षक रंजीत यादव ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा की ‘प्रिय जन हेलमेट रखिए सदा अपने पास...’।
युवा कवि एवं साहित्यकार अशोक कुमार कौशल ने पढ़ा कि ‘जहां स्नेह सरिता की बहती है धारा, उसी पुण्य वसुधा की वाणी है हिंदी...’। राजेंद्र कुमार झकझोर ने कहा ‘हिंदी दिवस मनाना है तो हिंदी को अपनाना होगा...’।
विंध्यवासिनी प्रसाद मिश्र चंचल ने पढ़ा ‘जन गण मन का गान है हिंदी, भारत का स्वाभिमान है हिंदी...’। कार्यक्रम के आयोजक सेवा निवृत्त अध्यापक कृष्णानंद गुप्त ने पढ़ा कि ‘हिंदी भाषा है कल्पवृक्ष, घर-घर में इसे उगाना है...’।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अध्यापक देवेंद्र चरण खरे ने पढ़ा कि ‘मैं संभावनाओं के द्वारे खड़ा हूं, जहां भी हूं मैं फिक्र तेरी ही रहती है...’।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध कवि सत्यदेव गुप्त सत्य ने पढ़ा कि ‘राष्ट्रभाषा, राष्ट्र स्वर राष्ट्र की पहचान है हिंदी...’। हर प्रसाद पांडेय, चंदा लाल राही सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई। मौके पर पूर्व चेयरमैन अशोक कसौधन, राजेश गुप्ता, सुभाष चंद्र चौरसिया, देवेश अग्रवाल समेत अन्य मौजूद रहे।