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तीन विभूतियों को मिला रामकिंकर सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो/अयोध्या
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:56 PM IST
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अयोध्या में तीन विभूतियों को मिला रामकिंकर सम्मान।
- फोटो : अमर उजाला
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गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर सोमवार को प्रो. सुरेश प्रसाद व्यास, पद्मभूषण नारायण सिंह व अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल को श्री रामकिंकर सम्मान से विभूषित किया गया।
युगतुलसी पं. रामकिंकर की साधना स्थली रामायणम् में समारोहपूर्वक रामायणम् की अध्यक्ष एवं युग तुलसी की मानस पुत्री मंदाकिनी रामकिंकर ने शॉल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र के साथ यह सम्मान प्रदान किया। समारोह में पं. रामकिंकर के चार पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
इस मौके पर मंदाकिनी ने कहा कि समारोह में सुरेश प्रसाद, नारायण सिंह व जीसीआर जायसवाल जैसी विभूतियों को यह सम्मान देकर रामायणम् स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने सम्मानित विभूतियों की सेवा व उनके सरोकार को देश व समाज के लिए प्रेरणाप्रद बताया।
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सम्मान प्राप्त करने वालों में प्रो. सुरेश ने औषधि निर्माण के क्षेत्र में फार्मेसी शाखा के अंतर्गत एम फार्मा एवं पीएचडी की उपाधि अर्जित करने के साथ कामनवेल्थ छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लंदन विश्वविद्यालय इंग्लैंड से डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की है।
उन्होंने गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा आयोजित रामायण विसारद की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। प्रो. व्यास ने अपने पैतृक गांव मोहली तहसील उरई जिला सागर मध्य प्रदेश में सन् 1974 से निरंतर अखिल भारतीय श्रीराम चरित मानस का साप्ताहिक सम्मेलन करते आ रहे हैं।
व्यवसायिक कार्य क्षेत्र में उनके निर्देशन में 55 शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि अर्जित की, साथ ही सागर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन व विवि के कुलपति भी रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने वाले वर्ष 1983 में पद्मश्री, 1991 में पद्मभूषण और 2003 में देश के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा सदस्य मनोनीत राजस्थान के जोधपुर जिले से मानकलाओं ग्राम के श्रीनारायण सिंह ने समाजसेवा में जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने 700 से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से नशा मुक्ति अभियान चलाकर 60 हजार से ज्यादा लोगों को नशे से मुक्ति दिलाई। इनको अनूठे कार्य के लिए यूनाईटेड नेशन इंडियन असियान एवं सार्क सम्मेलन में भी आमंत्रित किया गया।
सन् 1991 में शारीरिक रूप से असक्त बच्चों के लिए अपने गांव में सुचेता कृपलानी शिक्षा निकेतन आवासीय विद्यालय की स्थापना की। ये उच्च न्यायालय राजस्थान द्वारा गठित लोक अदालत के सदस्य हैं।
साथ ही वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, काशी विश्वविद्यालय में शीर्ष पदों पर रहे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल को सम्मानित किया गया।
समारोह में श्रीराम किंकर के साहित्य शिवतत्व, प्रेममूर्ति भरत, अंतर्दर्पण एवं श्रीराम गीता का लोकार्पण किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे।
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युगतुलसी पं. रामकिंकर की साधना स्थली रामायणम् में समारोहपूर्वक रामायणम् की अध्यक्ष एवं युग तुलसी की मानस पुत्री मंदाकिनी रामकिंकर ने शॉल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र के साथ यह सम्मान प्रदान किया। समारोह में पं. रामकिंकर के चार पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।
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इस मौके पर मंदाकिनी ने कहा कि समारोह में सुरेश प्रसाद, नारायण सिंह व जीसीआर जायसवाल जैसी विभूतियों को यह सम्मान देकर रामायणम् स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने सम्मानित विभूतियों की सेवा व उनके सरोकार को देश व समाज के लिए प्रेरणाप्रद बताया।
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सम्मान प्राप्त करने वालों में प्रो. सुरेश ने औषधि निर्माण के क्षेत्र में फार्मेसी शाखा के अंतर्गत एम फार्मा एवं पीएचडी की उपाधि अर्जित करने के साथ कामनवेल्थ छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लंदन विश्वविद्यालय इंग्लैंड से डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की है।
उन्होंने गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा आयोजित रामायण विसारद की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। प्रो. व्यास ने अपने पैतृक गांव मोहली तहसील उरई जिला सागर मध्य प्रदेश में सन् 1974 से निरंतर अखिल भारतीय श्रीराम चरित मानस का साप्ताहिक सम्मेलन करते आ रहे हैं।
व्यवसायिक कार्य क्षेत्र में उनके निर्देशन में 55 शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि अर्जित की, साथ ही सागर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन व विवि के कुलपति भी रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने वाले वर्ष 1983 में पद्मश्री, 1991 में पद्मभूषण और 2003 में देश के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा सदस्य मनोनीत राजस्थान के जोधपुर जिले से मानकलाओं ग्राम के श्रीनारायण सिंह ने समाजसेवा में जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने 700 से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से नशा मुक्ति अभियान चलाकर 60 हजार से ज्यादा लोगों को नशे से मुक्ति दिलाई। इनको अनूठे कार्य के लिए यूनाईटेड नेशन इंडियन असियान एवं सार्क सम्मेलन में भी आमंत्रित किया गया।
सन् 1991 में शारीरिक रूप से असक्त बच्चों के लिए अपने गांव में सुचेता कृपलानी शिक्षा निकेतन आवासीय विद्यालय की स्थापना की। ये उच्च न्यायालय राजस्थान द्वारा गठित लोक अदालत के सदस्य हैं।
साथ ही वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, काशी विश्वविद्यालय में शीर्ष पदों पर रहे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल को सम्मानित किया गया।
समारोह में श्रीराम किंकर के साहित्य शिवतत्व, प्रेममूर्ति भरत, अंतर्दर्पण एवं श्रीराम गीता का लोकार्पण किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे।