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58 साल बाद छह शुभ योग में 30 से शुरू होगा गुप्त नवरात्र
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अयोध्या। मनोकामना की पूर्ति और साधना के लिए विशेष फलदायी माने जाने वाले गुप्त नवरात्र की शुरूआत 30 जून से होगी। 58 साल बाद गुप्त नवरात्र पर छह महा संयोगों का निर्माण हो रहा है, जो साधकों को अभीष्ट की प्राप्ति कराएगा।
30 जून गुरुवार को पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र है। इसमें किए गए अनुष्ठानों और कार्यों में विशेष सफलता मिलेगी। ज्योतिष के मर्मज्ञ आचार्य प्रवीण बताते हैं कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ आरंभ होकर नवरात्र का समापन नौ जुलाई को दशमी तिथि के साथ होगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:26 बजे से लेकर 6:43 बजे तक रहेगा। बताया कि नवरात्र की शुरूआत ही शुभ संयोगों में हो रही है। पहले दिन ही 30 जून को एक साथ गुरू पुष्य योग, सर्वार्थ, सिद्ध योग, अमृत सिद्धि योग, अडाल योग और विडाल योग बन रहे हैं।
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इसके साथ ही पुष्य नक्षत्र का भी निर्माण हो रहा है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि एक साथ इतने शुभ मुहूर्त बेहद फलदायी होते हैं। गुप्त नवरात्र के पहले दिन जो भी कार्य शुभता के साथ किए जाएंगे वह सफल होंगे, मनोरथ पूर्ण होगा।
जातक अपनी राशि के अनुसार गुप्त नवरात्र में मंत्रों का जाप करके सुख शांति और समृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य ने बताया कि रामनगरी के कई देवी मंदिरों में पूरे नौ दिनों तक साधकों द्वारा गुप्त आराधना की जाएगी।
गुप्त नवरात्र के नौ दिनों के शुभ योग
30 जून- गुरू पुष्य, स्वार्थ सिद्ध, अमृत सिद्ध योग। 01 जुलाई- रवि योग। 02 जुलाई-रवि योग। 03 जुलाई-रवि योग। 04 जुलाई-रवि योग। 05 जुलाई- त्रिपुष्कर योग, रवि योग। 06 जुलाई- सर्वार्थसिद्ध योग, रवि योग। 07 जुलाई-दुर्गा अष्टमी। 08 जुलाई- रवि योग, नवमी।
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30 जून गुरुवार को पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र है। इसमें किए गए अनुष्ठानों और कार्यों में विशेष सफलता मिलेगी। ज्योतिष के मर्मज्ञ आचार्य प्रवीण बताते हैं कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ आरंभ होकर नवरात्र का समापन नौ जुलाई को दशमी तिथि के साथ होगा।
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:26 बजे से लेकर 6:43 बजे तक रहेगा। बताया कि नवरात्र की शुरूआत ही शुभ संयोगों में हो रही है। पहले दिन ही 30 जून को एक साथ गुरू पुष्य योग, सर्वार्थ, सिद्ध योग, अमृत सिद्धि योग, अडाल योग और विडाल योग बन रहे हैं।
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इसके साथ ही पुष्य नक्षत्र का भी निर्माण हो रहा है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि एक साथ इतने शुभ मुहूर्त बेहद फलदायी होते हैं। गुप्त नवरात्र के पहले दिन जो भी कार्य शुभता के साथ किए जाएंगे वह सफल होंगे, मनोरथ पूर्ण होगा।
जातक अपनी राशि के अनुसार गुप्त नवरात्र में मंत्रों का जाप करके सुख शांति और समृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य ने बताया कि रामनगरी के कई देवी मंदिरों में पूरे नौ दिनों तक साधकों द्वारा गुप्त आराधना की जाएगी।
गुप्त नवरात्र के नौ दिनों के शुभ योग
30 जून- गुरू पुष्य, स्वार्थ सिद्ध, अमृत सिद्ध योग। 01 जुलाई- रवि योग। 02 जुलाई-रवि योग। 03 जुलाई-रवि योग। 04 जुलाई-रवि योग। 05 जुलाई- त्रिपुष्कर योग, रवि योग। 06 जुलाई- सर्वार्थसिद्ध योग, रवि योग। 07 जुलाई-दुर्गा अष्टमी। 08 जुलाई- रवि योग, नवमी।