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सामान ने फिर उलझाई गुमनामी बाबा की पहचान

Wed, 16 Mar 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Wed, 16 Mar 2016 11:55 PM IST
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goods of gumnami Baba create confusion
बक्से में मिले गुमनामी बाबा का सामान - फोटो : अमर उजाला
गुमनामी बाबा के बक्से का राज अब खुल चुका है। पहले उनके खाने-पीने, रहने-पहनने के सामान मिले थे, मगर जब मुखर्जी आयोग को भेजे गए सामानों के बक्से खुले तो नितांत नेताजी से जुड़ी चौंकाने वाली चीजें सामने आईं।
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यह वही सामान हैं जिन्हें स्वयं न्यायमूर्ति मनोज मुखर्जी ने यहां कोषागार आकर जांच के छांटा था। अब सवाल उठता है कि बाबा की सहेजी गईं बहुत सी चीजें नेताजी सुभाषचंद्र के सामानों से मिलती-जुलती क्यों है?
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गुमनामी बाबा के आखिरी बक्से से नेताजी की फैमिली फोटोज मिली हैं, तो कई ऐसे पत्र जो नेताजी से रिश्ते की बानगी गढ़ते नजर आते हैं। हालांकि 10 साल हो गए मुखर्जी आयोग इन सबका परीक्षण कर निष्कर्ष दे चुका है कि गुमनामी बाबा के नेताजी होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
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गुनमामी बाबा उर्फ भगवन जी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस बताने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, मगर इसमें कोई भी ऐसा शख्स नहीं है जो उनके करीबी रहने की बात तो दूर मिलने व देखने तक का दावा कर सके।

यही सच्चाई नेताजी की मौत के रहस्यों से पर्दा हटाने के लिए बने आखिरी आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस मनोज मुखर्जी की जांच में भी साबित हुआ। यहां के एक निजी चिकित्सक आरपी मिश्र सिर्फ इतना कहते हैं कि वे रहस्यमय शख्स थे, लेकिन नेताजी होने पर चुप हो जाते हैं।

आयोग ने भी कोलकाता से फैजाबाद, दिल्ली से ताइपे व जापान तक ऐसे लोगों को खंगाला है, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे गुमनामी बाबा को नेताजी माना जा सके। गुमनामी बाबा का यहां 27 बक्सों में करीब 2070 सामान कोषागार में रखा गया था।

जिसे यहां स्वयं न्यायमूर्ति मनोज मुखर्जी ने आकर देखा और छंटाई करके दो बक्सों में सामान ले गए। इसका आखिरी बक्सा बुधवार को खुला है। इसमें करीब 1681 पत्र हैं, बाकी फेमिली फोटो आदि हैं। पत्रों में अधिकांश वही हैं, जिन्हें उनके शिष्यों ने लिखे हैं।

गुमनामी बाबा के आखिरी बक्से से नेताजी की फैमिली फोटोज मिली हैं। एक फोटो में बोस के पिता जानकी नाथ, मां प्रभावती देवी, भाई-बहन और पोते-पोती नजर आ रहे हैं। फोटो में सुभाष चंद्र बोस की फैमिली के 22 लोग हैं।

ऊपर की लाइन में (बाएं से दाएं) सुधीर चंद्र बोस, शरत चंद्र बोस, सुनील चंद्र और सुभाष चंद्र बोस हैं। बीच की लाइन में (बीच में बैठ हुए) नेताजी के पिता जानकी नाथ बोस, मां प्रभावती देवी और तीन बहनें हैं। फोटो में नीचे की लाइन में जानकी नाथ बोस के पोते-पोतियां हैं।

इसके अलावा भी कई अन्य फैमिली फोटोज मिली हैं। कोलकाता में हर वर्ष 23 जनवरी को मनाए जाने वाले नेताजी जन्मोत्सव की तस्वीरें और लीला रॉय की मृत्यु पर हुई शोक सभाओं की तस्वीरें भी हैं।

कोषागार के डबल लॉक से निकले गुमनामी बाबा के बक्सों से मिले सामानों को सूचीबद्ध करने वाली प्रशासनिक टीम के साथ शामिल गुमनामी बाबा के अंतिम सांस लेने वाले रामभवन के मकान मालिक शक्ति सिंह के मुताबिक, 4 फरवरी, 1986 को नेताजी के भाई सुरेश चंद्र बोस की बेटी ललिता यहां आई थीं।


उन्होंने ही फोटो में लोगों की पहचान की थी। आखिरी बक्से से आजाद हिंद फौज (आईएनए) के कमांडर पबित्र मोहन रॉय, सुनील दास गुप्ता या सुनील कृष्ण गुप्ता के 23 जनवरी या दुर्गापूजा में आने को लेकर लेटर और टेलीग्राम भी मिले हैं। पबित्र मोहन ने एक पत्र में गुमनामी बाबा को कभी स्वामी जी तो कभी भगवन जी कहा है।

 
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