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मेधावियों के लिए हो अनुकूल परिवेश
फैजाबाद
Updated Wed, 08 Feb 2017 11:39 PM IST
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अवध विश्वविद्यालय में अमर उजाला के फोकस ग्रुप में मौजूद मेधावी।
- फोटो : अमर उजाला
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मेधावियों की आंखों में खुद के सुंदर भविष्य का सपना तो अंगड़ाई ले ही रहा है, इसी के साथ देश और समाज के प्रति भी उनकी दृष्टि बिल्कुल साफ है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि के प्रांगण में गोल्ड मेडल और अन्य उपाधि प्राप्त मेधावियों से जब उनके सियासी अभिरुचि से लेकर अन्य देश समाज के अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई तो उन्होंने अमर उजाला के फोकस ग्रुप में बड़ी बेबाकी से अपनी-अपनी राय रखी।
मेधावियों को दर्द है कि बेरोजगारी कम करने की बात तो होती है लेकिन वह बढ़ती ही जा रही है। गरीबी मिटाने के वादे किए जाते रहते हैं लेकिन गरीबी ऐसी हो गई है कि वह बढ़ती ही जा रही है। सबको छत देने को भी कई बार कहा गया लेकिन अब भी तमाम परिवार ऐसे हैं जिनके सिर पर छत नहीं है। मेधावियों को लगता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं खामी है तथा इन सब चीजों को कम करने के जो वादे और दावे किए जाते हैं, वह भी एक प्रकार का सियासी-वाग्जाल ही है।
एक मेधावी ने कहा कि देश बढ़ रहा है, विश्व में उसकी धाक बढ़ रही है फिर भी यहां की समस्याएं क्यों कम नहीं हो रही हैं। बेरोजगारी बड़ी समस्या है और समय रहते उसके समाधान करने की जरूरत है। ब्रेन ड्रेन को उठाते हुए एक मेधावी ने कहा कि आखिर यहां पर काम के अवसर और परिस्थितियों में वह कौन सी खामी है कि यहां की प्रतिभाएं यहीं की मिट्टी और खाद-पानी से तैयार होकर दूसरे देशों की सेवा में क्यों चली जाती हैं।
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चुनावी घोषणा पत्र में किए जा रहे लुभावने वादों से सजग रहने की सलाह देते हुए एक मेधावी ने कहा कि रोजगार दे दो, इसके बाद तो सभी जरूरत की चीजें काम करने वाले हाथ खुद खरीद लेंगे। जातिवाद, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद आदि से दूर रहने की सलाह देते हुए एक मेधावी ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि अब तो सिर्फ विकासवाद ही चलना चाहिए। शैक्षणिक स्तर में सुधार करने की बात करते हुए एक मेधावी ने कहा कि शैक्षिक संस्थान तो खूब खुले है लेकिन क्या वहां से निकलने वाले छात्र/छात्राओं को उसी अनुपात में काम मिल पा रहा है। शैक्षिक परिवेश में सख्ती के साथ सुधार किए जाने की भी मांग जोर-शोर से उठी।
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मेधावियों को दर्द है कि बेरोजगारी कम करने की बात तो होती है लेकिन वह बढ़ती ही जा रही है। गरीबी मिटाने के वादे किए जाते रहते हैं लेकिन गरीबी ऐसी हो गई है कि वह बढ़ती ही जा रही है। सबको छत देने को भी कई बार कहा गया लेकिन अब भी तमाम परिवार ऐसे हैं जिनके सिर पर छत नहीं है। मेधावियों को लगता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं खामी है तथा इन सब चीजों को कम करने के जो वादे और दावे किए जाते हैं, वह भी एक प्रकार का सियासी-वाग्जाल ही है।
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एक मेधावी ने कहा कि देश बढ़ रहा है, विश्व में उसकी धाक बढ़ रही है फिर भी यहां की समस्याएं क्यों कम नहीं हो रही हैं। बेरोजगारी बड़ी समस्या है और समय रहते उसके समाधान करने की जरूरत है। ब्रेन ड्रेन को उठाते हुए एक मेधावी ने कहा कि आखिर यहां पर काम के अवसर और परिस्थितियों में वह कौन सी खामी है कि यहां की प्रतिभाएं यहीं की मिट्टी और खाद-पानी से तैयार होकर दूसरे देशों की सेवा में क्यों चली जाती हैं।
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चुनावी घोषणा पत्र में किए जा रहे लुभावने वादों से सजग रहने की सलाह देते हुए एक मेधावी ने कहा कि रोजगार दे दो, इसके बाद तो सभी जरूरत की चीजें काम करने वाले हाथ खुद खरीद लेंगे। जातिवाद, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद आदि से दूर रहने की सलाह देते हुए एक मेधावी ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि अब तो सिर्फ विकासवाद ही चलना चाहिए। शैक्षणिक स्तर में सुधार करने की बात करते हुए एक मेधावी ने कहा कि शैक्षिक संस्थान तो खूब खुले है लेकिन क्या वहां से निकलने वाले छात्र/छात्राओं को उसी अनुपात में काम मिल पा रहा है। शैक्षिक परिवेश में सख्ती के साथ सुधार किए जाने की भी मांग जोर-शोर से उठी।