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फैजाबाद और अयोध्या को मिले पहले जैसा महत्व

Wed, 15 Feb 2017 10:37 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Wed, 15 Feb 2017 10:37 PM IST
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Faizabad and Ayodhya had the same importance
बुधवार को उसरु स्थित गुरुनानक कॉलेज में अमर उजाला के फोकस ग्रुप में मौजूद शिक्षक-शिक्षिकाएं। - फोटो : अमर उजाला
शिक्षक/शिक्षिकाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, अर्थनीति से लेकर पयर्टन नीति पर जुड़वा शहर की उपेक्षा को विकास व रोजगार के लिए सबसे बड़ी बाधा माना। अयोध्या को लेकर की जा रही राजनीति से सजग रहने के साथ ही सिर्फ विकास नीति पर महत्व देने की मांग उठी।
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जाति और मजहब के  सियासी राग से सावधान रहने को भी कहा गया। अयोध्या को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने के साथ ही फैजाबाद और अयोध्या को स्मार्ट सिटी बनाने की भी मांग उठी। आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर प्रतिभाओं को सही तवज्जो देने को भी कहा गया। अमर उजाला फोकस ग्रुप में बुधवार को गुरु नानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज में शिक्षक व शिक्षिकाओं ने अपनी राय रखी। 
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एक शिक्षिका ने कहा कि जब संविधान ने सिर्फ 10 वर्ष के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी तो आज तक क्यों चल रहा है। इससे प्रतिभाओं/योग्यताओं को सही ढंग से सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिससे उनमें हताशा आ रही है। अयोध्या और फैजाबाद शहर को उसके  प्राचीन गौरव के अनुसार विकसित किए जाने की मांग उठी।
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एक शिक्षिका ने कहा कि छोटी सी नौकरी के लिए आवेदन करिए तो शैक्षिक योग्यता का कालम रहता है लेकिन जो लोग हमारे लिए विधान बनाते हैं, उनको इस मामले में पूरी तरह से छूट दे दी गई है। जनप्रतिनिधि के लिए भी शैक्षिक योग्यता का निर्धारण होना चाहिए।

एमएलए पढ़ा लिखा होगा तो निश्चित है कि उसमें एक दूसरे प्रकार की दृष्टि होगी जिससे राज-समाज का भला होगा। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और बेसाख होती शैक्षिक संस्थाओं पर भी सवाल उठे। एक अध्यापिका ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है क्योकि यदि यही खराब होगा तो इससे निकलने वाले लोगों से बेहरत काम की आशा नहीं की जा सकती है।


प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों को मिलने वाले वेेतन और सुविधाओं पर भी बात हुई। एक अध्यापिका ने कहा कि हम भी बच्चों को पढ़ाते है और देश के  भविष्य का निर्माण करते हैं लेकिन सरकारी स्कूलों के मुकाबले हम लोगों को सुविधाए नहीं मिल रही है।
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