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...नेत्रदानियों की आंखें मना रहीं दीपावली
फैजाबाद
Updated Sun, 30 Oct 2016 07:13 PM IST
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रुदौली में नेत्रदान करने वाली शीलाधवन के पुत्र विनोद धवन परिवार के साथ।
- फोटो : अमर उजाला
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रुदौली क्षेत्र में नेत्रदान की शुरुआत आठ वर्ष पहले गड़हा गांव की कलावती ने किया था । इलाके में दान का एक दीया जला तो धीरे-धीरे दीयों की लड़ी तैयार होने लगी है। नेत्रदानियों के परिवारीजनों को फख्र है कि उनके अपने लोगों की आंख आज भी जिंदा है और जहां भी होगी, दीपावली मना रही होंगी।
सीएचसी रुदौली के लैब टेक्नीशियन अशोक कौसल के पिता दुखी प्रसाद ने नेत्र दान किया था। अशोक ने खुशी का इजहार करते कहा हमारे पिता की नजरें आज भी जिंदा है जो उगते-डूबते सूरज को देख रही हैं। खतराना मोहल्ले में देवर भाभी ने आंख दान की ।
राम चंद्र धवन उर्फ रम्मी भईया और शीला धवन ने नेत्र दान किया। रामचंद्र धवन के भतीजे सुनील धवन ने कहा कि चाचा की आंख दिवाली मना रही होगी। शीला धवन के पुत्र विनोद धवन ने कहा कि मेरी मां की आखों से कोई दीवाली की रोशनी देखेगा।
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रुदौली के घोसियाना निवासी नेत्रदानी बजरंग लाल अग्रवाल के पुत्र विजय अग्रवाल अपने पिता के नेत्र दान पर खुश हैं। कहा कि पिताजी तो अब नहीं है लेकिन उनकी आंखें दुनिया देख रही हैं।
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सीएचसी रुदौली के लैब टेक्नीशियन अशोक कौसल के पिता दुखी प्रसाद ने नेत्र दान किया था। अशोक ने खुशी का इजहार करते कहा हमारे पिता की नजरें आज भी जिंदा है जो उगते-डूबते सूरज को देख रही हैं। खतराना मोहल्ले में देवर भाभी ने आंख दान की ।
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राम चंद्र धवन उर्फ रम्मी भईया और शीला धवन ने नेत्र दान किया। रामचंद्र धवन के भतीजे सुनील धवन ने कहा कि चाचा की आंख दिवाली मना रही होगी। शीला धवन के पुत्र विनोद धवन ने कहा कि मेरी मां की आखों से कोई दीवाली की रोशनी देखेगा।
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रुदौली के घोसियाना निवासी नेत्रदानी बजरंग लाल अग्रवाल के पुत्र विजय अग्रवाल अपने पिता के नेत्र दान पर खुश हैं। कहा कि पिताजी तो अब नहीं है लेकिन उनकी आंखें दुनिया देख रही हैं।