{"_id":"6daa205994f94bd74b63ca1c25a12c7a","slug":"expect-relief-from-inflation-with-growth-in-every-class-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर वर्ग को विकास के साथ महंगाई से राहत की उम्मीद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर वर्ग को विकास के साथ महंगाई से राहत की उम्मीद
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2016 11:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सोमवार को देश का आम बजट पेश करेंगे। आने वाले बजट से हर वर्ग को राहत की उम्मीदें हैं। बढ़ती महंगाई में नौकरी पेशा वर्ग टैक्स स्लैब में ढाई लाख तक की छूट की उम्मीद लगाए है तो किसानों को मौसम की मार से बचाव को ज्यादा सब्सिडी और बेहतर बीमा के साथ कृषि सेक्टर में ज्यादा निवेश वाला बजट चाहिए।
व्यापारियों व उद्यमी को वस्तुओं पर लगने वाले भारी भरकम टैक्स में रियायत की दरकार है ताकि आम आदमी को भी सस्ती वस्तुएं मिले। विद्यार्थियों को आम बजट में रोजगारपरक शिक्षा पर जोर दिए जाने की उम्मीद है।
तकनीकी, प्रबंध और मेडिकल की सस्ती पढ़ाई के लिए मनमानी फीस पर रोक के साथ रोजगार के साधन और एजुकेशन लोन में ब्याज दर और कम होने की भी आस है। महिलाएं रसोई गैस से लेकर अन्य जरूरी चीजों में राहत चाहती हैं। सौन्दर्य प्रसाधन के दाम में कमी के साथ ब्यूटी पार्लर, रेस्त्रां आदि के सेवा कर में कमी की उम्मीद करती हैं।
विज्ञापन
जैविक खेती को मिले बढ़ावा
ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के लिए कृषि सेक्टर में अनुसंधान के साथ भरपूर निवेश की बात बजट में प्रमुखता से होनी चाहिए। ताकि सूखे और बाढ़ से स्थितियां नियंत्रण में रहे। सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में जैविक खेती की विधियों को बढ़ावा दें, इससे मृदा की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही कम उपज के बाद भी अधिक दाम मिल सकेंगे। - प्रो. अख्तर हसीब, नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज
आयकर स्लैब हो पांच लाख
आयकर स्लैब कम से कम पांच लाख होना चाहिए ताकि नौकरी पेशा वर्ग महंगाई में जी सके। साथ ही मकान भत्ता भी बढ़ना चाहिए। सरकार जल्द से जल्द सातवां वेतन आयोग लागू करे। इसमें बढ़ोतरी छठें वेतन आयोग के औसत के अनुसार होनी चाहिए। - प्रो. अजय प्रताप सिंह, विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग, अवध विवि
कृषि आधारित बजट बने
खेती किसानी पर आधारित बजट बनाए जाएं। कृषि उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार विकसित किए जाएं। कृषि उत्पादों की बिक्री दर उत्पादन लगात का कम से कम 25 फीसदी अधिक कीमत निर्धारित की जाए। फसलों की क्षति पर किसानों को बीमा का त्वरित लाभ दिलाया जाए ताकि किसानों को बीमा लाभ के लिए वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। -अशोक सिंह, प्रगतिशील किसान
दवाओं के दाम हो कम
कैंसर, हेपेटाइटिस ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी बीमारी में लंबे समय तक चतने वाली दवाओं की कीमतों में कमी की जानी चाहिए। इन दवाओं की कीमतों में इजाफा होने से पीड़ित व्यक्ति बीमारी के साथ साथ आर्थिक मोर्चे पर भी जूझेगा। लंबे समय तक चलने वाली दवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी न की जाए। -डॉ. शिवेन्द्र सिन्हा, वरिष्ठ चिकित्सक
चिकित्सा में रिसर्च को मिले बजट
दूसरे पैथी में रिसर्च के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान होना चाहिए। आयुर्वेद, यूनानी के साथ होम्योपैथ चिकित्सा प्रणाली पर रिसर्च के लिए और बजट दिया जाना चाहिए। -डॉ. मधु मिश्र
सस्ती और रोजगारपरक हो शिक्षा
शिक्षा का बाजारीकरण कर दिया गया है। कॉलेजों में फीस अधिक होने से गरीब परिवारों के मेधावी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं। प्राइवेट कॉलेजों की फीस को नियंत्रित किया जाए। व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। -अर्चना मिश्रा, बीएससी स्टूडेंट
आईटी सेक्टर का विस्तार जरूरी
जिला स्तर पर आईटी कॉलेज की स्थापना की जाए। तकनीकी शिक्षा के लिए युवाओं को नोयडा, दिल्ली व अन्य प्रदेशों में जाना पड़ता है। ऐसे में उच्चस्तरीय तकनीकी कॉलेजों के विस्तार का बजट में प्रावधान हो।-सिद्धांत दुबे बीटेक स्टूडेंट
सस्ती हो घरेलू गैस व खाद्य सामग्री
देश की आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए भोजन की जरूरत है। ऐसे में घरेलू गैस व खाद्य पदार्थों की कीमतों में किसी प्रकार का इजाफा न किया जाए। सरकार को महिलाओं के जरूरत की सामग्री को देख कर बजट का निर्माण करना चाहिए। - शिल्पी चौधरी, गृहणी
टैक्स दर में हो कमी
वस्तुओं पर लगने वाले भारी टैक्स में रियायत की उम्मीद है। ऐसे में आम आदमी को भी सस्ती वस्तुएं मिलेंगी। टैक्स में छूट मिलेगी तो ही लोगों के जेब में पैसा होगा। बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और रोजगार का सृजन होगा। -चंद्र प्रकाश गुप्त, व्यापारी
मेक इन व स्टार्ट अप इंडिया के लिए मिले कर छूट
सरकार को मेक इन इंडिया व स्टार्ट अप इंडिया को कामयाब बनाने के लिए बहुकर प्रणाली खत्म कर जीएसटी लागू करने का सार्थक प्रयास करना चाहिए। सर्विस टैक्स की लिमिट 10 से बढ़ाकर 25 लाख तक करनी चाहिए। कृषि क्षेत्र में सब्सिडी की मॉनीटरिंग होनी चाहिए। डीजल केवल किसान को सब्सिडी पर मिले। इसके लिए रसोई गैस की तरह किसान यदि डीजल खरीदे तो उसके खाते में सीधे सब्सिडी जाए। दूसरे लोग लाभ न पा सकें।- मनीष अग्रवाल, सीए
अच्छे दिनों की उम्मीद
शहर के एक परिवार के मुखिया राजेंद्र छाबड़ा कहते हैं कि इस बार केंद्र सरकार के आम बजट से बहुत उम्मीद है। सरकार ने करप्शन रोकने के लिए डिजीटल इंडिया का काम तेज किया है। जब आवश्यक सेवाओं से लेकर नौकरी, टेंडर, शिक्षा क्षेत्र में दाखिला समेत जरूरी प्रमाण पत्र ऑललाइन मिलने लगेगें तो करप्शन कम होगा। प्रीतिपाल सिंह पाली कहते हैं कि सरकार से सभी वर्गों को उम्मीद है। सुरजीत कौर कहती हैं कि महंगाई जरूर कम हुई लेकिन अभी काफी गुंजाइश है। युवा उद्यमी अमन दीप सिंह, गगनदीप सिंह व तरविंदर कौर कहती हैं कि जीएसटी लागू होने से कराधान प्रणाली की जटिलताओं से राहत मिलेगी।
विज्ञापन
व्यापारियों व उद्यमी को वस्तुओं पर लगने वाले भारी भरकम टैक्स में रियायत की दरकार है ताकि आम आदमी को भी सस्ती वस्तुएं मिले। विद्यार्थियों को आम बजट में रोजगारपरक शिक्षा पर जोर दिए जाने की उम्मीद है।
विज्ञापन
तकनीकी, प्रबंध और मेडिकल की सस्ती पढ़ाई के लिए मनमानी फीस पर रोक के साथ रोजगार के साधन और एजुकेशन लोन में ब्याज दर और कम होने की भी आस है। महिलाएं रसोई गैस से लेकर अन्य जरूरी चीजों में राहत चाहती हैं। सौन्दर्य प्रसाधन के दाम में कमी के साथ ब्यूटी पार्लर, रेस्त्रां आदि के सेवा कर में कमी की उम्मीद करती हैं।
विज्ञापन
जैविक खेती को मिले बढ़ावा
ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के लिए कृषि सेक्टर में अनुसंधान के साथ भरपूर निवेश की बात बजट में प्रमुखता से होनी चाहिए। ताकि सूखे और बाढ़ से स्थितियां नियंत्रण में रहे। सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में जैविक खेती की विधियों को बढ़ावा दें, इससे मृदा की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही कम उपज के बाद भी अधिक दाम मिल सकेंगे। - प्रो. अख्तर हसीब, नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज
आयकर स्लैब हो पांच लाख
आयकर स्लैब कम से कम पांच लाख होना चाहिए ताकि नौकरी पेशा वर्ग महंगाई में जी सके। साथ ही मकान भत्ता भी बढ़ना चाहिए। सरकार जल्द से जल्द सातवां वेतन आयोग लागू करे। इसमें बढ़ोतरी छठें वेतन आयोग के औसत के अनुसार होनी चाहिए। - प्रो. अजय प्रताप सिंह, विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग, अवध विवि
कृषि आधारित बजट बने
खेती किसानी पर आधारित बजट बनाए जाएं। कृषि उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार विकसित किए जाएं। कृषि उत्पादों की बिक्री दर उत्पादन लगात का कम से कम 25 फीसदी अधिक कीमत निर्धारित की जाए। फसलों की क्षति पर किसानों को बीमा का त्वरित लाभ दिलाया जाए ताकि किसानों को बीमा लाभ के लिए वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। -अशोक सिंह, प्रगतिशील किसान
दवाओं के दाम हो कम
कैंसर, हेपेटाइटिस ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी बीमारी में लंबे समय तक चतने वाली दवाओं की कीमतों में कमी की जानी चाहिए। इन दवाओं की कीमतों में इजाफा होने से पीड़ित व्यक्ति बीमारी के साथ साथ आर्थिक मोर्चे पर भी जूझेगा। लंबे समय तक चलने वाली दवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी न की जाए। -डॉ. शिवेन्द्र सिन्हा, वरिष्ठ चिकित्सक
चिकित्सा में रिसर्च को मिले बजट
दूसरे पैथी में रिसर्च के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान होना चाहिए। आयुर्वेद, यूनानी के साथ होम्योपैथ चिकित्सा प्रणाली पर रिसर्च के लिए और बजट दिया जाना चाहिए। -डॉ. मधु मिश्र
सस्ती और रोजगारपरक हो शिक्षा
शिक्षा का बाजारीकरण कर दिया गया है। कॉलेजों में फीस अधिक होने से गरीब परिवारों के मेधावी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं। प्राइवेट कॉलेजों की फीस को नियंत्रित किया जाए। व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। -अर्चना मिश्रा, बीएससी स्टूडेंट
आईटी सेक्टर का विस्तार जरूरी
जिला स्तर पर आईटी कॉलेज की स्थापना की जाए। तकनीकी शिक्षा के लिए युवाओं को नोयडा, दिल्ली व अन्य प्रदेशों में जाना पड़ता है। ऐसे में उच्चस्तरीय तकनीकी कॉलेजों के विस्तार का बजट में प्रावधान हो।-सिद्धांत दुबे बीटेक स्टूडेंट
सस्ती हो घरेलू गैस व खाद्य सामग्री
देश की आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए भोजन की जरूरत है। ऐसे में घरेलू गैस व खाद्य पदार्थों की कीमतों में किसी प्रकार का इजाफा न किया जाए। सरकार को महिलाओं के जरूरत की सामग्री को देख कर बजट का निर्माण करना चाहिए। - शिल्पी चौधरी, गृहणी
टैक्स दर में हो कमी
वस्तुओं पर लगने वाले भारी टैक्स में रियायत की उम्मीद है। ऐसे में आम आदमी को भी सस्ती वस्तुएं मिलेंगी। टैक्स में छूट मिलेगी तो ही लोगों के जेब में पैसा होगा। बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और रोजगार का सृजन होगा। -चंद्र प्रकाश गुप्त, व्यापारी
मेक इन व स्टार्ट अप इंडिया के लिए मिले कर छूट
सरकार को मेक इन इंडिया व स्टार्ट अप इंडिया को कामयाब बनाने के लिए बहुकर प्रणाली खत्म कर जीएसटी लागू करने का सार्थक प्रयास करना चाहिए। सर्विस टैक्स की लिमिट 10 से बढ़ाकर 25 लाख तक करनी चाहिए। कृषि क्षेत्र में सब्सिडी की मॉनीटरिंग होनी चाहिए। डीजल केवल किसान को सब्सिडी पर मिले। इसके लिए रसोई गैस की तरह किसान यदि डीजल खरीदे तो उसके खाते में सीधे सब्सिडी जाए। दूसरे लोग लाभ न पा सकें।- मनीष अग्रवाल, सीए
अच्छे दिनों की उम्मीद
शहर के एक परिवार के मुखिया राजेंद्र छाबड़ा कहते हैं कि इस बार केंद्र सरकार के आम बजट से बहुत उम्मीद है। सरकार ने करप्शन रोकने के लिए डिजीटल इंडिया का काम तेज किया है। जब आवश्यक सेवाओं से लेकर नौकरी, टेंडर, शिक्षा क्षेत्र में दाखिला समेत जरूरी प्रमाण पत्र ऑललाइन मिलने लगेगें तो करप्शन कम होगा। प्रीतिपाल सिंह पाली कहते हैं कि सरकार से सभी वर्गों को उम्मीद है। सुरजीत कौर कहती हैं कि महंगाई जरूर कम हुई लेकिन अभी काफी गुंजाइश है। युवा उद्यमी अमन दीप सिंह, गगनदीप सिंह व तरविंदर कौर कहती हैं कि जीएसटी लागू होने से कराधान प्रणाली की जटिलताओं से राहत मिलेगी।