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Ayodhya News: पूर्व विधायक पवन पांडेय व भाई कक्कू गैंगस्टर मामले में दोषमुक्त
Thu, 13 Jul 2023 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 13 Jul 2023 11:52 PM IST
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अयोध्या। गैंगस्टर जैसे संगीन मामले की केस डायरी पुलिस अभिलेखागार से गायब हो गई। इतना ही नहीं अभियोजन चलाने के लिए डीएम की ओर से दी गई संस्तुति की पत्रावली भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की जा सकी। मामले में अभियोजन पक्ष की लचर पैरवी व बरती गई लापरवाही के चलते ही कोर्ट ने पूर्व विधायक पवन पांडेय तथा उनके भाई कृष्ण कुमार पांडेय उर्फ कक्कू को गैंगस्टर मामले में आरोप से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। यह फैसला अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए अशोक कुमार दुबे की कोर्ट ने दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता केके सिंह ने बताया कि वर्ष 1996 में महाराजगंज थाना क्षेत्र में सत्येंद्र कुमार सिंह की हुई हत्या में पूर्व विधायक पवन पांडेय उनके छोटे भाई कृष्ण कुमार पांडेय तथा मंगलमणि तिवारी को आरोपी बनाया गया था। इन तीनों को वर्ष 1998 में दोषमुक्त भी कर दे दिया गया था। इसी हत्याकांड के बाद पवन कुमार पांडेय उनके छोटे भाई कक्कू तथा सत्य प्रकाश उर्फ सत्तू के खिलाफ गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई तत्कालीन थानाध्यक्ष महाराजगंज परमहंस राम ने की थी। इसकी विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया गया था। इनमें से सत्य प्रकाश की लखनऊ में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। अन्य दोनों आरोपियों को पूर्व गैंगस्टर जज श्रीराज सिंह ने उनमोचित कर दिया था।
इस आदेश के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी। यहां से उनमोचन आदेश निरस्त हुआ और फिर से मुकदमा चला। इतने बड़े संगीन मामले में भी केस डायरी पुलिस अभिलेखागार से गायब हो गई। काफी खोजबीन के बाद भी इसका अभी तक कुछ पता नहीं चला। इतना ही नहीं जिलाधिकारी की ओर से दी गई अभियोजन की संस्तुति से जुड़ी पत्रावली भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इसके परिणाम स्वरूप ही कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार देकर मामले से बरी कर दिया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता केके सिंह ने बताया कि वर्ष 1996 में महाराजगंज थाना क्षेत्र में सत्येंद्र कुमार सिंह की हुई हत्या में पूर्व विधायक पवन पांडेय उनके छोटे भाई कृष्ण कुमार पांडेय तथा मंगलमणि तिवारी को आरोपी बनाया गया था। इन तीनों को वर्ष 1998 में दोषमुक्त भी कर दे दिया गया था। इसी हत्याकांड के बाद पवन कुमार पांडेय उनके छोटे भाई कक्कू तथा सत्य प्रकाश उर्फ सत्तू के खिलाफ गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई तत्कालीन थानाध्यक्ष महाराजगंज परमहंस राम ने की थी। इसकी विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया गया था। इनमें से सत्य प्रकाश की लखनऊ में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया। अन्य दोनों आरोपियों को पूर्व गैंगस्टर जज श्रीराज सिंह ने उनमोचित कर दिया था।
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इस आदेश के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी। यहां से उनमोचन आदेश निरस्त हुआ और फिर से मुकदमा चला। इतने बड़े संगीन मामले में भी केस डायरी पुलिस अभिलेखागार से गायब हो गई। काफी खोजबीन के बाद भी इसका अभी तक कुछ पता नहीं चला। इतना ही नहीं जिलाधिकारी की ओर से दी गई अभियोजन की संस्तुति से जुड़ी पत्रावली भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इसके परिणाम स्वरूप ही कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार देकर मामले से बरी कर दिया।
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