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जिला अस्पताल की मानसिक रोग इकाई में ताला
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2015 10:20 PM IST
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तब से आने वाले मरीज मरीजों को लौटना पड़ रहा है। इसके पीछे राष्ट्रीय मानसिक रोग इकाई में तैनात चिकित्सक से लेकर पैरा मेडिकल स्टाफ तक संविदा पर कार्यरत होना बताया जा रहा है।
जिनकी इस वित्तीय वर्ष में अभी तक संविदा रिनीवल नहीं होने की वजह से इकाई में अब पूरी तरह ताला लग गया है। साथ ही मरीजों को दवा भी नहीं मिल रही है।
मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों का बुरा हाल है। इलाज तो बंद ही हो गया है। सरकारी से लेकर निजी मेडिकल स्टोरों से भी दवा नहीं मिल रही है। वजह अधिकतर दवाएं नारकोटिक्स एक्ट के दायरे में आती हैं।
सेड्यूल एच-1 की दवा होने की वजह से मरीज को पहले चिकित्सक को दिखाना होगा उसके बाद मरीजों को दवा मिलेगी। ऐसे में मरीजों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही हैं।
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पहले मरीज निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों को भारी भरकम फीस देते हैं और उनकी लिखी हुई दवाएं उन्हीं के मेडिकल स्टोर पर मिलती है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम का कहना है कि मानसिक रोग इकाई बंद होने की वजह से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय, लखनऊ की मेंटल इकाई को पत्र लिखा गया है। जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
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जिनकी इस वित्तीय वर्ष में अभी तक संविदा रिनीवल नहीं होने की वजह से इकाई में अब पूरी तरह ताला लग गया है। साथ ही मरीजों को दवा भी नहीं मिल रही है।
मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों का बुरा हाल है। इलाज तो बंद ही हो गया है। सरकारी से लेकर निजी मेडिकल स्टोरों से भी दवा नहीं मिल रही है। वजह अधिकतर दवाएं नारकोटिक्स एक्ट के दायरे में आती हैं।
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सेड्यूल एच-1 की दवा होने की वजह से मरीज को पहले चिकित्सक को दिखाना होगा उसके बाद मरीजों को दवा मिलेगी। ऐसे में मरीजों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही हैं।
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पहले मरीज निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों को भारी भरकम फीस देते हैं और उनकी लिखी हुई दवाएं उन्हीं के मेडिकल स्टोर पर मिलती है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम का कहना है कि मानसिक रोग इकाई बंद होने की वजह से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय, लखनऊ की मेंटल इकाई को पत्र लिखा गया है। जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।