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33 साल बाद फर्जी बैनामा कोर्ट से निरस्त

Sat, 27 Aug 2016 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Sat, 27 Aug 2016 12:16 AM IST
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33 years later, the court canceled the fake sale deed
अदालत में दायर किए गए बैनामा निरस्तीकरण के मुकदमे का फैसला तो आया लेकिन इसकी खुशी वादी को नहीं मिल पाई। 33 साल तक चले अदालती जंग में फतह होने के बारह साल पहले ही वादी की मौत हो चुकी थी। फैसला सुनने के बाद उसकी बेटी को प्रसन्नता तो हुई लेकिन बाप के न रहने का गम भी हुआ।
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कहा कि काश! पिताजी के रहते आ गया होता फैसला। यह फैसला सिविल जज जूनियर डिवीजन हवेली चिंताराम की अदालत से हुआ।  वादिनी के अधिवक्ता श्रवण कुमार मिश्र ने बताया कि बीकापुर तहसील के पारा हथिगो गांव निवासी रामफेर ने 31 जनवरी 1983 को बैनामा निरस्तीकरण का वाद दायर किया।
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कहा कि उनको पता चला कि उनकी साढ़े सात बीघा जमीन गांव के ही अयोध्या प्रसाद ने 18 नवंबर 1982 को अपने नाबालिग लड़के रामकेवल के नाम किसी दूसरे व्यक्ति को खड़ा करके बैनामा करवा लिया। इसके लिए न वह सब रजिस्ट्रार कार्यालय बीकापुर गए और न ही कोई कीमत ली। मुकदमा शुरू हुआ।
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वाद दायर करने के बाद जानकारी होने पर अयोध्या ने बैनामा निरस्तीकरण के वाद में कूटरचित सुलहनामा दाखिल करके विवादित भूमि का दो तिहाई रामफेर व एक तिहाई हिस्सा अपने नाम करवाकर राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवा लिया।

इस संधिपत्र को अपीलीय न्यायालय ने खारिज करते हुए मुकदमे का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करने का निचली अदालत को आदेश दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी न तो गवाही के लिए उपस्थित हुआ और न ही मूल बैनामा कोर्ट में प्रस्तुत किया। यही नहीं खुद की ओर से दायर काउंटर क्लेम को बिना शर्त वापस ले लिया।

मामले में अयोध्या व उसके लड़के रामकेवल व रामसूरत गवाह के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज हुई। इसमें पुलिस ने दौरान विवेचना रामफेर का निशानी अंगूठा और रजिस्टर नंबर आठ पर लगे अंगूठे को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जहां से रिपोर्ट आई कि रजिस्ट्रार दफ्तर में लगाया गया अंगूठा रामफेर का नहीं किसी दूसरे का है।

वाद की पैरवी करते हुए रामफेर की 95 साल की अवस्था में 11 जुलाई 2004 को मौत हो गई। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही चल अचल संपत्ति की वसीयतनामा अपनी पुत्री राजेश्वरी देवी निवासी खजुहा रूपीपुर जिला सुल्तानपुर को कर दी थी।


पिता की मौत के बाद राजेश्वरी मुकदमे में पक्षकार बनीं। कोर्ट ने सुनवाई के बाद बैनामे को निरस्त करते हुए रामकेवल व उसके पिता अयोध्या को प्रश्नगत भूमि पर राजेश्वरी देवी के कब्जा दखल में कोई हस्तक्षेप करने से सदैव के लिए मना कर दिया।
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