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बुखार ने ली एक और बच्ची की जान
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sun, 04 Sep 2016 10:27 PM IST
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित बच्चों में शनिवार रात एक और बच्ची की मौत हो गई। इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर डा. धर्मेंद्र राव ने बताया कि भर्ती के समय बच्ची की हालत गंभीर थी, उसे तेज बुखार और झटके आ रहे थे। महज एक घंटे के अंदर बच्ची ने दम तोड़ दिया।
अस्पताल में तीन दिन में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। इधर, अस्पताल में व्यवस्था का आलम यह है कि पखवारे भर से ब्लड सैंपल की जांच नहीं हो पा रही है। गोंडा जिले के मनकापुर की रहने वाले सरदार की चार वर्षीय पुत्री मानवी को चार दिन से बुखार आ रहा था।
स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं हुआ। शनिवार शाम तबियत अचानक खराब होने पर बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए। रात 10.10 बजे बच्ची को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। रात 11.15 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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इसके पूर्व शनिवार की भोर में सुबह साढ़े चार बजे जिवपुर (भरतकुंड) निवासी प्रेमलाल के सात वर्षीय पुत्र आलोक की मौत हो गई थी और शुक्रवार की दोपहर में बीकापुर निवासी सुनील श्रीवास्तव का तीन वर्षीय पुत्र अंशु ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में इनदिनों जो मरीज भर्ती हैं। उनमें से अधिकतर को तेज बुखार आ रहा है। कुछ बच्चाें की गर्दन में ऐंठन है और झटके भी आ रहे हैं। यह लक्षण सामान्यतया जापानी इंसेफलाइटिस का है।
फैजाबाद जिला तराई क्षेत्र से सटा होने की वजह से जेई की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले में वर्ष 2013 में 10, 2014 में दो और 2015 में जेई के एक मरीज की पुष्टि हुई थी। अभी तक दिमागी बुखार से पीड़ित मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए गोरखपुर लैब में भेजा जाता था।
वहां से जब तक रिपोर्ट आती है तब तक देर हो जाती थी। जापनी इंसेफलाटिस की गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष जिले में ही जेई की किट मंगा ली गई है। 16 अगस्त से दो सितंबर तक पांच मरीजों का ब्लड सैंपल कलेक्ट किया गया, लेकिन अभी तक जांच किसी भी मरीज का नहीं हुआ है।
पैथोलॉजिस्ट डा. आरडी सिंह का कहना है कि एक किट के पैकेट से छह लोगों की जांच होती है। कम से कम छह मरीजों का ब्लड सैंपल आ जाए तो किट खोला जाए। अभी तक लैब में पांच ही मरीजों का ब्लड सैंपल आया है।
ऐसे में एक और मरीज के ब्लड सैंपल आने का इंतजार किया जा रहा है। अब मरीजों की समय से जांच नहीं हो पाने से उनका इलाज अंधेरे में तीर मारने जैसा ही हैं।
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अस्पताल में तीन दिन में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। इधर, अस्पताल में व्यवस्था का आलम यह है कि पखवारे भर से ब्लड सैंपल की जांच नहीं हो पा रही है। गोंडा जिले के मनकापुर की रहने वाले सरदार की चार वर्षीय पुत्री मानवी को चार दिन से बुखार आ रहा था।
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स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं हुआ। शनिवार शाम तबियत अचानक खराब होने पर बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए। रात 10.10 बजे बच्ची को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। रात 11.15 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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इसके पूर्व शनिवार की भोर में सुबह साढ़े चार बजे जिवपुर (भरतकुंड) निवासी प्रेमलाल के सात वर्षीय पुत्र आलोक की मौत हो गई थी और शुक्रवार की दोपहर में बीकापुर निवासी सुनील श्रीवास्तव का तीन वर्षीय पुत्र अंशु ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में इनदिनों जो मरीज भर्ती हैं। उनमें से अधिकतर को तेज बुखार आ रहा है। कुछ बच्चाें की गर्दन में ऐंठन है और झटके भी आ रहे हैं। यह लक्षण सामान्यतया जापानी इंसेफलाइटिस का है।
फैजाबाद जिला तराई क्षेत्र से सटा होने की वजह से जेई की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले में वर्ष 2013 में 10, 2014 में दो और 2015 में जेई के एक मरीज की पुष्टि हुई थी। अभी तक दिमागी बुखार से पीड़ित मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए गोरखपुर लैब में भेजा जाता था।
वहां से जब तक रिपोर्ट आती है तब तक देर हो जाती थी। जापनी इंसेफलाटिस की गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष जिले में ही जेई की किट मंगा ली गई है। 16 अगस्त से दो सितंबर तक पांच मरीजों का ब्लड सैंपल कलेक्ट किया गया, लेकिन अभी तक जांच किसी भी मरीज का नहीं हुआ है।
पैथोलॉजिस्ट डा. आरडी सिंह का कहना है कि एक किट के पैकेट से छह लोगों की जांच होती है। कम से कम छह मरीजों का ब्लड सैंपल आ जाए तो किट खोला जाए। अभी तक लैब में पांच ही मरीजों का ब्लड सैंपल आया है।
ऐसे में एक और मरीज के ब्लड सैंपल आने का इंतजार किया जा रहा है। अब मरीजों की समय से जांच नहीं हो पाने से उनका इलाज अंधेरे में तीर मारने जैसा ही हैं।