फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   BJP blow, won three seats

भाजपा को झटका, तीन सीटें ही जीतीं

Mon, 02 Nov 2015 11:41 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 02 Nov 2015 11:41 PM IST
विज्ञापन
जिला पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। उसे 43 में सिर्फ 3 पर ही जीत मिली है। जबकि बसपा ने दमदार प्रदर्शन किया मगर अध्यक्ष बनाने के बहुमत से काफी दूर हैं।
विज्ञापन


जिन तीन दलों ने खुलकर प्रत्याशी उतारे, उनमें भाजपा लक्ष्य से चौदह गुना पिछड़ गई तो कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ हो गया। पहले ही समाजवादी पार्टी ने आम सहमति न बनने से प्रत्याशी नहीं उतारे, सबको लड़ने की खुली छूट दी।
विज्ञापन


अब इसी नाते फिर अध्यक्ष पद पर कब्जा के लिए जीते कार्यकर्ताओं समेत निर्दलियों पर डोरे डाल रही है। इसके लिए साम-दाम-दंड-भेद का पुराना फार्मूला आजमाने की बिसात बिछनी शुरू हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि रणनीति कितनी कारगर होगी, यह इस बार सामान्य सीट घोषित फैजाबाद में बसपा की एकजुटता और प्रोजेक्ट होने वाले प्रत्याशी के दम-खम पर निर्भर होगा।

पंचायत चुनाव आगामी विस का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इसी को ध्यान में रख सभी दलों ने इस बार प्रत्याशी उतारे। अब परिणाम आने के बाद बसपा ही पास हुई दिखती है, बाकी की रणनीति निराश करने वाली साबित हुई।

सपा के लिए यह चुनाव 2017 के लिए वोट बैंक संभालने की चुनौती सरीखा था। हालांकि सीएम व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की चिट्ठी ने पहले ही साफ कर दिया था।

कि कार्यकर्ताओं में आमसहमति होने पर ही कोई एक मैदान में उतरेगा, वरना सबको लड़ने की छूट होगी। इसे बगावत माना जाएगा न कार्रवाई होगी।

इस आदेश का सकारात्मक असर भले कार्यकर्ताओं में माना जाए, मगर जनता ने तो इनकी आपसी रार का कदम-कदम पर नंगा नाच देखा।

कैबिनेट मंत्री अवधेश प्रसाद हों या महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष व एमएलसी लीलावती कुशवाहा, इनके सियासी वारिसों की शुरुआती पारी ही लुढ़क गई।

ऐसे कई दिग्गज व सियासी घरानों के लोग हारे। फिलहाल 12 कार्यकर्ता जीतेे हैं। लेकिन जिला इकाई की सक्रियता वाली सीटों, जहां मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष ने खूब ताल ठोंकी इसकी आधी से भी कम है।

जीत की गणित में मंत्री की पत्नी सोना देवी को हराने वाली रश्मि जायसवाल की सीट भी शामिल है। जिनके व मंत्री परिवार के बीच आपराधिक घटनाएं हुई व केस तक दर्ज हुए।

अब जिला महासचिव गंगा सिंह  कहते हैं कि सपा ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की है।  बसपा ने इस बार गजब का दम दिखाया है। लेकिन एक बार मालती को अध्यक्ष बनवा चुके मित्रसेन जैसा अब बसपा में कोई है?

पार्टी के घोषित प्रत्याशियों में 12 ने जीत दर्ज की है। यहां जितेंद्र सिंह बबलू की चली, कई कैडर के लोग पार्टी से निकाले गए, मगर इनमें चार की जीत ने करारा झटका दिया है।

मगर कैडर के सवाल पर सब एक होते दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद इस चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन शर्मनाक रहा है। 43 सीटों में मात्र तीन सीटें मिली हैं।

दो बागी हार से इतने तिलमिला कि कहीं और जुड़ते नहीं दिख रहे। सांसद लल्लू सिंह, विधायक रामचंद्र व जिलाध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी की गुटबाजी से बगावत करने वालों ने दर्जनभर सीटों पर न जीते न जीतने दिए।


खुद रामचंद्र के भाई की पत्नी हार गईं। कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया हालांकि इसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, जब प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद निर्मल खत्री ने प्रचार से किनारा ही कस लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed