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सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मंदिर भी खुलें
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अयोध्या-हनुमानगढ़ी पर पसरा सन्नाटा
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। लॉकडाउन-03 के बीच जिले में दी गई छूट के चलते जहां बाजार अब धीरे-धीरे गुलजार हो रहे हैं, वहीं रामनगरी के बंद पड़े मठ-मंदिरों में भी दर्शन-पूजन की व्यवस्था सुचारु करने की मांग उठने लगी है। संत-धर्माचार्यों ने मांग उठाई है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रामनगरी के मंदिरों को भी आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाना चाहिए।
संतों एवं पुजारियों का कहना है कि जब जिले में शराब की दुकान खुलने से लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं हो रहा है तो मंदिर के पट क्यों न खोला जाए। संतों का कहना है कि मंदिर खुलने के लिए प्रशासन एक मानक निर्धारित कर दे, जिसका पालन मठ-मंदिरों के स्वामियों द्वारा किया जाए। सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए स्थानीय लोगों, साधु-संतों को अपने आराध्य का दर्शन करने की व्यवस्था अब शुरू की जानी चाहिए। हालांकि, संतों का यह भी कहना है कि अभी बाहरी श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहना चाहिए, मंदिर में भीड़ न लगाकर सामाजिक दूरी बनाते हुए एक-एक कर भक्तों को दर्शन-पूजन की व्यवस्था की जानी चाहिए। ऐसा होने से मंदिरों में राग-भोग, आरती खर्च के साथ फूल-माला, प्रसाद के दुकानदारों की भी आर्थिक तंगी दूर होगी।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं क ियह समझ से परे है कि जिले में शराब की दुकानें खोल दी गईं, जहां पहले ही दिन लंबी लाइन लग गयी, लेकिन मंदिरों को भक्तों के दर्शन के लिए अभी तक नहीं खोला गया है। प्रशासन को चाहिए रामनगरी के बंद पड़े मंदिरों को खोल देना चाहिए। इसके लिए प्रशासन मानक तय करे, एक बार में कुछ ही लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दर्शन कराया जाए। कहा कि बाहरी श्रद्धालुओं पर तो अभी रोक आवश्यक है लेकिन स्थानीय भक्तों को दर्शन-पूजन करने का अवसर देना चाहिए।
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हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास भी मंदिर खोलने की बात करते हैं। वे कहते हैं कि यदि दर्शन-पूजन के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्था निर्धारित कर दी जाए तो भक्त अपने आराध्य का दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं को एक-एक कर दर्शन कराया जाए। स्थानीय साधु-संत अपने आराध्य का दर्शन पूजन नहीं कर पा रहे हैं। दर्शन-पूजन के लिए एक समय भी निर्धारित कर दिया जाए ताकि दर्शन के दौरान बहुत देर तक लोग मंदिर में न रुक पाएं। कहा कि हम प्रशासन के साथ हैं, लेकिन मंदिरों को खोलने के लिए रणनीति बनानी चाहिए।
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि सामाजिक दूरी बनाकर मंदिरों में दर्शन-पूजन की व्यवस्था अब शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भक्त अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करें, जिनके पास डाउनलोड हों उन्हीं को दर्शन करने दिया जाए। मंदिर में पुलिस बल लगाकार सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए लोगों को दर्शन पूजन कराया जाना चाहिए। ऐसा होने पर प्रसाद की दुकानों का कारोबार भी शुरू हो सकेगा। हालांकि, दर्शन के नाम पर भीड़ नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पुलिस को सहयोग करना होगा।
लॉकडाउन के शुरूआती चरण से ही रामनगरी के सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन को रोक दिया गया था। हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नाका हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ, छोटी देवकाली मंदिर, क्षीरेश्वरनाथ, दशरथमहल बड़ास्थान सहित अन्य कई मंदिरों के कपाट बंद हैँ जिसके चलते श्रद्घालु दर्शन-पूजन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं हनुमानगढ़ी क्षेत्र में प्रसाद की दुकानें भी मंदिरों के बंद होने के साथ ही बंद पड़ी है। अब दर्शन-पूजन शुरू हो तो इनका कारोबार भी आगे बढ़ सके। व्यापारियों का कहना है कि मंदिरों में दर्शन के लिए भी अब प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए।
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संतों एवं पुजारियों का कहना है कि जब जिले में शराब की दुकान खुलने से लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं हो रहा है तो मंदिर के पट क्यों न खोला जाए। संतों का कहना है कि मंदिर खुलने के लिए प्रशासन एक मानक निर्धारित कर दे, जिसका पालन मठ-मंदिरों के स्वामियों द्वारा किया जाए। सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए स्थानीय लोगों, साधु-संतों को अपने आराध्य का दर्शन करने की व्यवस्था अब शुरू की जानी चाहिए। हालांकि, संतों का यह भी कहना है कि अभी बाहरी श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहना चाहिए, मंदिर में भीड़ न लगाकर सामाजिक दूरी बनाते हुए एक-एक कर भक्तों को दर्शन-पूजन की व्यवस्था की जानी चाहिए। ऐसा होने से मंदिरों में राग-भोग, आरती खर्च के साथ फूल-माला, प्रसाद के दुकानदारों की भी आर्थिक तंगी दूर होगी।
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रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं क ियह समझ से परे है कि जिले में शराब की दुकानें खोल दी गईं, जहां पहले ही दिन लंबी लाइन लग गयी, लेकिन मंदिरों को भक्तों के दर्शन के लिए अभी तक नहीं खोला गया है। प्रशासन को चाहिए रामनगरी के बंद पड़े मंदिरों को खोल देना चाहिए। इसके लिए प्रशासन मानक तय करे, एक बार में कुछ ही लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दर्शन कराया जाए। कहा कि बाहरी श्रद्धालुओं पर तो अभी रोक आवश्यक है लेकिन स्थानीय भक्तों को दर्शन-पूजन करने का अवसर देना चाहिए।
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हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास भी मंदिर खोलने की बात करते हैं। वे कहते हैं कि यदि दर्शन-पूजन के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्था निर्धारित कर दी जाए तो भक्त अपने आराध्य का दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं को एक-एक कर दर्शन कराया जाए। स्थानीय साधु-संत अपने आराध्य का दर्शन पूजन नहीं कर पा रहे हैं। दर्शन-पूजन के लिए एक समय भी निर्धारित कर दिया जाए ताकि दर्शन के दौरान बहुत देर तक लोग मंदिर में न रुक पाएं। कहा कि हम प्रशासन के साथ हैं, लेकिन मंदिरों को खोलने के लिए रणनीति बनानी चाहिए।
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास कहते हैं कि सामाजिक दूरी बनाकर मंदिरों में दर्शन-पूजन की व्यवस्था अब शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भक्त अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करें, जिनके पास डाउनलोड हों उन्हीं को दर्शन करने दिया जाए। मंदिर में पुलिस बल लगाकार सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए लोगों को दर्शन पूजन कराया जाना चाहिए। ऐसा होने पर प्रसाद की दुकानों का कारोबार भी शुरू हो सकेगा। हालांकि, दर्शन के नाम पर भीड़ नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पुलिस को सहयोग करना होगा।
लॉकडाउन के शुरूआती चरण से ही रामनगरी के सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन को रोक दिया गया था। हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नाका हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ, छोटी देवकाली मंदिर, क्षीरेश्वरनाथ, दशरथमहल बड़ास्थान सहित अन्य कई मंदिरों के कपाट बंद हैँ जिसके चलते श्रद्घालु दर्शन-पूजन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं हनुमानगढ़ी क्षेत्र में प्रसाद की दुकानें भी मंदिरों के बंद होने के साथ ही बंद पड़ी है। अब दर्शन-पूजन शुरू हो तो इनका कारोबार भी आगे बढ़ सके। व्यापारियों का कहना है कि मंदिरों में दर्शन के लिए भी अब प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए।