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अयोध्या की बेटी ने रूस में जीता गोल्ड
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अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या के दंत धावन कुंड इलाके में रहने वाली स्ट्रांग वूमेन सीमा पांडे ने रूस में हुई ओपन पावर लिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। उसने यह सफलता 75 किलोग्राम वर्ग में 4 कुंतल 90 किलोग्राम वजन उठाकर पाई। बुधवार की रात अयोध्या वापस लौटने पर सीमा का जबरदस्त स्वागत किया गया, उसके घर पर लोगों ने पहुंचकर बधाई भी दी।
सीमा ने बताया कि रूस के मास्को शहर में यह प्रतियोगिता 26 व 27 अक्तूबर को आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में पुरुष व महिला मिलाकर 24 देशों के करीब 800 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था। बताया कि उसने 75 किलोग्राम वर्ग में 4 कुंतल 90 किलोग्राम वजन उठाकर कजाकिस्तान की लड़की को पछाड़कर प्रथम स्थान पाया। सीमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत व लगन के साथ-साथ अपने परिवार को दिया। उनका कहना है भारी आर्थिक तंगी के बावजूद उनके परिवार वालों ने इस खेल के प्रति उनका हौसला हमेशा बढ़ाया है।
बताया कि अगले साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले पावर लिफ्टिंग ओलंपिक चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए जाएगी। ध्यान रहे कि रूस में हो रही इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सीमा के रास्ते में आर्थिक तंगी बाघा बन रही थी, इसके लिए उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों व प्रशासन से गुहार लगाई थी। इस पर उसे कुछ लोगों द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी।
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सीमा का कहना है कि लोगों ने मदद की लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी, अंत में घर वालों ने कर्ज लेकर उसे रूस भेजने में मदद की। इससे पहले भी सीमा छत्तीसगढ़ में हुए नेशनल पावर लिफ्टिंग में 1 गोल्ड 3 सिल्वर, हरिद्वार में हुई सीनियर प्रतियोगिता में गोल्ड, नागपुर में हुए जूनियर नेशनल में गोल्ड पा चुकी है। रूस में होने वाली इस प्रतियोगिता मैं उसका चयन उत्तराखंड में हुए ट्रायल में हुआ था।
बुधवार शाम अयोध्या पहुंचने पर स्थानीय लोगों द्वारा सीमा का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उसे टेढ़ी बाजार से बैंड बाजा के साथ जुलूस के शक्ल में घर तक लाया गया। घर पर उनकी मां ने उनकी आरती उतारी आशीर्वाद दिया। सीमा के पिता गाइड भवन नाथ पांडे बताते हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों ने कुछ मदद जरूर की लेकिन सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया।
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सीमा ने बताया कि रूस के मास्को शहर में यह प्रतियोगिता 26 व 27 अक्तूबर को आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में पुरुष व महिला मिलाकर 24 देशों के करीब 800 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था। बताया कि उसने 75 किलोग्राम वर्ग में 4 कुंतल 90 किलोग्राम वजन उठाकर कजाकिस्तान की लड़की को पछाड़कर प्रथम स्थान पाया। सीमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत व लगन के साथ-साथ अपने परिवार को दिया। उनका कहना है भारी आर्थिक तंगी के बावजूद उनके परिवार वालों ने इस खेल के प्रति उनका हौसला हमेशा बढ़ाया है।
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बताया कि अगले साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले पावर लिफ्टिंग ओलंपिक चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए जाएगी। ध्यान रहे कि रूस में हो रही इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सीमा के रास्ते में आर्थिक तंगी बाघा बन रही थी, इसके लिए उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों व प्रशासन से गुहार लगाई थी। इस पर उसे कुछ लोगों द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी।
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सीमा का कहना है कि लोगों ने मदद की लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी, अंत में घर वालों ने कर्ज लेकर उसे रूस भेजने में मदद की। इससे पहले भी सीमा छत्तीसगढ़ में हुए नेशनल पावर लिफ्टिंग में 1 गोल्ड 3 सिल्वर, हरिद्वार में हुई सीनियर प्रतियोगिता में गोल्ड, नागपुर में हुए जूनियर नेशनल में गोल्ड पा चुकी है। रूस में होने वाली इस प्रतियोगिता मैं उसका चयन उत्तराखंड में हुए ट्रायल में हुआ था।
बुधवार शाम अयोध्या पहुंचने पर स्थानीय लोगों द्वारा सीमा का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उसे टेढ़ी बाजार से बैंड बाजा के साथ जुलूस के शक्ल में घर तक लाया गया। घर पर उनकी मां ने उनकी आरती उतारी आशीर्वाद दिया। सीमा के पिता गाइड भवन नाथ पांडे बताते हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों ने कुछ मदद जरूर की लेकिन सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया।