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किसानों को सिखाए गए आय दोगुनी करने के गुर
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अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज व कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि मेले का समापन हो गया है। इसमें किसानों की आय दोगुनी करने के गुर सिखाए गए। मेले के अंतिम दिन मंगलवार को कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। किसान गोष्ठी में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार प्रोफेसर एपी राव ने किसानों को मत्स्य पालन और उससे होने वाले लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर मशरूम वैज्ञानिक डॉक्टर सुबोध पांडे ने किसानों को मशरूम उत्पादन की तकनीक, उनके प्रकार तथा उनकी औषधि गुण के बारे में चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष एलसी वर्मा ने पशुपालन की जानकारी दी। इंजीनियर एसएन सिंह चौहान ने अवशेष प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर के अध्यक्ष एसके वर्मा ने केले की खेती की जानकारी दी। पशु रोग वैज्ञानिक डा. देश दीपक सिंह ने पशुओं में होने वाली प्रमुख घातक संक्रामक बीमारियों के निदान एवं बचाव के बारे में जानकारी। कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा के अध्यक्ष शशिकांत यादव ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया। सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. आभा सिंह ने देसी ओवन, जो बिना बिजली के चलने वाला तथा कम लागत में तैयार होने वाला यंत्र है, जिसमें हर चीज को आसानी से भूना जा सकता है, के बारे में जानकारी दी।
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इस अवसर पर विश्वविद्यालय की निदेशक प्रशासन एवं पर्यवेक्षण और अधिष्ठाता पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय आरके जोशी, पूर्व अधिष्ठाता पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय डॉ. हरनाम सिंह, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नमिता जोशी, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उपस्थित होकर किसानों की समस्याओं का निराकरण किया।
प्रश्नोत्तरी सत्र में बताए गए बागवानी के गुर
प्रश्नोत्तरी सत्र में सुल्तानपुर के किसान ने पपीते की खेती के बारे में, बाराबंकी के किसान ने केले की खेती तथा धान की खेती के बारे में, वाराणसी के किसान ने बेल की बागवानी ऌके बारे में, लखनऊ के किसान ने परवल की खेती के बारे में तथा कुशीनगर के किसान ने आंवला की खेती के बारे में जानकारी चाही। जिसका विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह ने स्वयं रुचि लेते हुए सभी प्रश्नों का उत्तर देकर किसानों को संतुष्ट करने का पूर्ण प्रयास किया। साथ ही साथ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को निर्देशित किया की वह पूर्वांचल के किसानों को नवीन तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराएं । जिससे पूर्वांचल के किसानों का सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हो सके।
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इस अवसर पर मशरूम वैज्ञानिक डॉक्टर सुबोध पांडे ने किसानों को मशरूम उत्पादन की तकनीक, उनके प्रकार तथा उनकी औषधि गुण के बारे में चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष एलसी वर्मा ने पशुपालन की जानकारी दी। इंजीनियर एसएन सिंह चौहान ने अवशेष प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी।
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कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर के अध्यक्ष एसके वर्मा ने केले की खेती की जानकारी दी। पशु रोग वैज्ञानिक डा. देश दीपक सिंह ने पशुओं में होने वाली प्रमुख घातक संक्रामक बीमारियों के निदान एवं बचाव के बारे में जानकारी। कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा के अध्यक्ष शशिकांत यादव ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया। सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. आभा सिंह ने देसी ओवन, जो बिना बिजली के चलने वाला तथा कम लागत में तैयार होने वाला यंत्र है, जिसमें हर चीज को आसानी से भूना जा सकता है, के बारे में जानकारी दी।
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इस अवसर पर विश्वविद्यालय की निदेशक प्रशासन एवं पर्यवेक्षण और अधिष्ठाता पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय आरके जोशी, पूर्व अधिष्ठाता पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय डॉ. हरनाम सिंह, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नमिता जोशी, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उपस्थित होकर किसानों की समस्याओं का निराकरण किया।
प्रश्नोत्तरी सत्र में बताए गए बागवानी के गुर
प्रश्नोत्तरी सत्र में सुल्तानपुर के किसान ने पपीते की खेती के बारे में, बाराबंकी के किसान ने केले की खेती तथा धान की खेती के बारे में, वाराणसी के किसान ने बेल की बागवानी ऌके बारे में, लखनऊ के किसान ने परवल की खेती के बारे में तथा कुशीनगर के किसान ने आंवला की खेती के बारे में जानकारी चाही। जिसका विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह ने स्वयं रुचि लेते हुए सभी प्रश्नों का उत्तर देकर किसानों को संतुष्ट करने का पूर्ण प्रयास किया। साथ ही साथ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को निर्देशित किया की वह पूर्वांचल के किसानों को नवीन तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराएं । जिससे पूर्वांचल के किसानों का सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हो सके।