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बरनत छवि जहं तहं सब लोगू, अवसि देखिअहि देखन जोगू..
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अयोध्या। रामनगरी के कुछ मंदिरों में रविवार की देर रात्रि कुंवर कलेवा का महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। दशरथ महल बड़ास्थान, कनकभवन व जानकी महल ट्रस्ट में कलेवा महोत्सव की अनुपम छटा देखते ही बन रही थी। संत, साधक अपने ही उपास्य को मधुर-मधुर गालियों की बौछार कर रहे थे जिसकी वे नित पूजा-अर्चना, वंदना करते हैं। दशरथ महल में कुंवर कलेवा महोत्सव में आस्था चरम पर दिखी तो कनकभवन व जानकी महल ट्रस्ट में भी आचार्य प्रणीत पदों के गायन की धूम रही।
दशरथमहल बड़ास्थान में दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिया सुंदर मंदिर माही..., बरनत छवि जहं तहं सब लोगू, अवसि देखिअहिं देखन जोगू...बता दा बबुआ, लोगवा देत काहे गारी... आदि गीतों से माहौल भक्तिमय नजर आया। मंदिर के पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य भी अन्य संतों के साथ महोत्सव में पगे नजर आए। युगल सरकार सहित ल को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का रसास्वादन कराकर वे आहलादित, आनंदित नजर आ रहे थे। वहीं, भोजन के लिए भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों को मनाने के लिए प्रस्तुत आचार्य प्रणीत पदों ने उत्सव का उल्लास दोगुना कर दिया। बिंदुगाद्याचार्य के शिष्य संत रामभूषण दास कृपालु ने कलेवा की रस्म निभाई। कुंवर कलेवा महोत्सव के बाद जानकी जी डोली पर विदा होकर मंदिर के गर्भगृह में पहुंचती हैं जहां पुन: उनका पूजन-अर्चन कर कलेवा प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। इस दौरान मौजूद संतों एवं भक्तों द्वारा भी छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग अपने आराध्य को लगाया जाता है।
इसी तरह कनकभवन में भी कनक बिहारी सरकार को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। मंदिर की परंपरा से जुड़े शास्त्रीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुति गायन-वादन ने उत्सव की भव्यता बढ़ा दी। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद भक्त कनक बिहारी सरकार का दर्शन कर निहाल हो उठे। जानकी महल ट्रस्ट में कलेवा महोत्सव की भव्यता चरम पर रही। यहां भगवान राम सहित चारों भाइयों का पूजन अर्चन के बाद उन्हें 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया, रामकुमार शर्मा, नरेश पोद्घार सहित अन्य भक्तों ने कलेवा की रस्म निभाई। इस अवसर पर मानसकार गोस्वामी तुलसीदास की भावना के अनुरूप ही मौजूद शास्त्रीय गायक भी पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बाराती..का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनों का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे।
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दशरथमहल बड़ास्थान में दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिया सुंदर मंदिर माही..., बरनत छवि जहं तहं सब लोगू, अवसि देखिअहिं देखन जोगू...बता दा बबुआ, लोगवा देत काहे गारी... आदि गीतों से माहौल भक्तिमय नजर आया। मंदिर के पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य भी अन्य संतों के साथ महोत्सव में पगे नजर आए। युगल सरकार सहित ल को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का रसास्वादन कराकर वे आहलादित, आनंदित नजर आ रहे थे। वहीं, भोजन के लिए भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों को मनाने के लिए प्रस्तुत आचार्य प्रणीत पदों ने उत्सव का उल्लास दोगुना कर दिया। बिंदुगाद्याचार्य के शिष्य संत रामभूषण दास कृपालु ने कलेवा की रस्म निभाई। कुंवर कलेवा महोत्सव के बाद जानकी जी डोली पर विदा होकर मंदिर के गर्भगृह में पहुंचती हैं जहां पुन: उनका पूजन-अर्चन कर कलेवा प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। इस दौरान मौजूद संतों एवं भक्तों द्वारा भी छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग अपने आराध्य को लगाया जाता है।
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इसी तरह कनकभवन में भी कनक बिहारी सरकार को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। मंदिर की परंपरा से जुड़े शास्त्रीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुति गायन-वादन ने उत्सव की भव्यता बढ़ा दी। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद भक्त कनक बिहारी सरकार का दर्शन कर निहाल हो उठे। जानकी महल ट्रस्ट में कलेवा महोत्सव की भव्यता चरम पर रही। यहां भगवान राम सहित चारों भाइयों का पूजन अर्चन के बाद उन्हें 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया, रामकुमार शर्मा, नरेश पोद्घार सहित अन्य भक्तों ने कलेवा की रस्म निभाई। इस अवसर पर मानसकार गोस्वामी तुलसीदास की भावना के अनुरूप ही मौजूद शास्त्रीय गायक भी पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बाराती..का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनों का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे।
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