{"_id":"64bd730b8721612aed0c29b4","slug":"awadh-university-seminar-faizabad-news-c-97-1-ayo1002-190-2023-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामाजिक समरसता भारतीय संस्कृति की विशेषता : प्रो़ संजीत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामाजिक समरसता भारतीय संस्कृति की विशेषता : प्रो़ संजीत
Mon, 24 Jul 2023 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 24 Jul 2023 12:05 AM IST
विज्ञापन
अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग व भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ रविवार को हुआ। भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं की भूमिका विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो़ संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि देश को स्वतंत्रता दिलाने में मातृ शक्ति का विशेष योगदान रहा है। सामाजिक समरसता का भाव हमारी भारतीय संस्कृति की विशेषता है।
उन्होंने कहा कि दलित समाज की स्त्रियों, आदिवासी और वनवासी महिलाओं का भी हमारे देश में बहुत योगदान रहा है। असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम कभी सफल न होता अगर हमारी माताएं-बहनें साथ नहीं होतीं। कहा कि हमारा जन्म उस देश में हुआ है जहां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की उपासना होती है। सुचेता कृपलानी, कस्तूरबा गांधी, विजयलक्ष्मी पंडित और बहुत सी महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महती भूमिका निभाई है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं अवध विवि की कुलपति प्रो़ प्रतिभा गोयल ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वह मां ही है जो अपने बालक को क्रांतिकारी एवं योद्धा बनाती है। हमारा देश बलिदानों की भूमि है जिसमें महिलाओं का भी इतिहास संघर्षमय रहा है। 1857 की क्रांति में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे ने कहा कि कस्तूरबा गांधी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, सावित्रीबाई फूले जैसी तमाम महिलाओं ने सकारात्मक सोच से देश को नई दिशा दी। डॉ. सुरेन्द्र मिश्र ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डाॅ़ प्रत्याशा मिश्रा व डाॅ़ अंकित मिश्र ने किया। संगोष्ठी में प्रो़ आशुतोष सिन्हा, प्रो़ एसएस मिश्र, प्रो़ नीलम पाठक, प्रो़ अशोक कुमार राय, प्रो़ गंगाराम मिश्र, प्रो़ अनूप कुमार, प्रो़ शैलेन्द्र वर्मा, डाॅ़ अनिल कुमार, डाॅ़ विजयेन्दु चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि दलित समाज की स्त्रियों, आदिवासी और वनवासी महिलाओं का भी हमारे देश में बहुत योगदान रहा है। असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम कभी सफल न होता अगर हमारी माताएं-बहनें साथ नहीं होतीं। कहा कि हमारा जन्म उस देश में हुआ है जहां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की उपासना होती है। सुचेता कृपलानी, कस्तूरबा गांधी, विजयलक्ष्मी पंडित और बहुत सी महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महती भूमिका निभाई है।
विज्ञापन
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं अवध विवि की कुलपति प्रो़ प्रतिभा गोयल ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वह मां ही है जो अपने बालक को क्रांतिकारी एवं योद्धा बनाती है। हमारा देश बलिदानों की भूमि है जिसमें महिलाओं का भी इतिहास संघर्षमय रहा है। 1857 की क्रांति में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे ने कहा कि कस्तूरबा गांधी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, सावित्रीबाई फूले जैसी तमाम महिलाओं ने सकारात्मक सोच से देश को नई दिशा दी। डॉ. सुरेन्द्र मिश्र ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डाॅ़ प्रत्याशा मिश्रा व डाॅ़ अंकित मिश्र ने किया। संगोष्ठी में प्रो़ आशुतोष सिन्हा, प्रो़ एसएस मिश्र, प्रो़ नीलम पाठक, प्रो़ अशोक कुमार राय, प्रो़ गंगाराम मिश्र, प्रो़ अनूप कुमार, प्रो़ शैलेन्द्र वर्मा, डाॅ़ अनिल कुमार, डाॅ़ विजयेन्दु चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।