फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   सांसद ऐसा हो जो बुजुर्गों की पीड़ा समझे

सांसद ऐसा हो जो बुजुर्गों की पीड़ा समझे

Fri, 18 Apr 2014 05:31 AM IST
Faizabad
Faizabad Updated Fri, 18 Apr 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
फैजाबाद। ‘अमर उजाला’ के सरोकार कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों ने आज की राजनीति को दिशाहीन करार दिया। कहा कि पहले जैसी न ईमानदारी है और न विकास व सबको साथ लेकर चलने का जोश। जाति व धर्म के नाम पर वोट की राजनीति में नेताओं को सीनियर सिटीजन का दर्द भी महसूस नहीं होता। मांग उठाई कि सीनियर सिटीजन को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए ‘वृद्धाश्रम’ स्थापित किया जाए। दो पीढ़ियों के बीच चौड़ी होती खाई से पैदा हो रहीं समस्याओं को परिवार, समाज और देश के लिए खतरनाक बताया गया। दिल्ली की तर्ज पर सीनियर सिटीजन के लिए विभागों में अलग से काउंटर खोलने की मांग की गई, जिससे बुजुर्गों को कतार में घंटों खड़े होने से मुक्ति मिल सके। गुलाबाबाड़ी परिसर को सुविधाओं से लैस करने की मांग भी उठी।
विज्ञापन

गुरुवार को गुलाबबाड़ी में आयोजित ‘अमर उजाला’ के सरोकार कार्यक्रम में युवा शक्ति को महत्व देने के साथ ही बुजुर्गों को सम्मान देने की बात भी उठी। घर के साथ ही समाज में भी उन्हें पहले जैसा महत्व मिले, यह मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। बुजुर्गों ने कहा कि दो दशक में देश ने एक ओर तो विकास किया, लेकिन दुख इस बात का है कि आर्थिक विकास की आपाधापी में संवेदनाओं का विकास थम गया, जिसके कारण वृद्ध अपने घर-आंगन में ही नहीं, समाज में भी खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे हैं। एक बुजुर्ग ने शहर में वृद्धाश्रम खोलने की मांग करते हुए कहा कि जो बुजुर्ग परिवार के लिए छतरी हुआ करते थे, आज उन्हीं को वृद्धाश्रम की मांग करनी पड़ रही है। इसके पीछे प्रमुख कारण संवेदनाओं की सरिता का सूखना है। एक सीनियर सिटीजन ने दिल्ली की तर्ज पर सरकारी कार्यालयों में अलग से काउंटर खोलने की मांग की, जिससे कि उन्हें घंटों लाइन में खड़ा न होना पड़े। कमोबेश सबकी एक समस्या सामने आई कि चिकित्सा व्यवस्था की बदतर हालत उन्हें सर्वाधिक परेशान करती है। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक निजी प्रैक्टिस को ज्यादा महत्व देते हैं, जिससे वे अस्पताल में नहीं मिलते। मिल भी गए तो ठीक से देखते नहीं। उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल को एक सीनियर सिटीजन ने आक्रोशित होकर ‘लाजिस्टविहीन’ का दर्जा दे डाला। कहा कि यहां पर न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न ही न्यूरोलॉजिस्ट। ऐसे में किसी को इनकी जरूरत पड़े तो सीधे लखनऊ जाना पड़ता है। यदि सरकारी चिकित्सालय की व्यवस्था ठीक हो जाए, तो बुजुर्गों को सबसे ज्यादा राहत मिले। स्थानीय स्तर पर गुलाबबाड़ी की बदतर हालत और शहर में जाम की समस्या भी जोर-शोर से उठी। बुजुर्गों ने कहा कि गुलाबबाड़ी में हम सब लोग सुबह-शाम एकत्र होकर सुख-दुख बांट लेते हैं, लेकिन यहां पर सुविधाओं का अभाव है। इस दौरान शहर के बेतरतीब विकास और जाम की समस्या भी संवाद कार्यक्रम में उठी। साथ ही जाम से निजात दिलाने की मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

देश को विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने का आह्वान करते हुए एक बुजुर्ग ने कहा कि हमारा जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो अपने संसदीय क्षेत्र में इस तरह का माहौल बना दे कि राम और रहीम दोनों पारस्परिक प्रेम व भाईचारे के साथ रह सकेें। ईमानदार व संवेदनशील जनप्रतिनिधि को वोट देने से समाज और देश का भला होगा। ऐसे प्रत्याशी को जिताने की बात कही गई, जिसकी सोच संकीर्ण न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed