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यहां फैल रही सांप्रदायिक सौहार्द की खुशबू
Faizabad
Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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फैजाबाद। अयोध्या के निर्गुण फक्कड़ संत पलटूदास ने कहा था ‘डाल-डाल अल्लाह लिखा है, पात-पात पर राम..’। सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी ही खुशबू चौक और नाका में फैल रही है। अवसर है नवरात्र पर मां दुर्गा के पूजा पंडालों की स्थापना का। मो. अजीम और मो. यूनुस के हाथों ने मजहबी सरहदों को तोड़ दिया है। चौक और नाका चुंगी में बन रहे पूजा पंडालों को भव्य व दिव्य बनाने में ये दोनों ही कलाकार मानों अपना पूरा कौशल उड़ेल दे रहे हैं। झारखंड प्रांत के गिरिडीह निवासी मो. अजीम पिछले पांच वर्षों से चौक में मां का मंदिर सजा रहे हैं। यहां का पंडाल दूसरे स्थान पर रहता है। 80 फीट ऊंचे और 40 फीट चौड़े पंडाल को तैयार करने में बीती 26 सितंबर से अजीम के साथ छह साथी भी लगे हैं। यह सभी मुस्लिम हैं। कपड़े के सहारे सजाए जा रहे पंडाल में करीब छह सौ बांस और सौ बल्लियों का प्रयोग होगा। मां अंबिका दुर्गा पूजा महोत्सव समिति चौक के संयोजक शोभित कपूर ने बताया कि पंडाल कोलकाता के काली दुर्गा पूजा मंदिर की अनुकृति है। कहा, इसे तैयार करने वाले सभी साथी मुसलमान तो हैं ही, दरबार सजाने के लिए कपड़ों की खरीद भी गोंडा से मुसलमान की दुकान से की जा रही है।
साकेत कल्याण परिषद नाका चुंगी का 105 फीट ऊंचा देवी पंडाल तैयार कर रहे सभी कारीगर भी मुसलमान हैं। झारखंड राज्य के धनबाद निवासी मो. यूनुस कहते हैं, यह शहर का सबसे ऊंचा पूजा पंडाल है। इसमें करीब दो हजार बांस-बल्लियों का प्रयोग होगा। पिछले 25 दिनों से उनके साथ दस लोग पंडाल बनाने में लगे हुए हैं। इसकी लागत पांच लाख के करीब आ रही है। परिषद के विजय पांडेय ने बताया कि पंडाल श्रीलंका के जुगुल मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।
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साकेत कल्याण परिषद नाका चुंगी का 105 फीट ऊंचा देवी पंडाल तैयार कर रहे सभी कारीगर भी मुसलमान हैं। झारखंड राज्य के धनबाद निवासी मो. यूनुस कहते हैं, यह शहर का सबसे ऊंचा पूजा पंडाल है। इसमें करीब दो हजार बांस-बल्लियों का प्रयोग होगा। पिछले 25 दिनों से उनके साथ दस लोग पंडाल बनाने में लगे हुए हैं। इसकी लागत पांच लाख के करीब आ रही है। परिषद के विजय पांडेय ने बताया कि पंडाल श्रीलंका के जुगुल मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।
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