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प्राचीन सूर्यकुंड पहुंची 84 कोसी यात्रा
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 28 Apr 2016 10:47 PM IST
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84 कोसी परिक्रमा
- फोटो : अमर उजाला
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चिलचिलाती धूप में गेहूं के कटे खेत व पथरीले रास्तों से होते हुए गुरुवार को 84 कोसी परिक्रमा रामपुरभगन के पौराणिक सूर्यकुंड स्थल पहुंच गई। आस्था और विश्वास के आगे पथरीले रास्ते और तपती गर्मी परिक्रमार्थियों को नहीं डिगा सकी। वहीं क्षेत्र के लोगों ने संतों की खूब सेवा की।
अयोध्या धाम की 84 कोसी परिक्रमा यात्रा व विहिप के हनुुमान मंडल की 84 कोसी परिक्रमा के परिक्रमार्थी गुरुवार को रामपुरभगन पहुुंच गए। परिक्रमा संचालक बाबा गया दास ने बताया कि परिक्रमा में लगभग चार सौ परिक्रमार्थी शामिल हैं। जिसमें 50 महिला संत भी हैं।
उन्होंने 14 कोसी परिक्रमा की तर्ज पर परिक्रमा मार्ग में प्रकाश, पानी की व्यवस्था व अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने की मांग की। शुक्रवार को परिक्रमार्थियों का रात्रि पड़ाव सीता कुंड दराबगंज में होगा। दूसरी तरफ विहिप के निर्देशन में चल रही परिक्रमा भजन कीर्तन करते हुए बीकापुर को प्रस्थान कर गयी। विहिप की 84 कोसी परिक्रमा का रात्रि पड़ाव बीकापुर में होेगा।
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अलग-अलग हुआ विहिप और गयादास का जत्था
रामपुरभगन। विहिप के हनुमान मंडल की 84 कोसी परिक्रमा के परिक्रमार्थियों ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ सूर्य मंदिर पर पूजन अर्चन के उपरांत बीकापुर के लिए प्रस्थान कर गयी। जिससे बाद बाबा गया दास और विहिप के परिक्रमार्थियों का जत्था यहां से अलग हो गया।
पौराणिक एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल प्राचीन सूर्य मंदिर ऊंचगांव रामपुरभगन में रात्रि विश्राम न कर सनातनी परंपरा को तोड़कर बीकापुर के लिये प्रस्थान के संबंध में परिक्रमा व्यवस्था प्रमुख सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हमारा रात्रि पड़ाव हर 15 किलोमीटर पर निर्धारित है। जिसके कारण हम पांच दिन बाद पुन: अगले पड़ाव पर रात्रि विश्राम साथ करेंगे।
साधुओं ने किया हठ योग
तारुन। बड़ी छावनी अयोध्या के महंत ओंकार दास के नेेतृत्व में 84 कोसी परिक्रमा कर रहे साधुओं ने पारागरीबशाह गांव में गुरुवार दोपहर को आग के गोले में बैठकर हठ योग किया। बालक दास व लक्ष्मण दास ने खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में 12 से 1 बजे तक उपला कंडा जलाकर घेरा बनाया और बीच में बैठकर योग में लीन हो गए।
महंथ ओंकार दास ने बताया कि बसंत पंचमी से गंगा दशहरा तक प्रतिदिन उनके साथ के साधु आग के गोले में बैठकर हठयोग करते हैं। संतों के इस योग को देखने के लिए गांव भर के लोग जुट गये।
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अयोध्या धाम की 84 कोसी परिक्रमा यात्रा व विहिप के हनुुमान मंडल की 84 कोसी परिक्रमा के परिक्रमार्थी गुरुवार को रामपुरभगन पहुुंच गए। परिक्रमा संचालक बाबा गया दास ने बताया कि परिक्रमा में लगभग चार सौ परिक्रमार्थी शामिल हैं। जिसमें 50 महिला संत भी हैं।
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उन्होंने 14 कोसी परिक्रमा की तर्ज पर परिक्रमा मार्ग में प्रकाश, पानी की व्यवस्था व अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने की मांग की। शुक्रवार को परिक्रमार्थियों का रात्रि पड़ाव सीता कुंड दराबगंज में होगा। दूसरी तरफ विहिप के निर्देशन में चल रही परिक्रमा भजन कीर्तन करते हुए बीकापुर को प्रस्थान कर गयी। विहिप की 84 कोसी परिक्रमा का रात्रि पड़ाव बीकापुर में होेगा।
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अलग-अलग हुआ विहिप और गयादास का जत्था
रामपुरभगन। विहिप के हनुमान मंडल की 84 कोसी परिक्रमा के परिक्रमार्थियों ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ सूर्य मंदिर पर पूजन अर्चन के उपरांत बीकापुर के लिए प्रस्थान कर गयी। जिससे बाद बाबा गया दास और विहिप के परिक्रमार्थियों का जत्था यहां से अलग हो गया।
पौराणिक एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल प्राचीन सूर्य मंदिर ऊंचगांव रामपुरभगन में रात्रि विश्राम न कर सनातनी परंपरा को तोड़कर बीकापुर के लिये प्रस्थान के संबंध में परिक्रमा व्यवस्था प्रमुख सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हमारा रात्रि पड़ाव हर 15 किलोमीटर पर निर्धारित है। जिसके कारण हम पांच दिन बाद पुन: अगले पड़ाव पर रात्रि विश्राम साथ करेंगे।
साधुओं ने किया हठ योग
तारुन। बड़ी छावनी अयोध्या के महंत ओंकार दास के नेेतृत्व में 84 कोसी परिक्रमा कर रहे साधुओं ने पारागरीबशाह गांव में गुरुवार दोपहर को आग के गोले में बैठकर हठ योग किया। बालक दास व लक्ष्मण दास ने खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में 12 से 1 बजे तक उपला कंडा जलाकर घेरा बनाया और बीच में बैठकर योग में लीन हो गए।
महंथ ओंकार दास ने बताया कि बसंत पंचमी से गंगा दशहरा तक प्रतिदिन उनके साथ के साधु आग के गोले में बैठकर हठयोग करते हैं। संतों के इस योग को देखने के लिए गांव भर के लोग जुट गये।