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शहरीकरण में कदम-कदम पर चुनौतियां: प्रो. दता
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:17 AM IST
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शहरीकरण में कदम-कदम पर चुनौतियां : प्रो. दत्ता
फैजाबाद। शहरीकरण विकास का एक महत्वपूर्ण मानक होता है। कदम-कदम पर चुनौतियों एवं विरोध का सामना करना पड़ता है। सांस्कृतिक एवं सामाजिक सभ्यता को संजोते हुए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। प्रारंभिक अवस्था में आम जनमानस को कई प्रकार के समझौते करने होते हैं। यह बातें राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास प्रतिष्ठान से जुड़े प्रो. पीके दत्ता ने मंगलवार को कहीं।
वे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा आयोजित शहरी विकास एवं प्रबंधन पर प्रशिक्षुओं के लिए लगी तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि अयोध्या के विकास के संदर्भ में बताया कि यह एक प्राचीन नगरी है। इसे विश्व की हैरिटेज सिटी में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। नगर विकास के लिये यह आवश्यक है कि उसकी प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करते हुए उनका आधुनिकीकरण किया जाना होता है। जापान व चाइना ने अपने कई प्राचीन नगरों को इसी तर्ज पर विकसित किया है। विश्व प्रसिद्ध अयोध्या विकास की दृष्टि में काफी पिछड़ गई है। इस नगर में स्थित हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल, देवकाली मंदिर आदि हमारी समृद्ध वास्तु कला के प्रत्यक्ष प्रमाण है। आवश्यकता इस बात की है कि इन्हें विश्व पटल पर उकेरा जाए ताकि हमारी प्राचीन धरोहर सुरक्षित रह सके।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान, तमिलनाडु के प्रो. इंद्रजीत सोढ़ी ने कहा कि ग्रामीण विकास का यह पांचवां ट्रेनिंग कार्यक्रम है। देश भर में लगभग दो सौ प्रशिक्षुकों को शहरी एवं ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें प्रतिभाग करने वाले एनसीसी एनएसएस एवं प्रमुख एनजीओं के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। कार्यशाला का प्रारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा कुलगीत प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में आए आए अतिथियों का स्वागत प्रो. आरएन राय, प्रो. अशोक शुक्ला, प्रो. एसएन शुक्ला, प्रो. आशुतोष सिन्हा ने किया।
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फैजाबाद। शहरीकरण विकास का एक महत्वपूर्ण मानक होता है। कदम-कदम पर चुनौतियों एवं विरोध का सामना करना पड़ता है। सांस्कृतिक एवं सामाजिक सभ्यता को संजोते हुए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। प्रारंभिक अवस्था में आम जनमानस को कई प्रकार के समझौते करने होते हैं। यह बातें राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास प्रतिष्ठान से जुड़े प्रो. पीके दत्ता ने मंगलवार को कहीं।
वे डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा आयोजित शहरी विकास एवं प्रबंधन पर प्रशिक्षुओं के लिए लगी तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि अयोध्या के विकास के संदर्भ में बताया कि यह एक प्राचीन नगरी है। इसे विश्व की हैरिटेज सिटी में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। नगर विकास के लिये यह आवश्यक है कि उसकी प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करते हुए उनका आधुनिकीकरण किया जाना होता है। जापान व चाइना ने अपने कई प्राचीन नगरों को इसी तर्ज पर विकसित किया है। विश्व प्रसिद्ध अयोध्या विकास की दृष्टि में काफी पिछड़ गई है। इस नगर में स्थित हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल, देवकाली मंदिर आदि हमारी समृद्ध वास्तु कला के प्रत्यक्ष प्रमाण है। आवश्यकता इस बात की है कि इन्हें विश्व पटल पर उकेरा जाए ताकि हमारी प्राचीन धरोहर सुरक्षित रह सके।
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कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान, तमिलनाडु के प्रो. इंद्रजीत सोढ़ी ने कहा कि ग्रामीण विकास का यह पांचवां ट्रेनिंग कार्यक्रम है। देश भर में लगभग दो सौ प्रशिक्षुकों को शहरी एवं ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें प्रतिभाग करने वाले एनसीसी एनएसएस एवं प्रमुख एनजीओं के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। कार्यशाला का प्रारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा कुलगीत प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में आए आए अतिथियों का स्वागत प्रो. आरएन राय, प्रो. अशोक शुक्ला, प्रो. एसएन शुक्ला, प्रो. आशुतोष सिन्हा ने किया।
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