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सफेद हाथी साबित हो रहे जन औषधि केंद्र
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:22 PM IST
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खोखले साबित हो रहे जन औषधि केंद्र से सस्ती दवा उपलब्ध कराने के दावे
फैजाबाद। मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सस्ती व गुणवत्ता युक्त दवाएं मुहैया कराने के लिए जिले में खोले गए तीन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
यहां दवाएं उपलब्ध न होने की वजह से मरीजों को आज भी बाहर के मेडिकल स्टोर पर शोषण कराना पड़ रहा है। एक तो दवाएं ही अपर्याप्त हैं, ऊपर से मात्रा भी बहुत कम है। ऐसे में सरकार का किफायती दरों पर जेनेरिक दवाएं वितरण कराने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है।
जिले की करीब 29 लाख की आबादी के इलाज के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित चार अस्पतालों के अलावा 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।
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अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी मुख्यालय पर स्थित होने के कारण करीब डेढ़ हजार से दो हजार के मध्य होती है। यहां इलाज की रफ्तार में सबसे बड़ा ब्रेकर दवाओं की उपलब्धता का है। जिले भर में दवाओं की भारी कमी है।
मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर्स की शरण में जाना मजबूरी होती थी। यहां डॉक्टरों का कमीशन भी तय होता है। ऐसे में मरीजों के ऊपर काफी बोझ बढ़ जाता है।
इन्हीं दुश्वारियों से निजात दिलाने के लिए जिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या व संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय अयोध्या में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं।
शुरुआती दौर में तो कुछ काम चलाने भर को दवाएं रखी गईं, लेकिन उनका स्टॉक खत्म होते ही यहां तालाबंदी तक की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अस्पताल में स्थापित होने के कारण यहां करीब 600 प्रकार की दवाओं की डिमांड है लेकिन उपलब्धता 100 की भी नहीं है।
आज तक यहां सर्जिकल, ईएनटी, नेत्ररोग, चर्मरोग की एक भी दवा नहीं प्राप्त हुई। इसके अलावा इयर ड्रॉप, मधुमेह, रक्तचाप की दवा भी मौजूद नहीं है। प्रतिदिन की ओपीडी में मिलने वाली दवाएं भी यहां नहीं मिल पाती हैं।
इन्हीं बदहाली की वजह से यहां ओपीडी समय के बाद अक्सर ताला लटका मिलता है। श्रीराम अस्पताल में पेट की समस्या का इलाज कराने गए अरविंद यादव ने बताया कि अस्पताल में कुछ दवा नहीं मिली।
जन औषधि केंद्र से भी लौटाया गया। मजबूरी में बाहर के मेडिकल स्टोर से 350 रुपये की दवा लेना पड़ा। जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पहुंचे मरीज नीलम, मीरा, प्रेमकुमार, आशीष वर्मा, सुनीता पांडेय, कल्पना तिवारी ने बताया कि ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के बाद अस्पताल से मामूली दवाएं ही मिलीं।
डॉक्टरों ने बाहर से दवा लेने के लिए एक छोटी पर्ची लिखकर थमा दी। जन औषधि केंद्र पर एक भी दवा नहीं मिली और बाहर से काफी महंगी दवाएं खरीदना पड़ा। ऐसे ही सभी जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में खुले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के मैनेजर फिरोज आलम ने बताया कि आर्डर करने के लिए पहले आओ-पहले पाओ की नीति चल रही है। एक तो दवाएं अपर्याप्त हैं, ऊपर से मात्रा भी कम है। इसलिए मजबूरी में मरीजों को लौटाना पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि सूचना मिली है कि सभी जन औषधि केंद्रों पर दवाएं मौजूद नहीं हैं। ऐसे में इसके खोलने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है।
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फैजाबाद। मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सस्ती व गुणवत्ता युक्त दवाएं मुहैया कराने के लिए जिले में खोले गए तीन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
यहां दवाएं उपलब्ध न होने की वजह से मरीजों को आज भी बाहर के मेडिकल स्टोर पर शोषण कराना पड़ रहा है। एक तो दवाएं ही अपर्याप्त हैं, ऊपर से मात्रा भी बहुत कम है। ऐसे में सरकार का किफायती दरों पर जेनेरिक दवाएं वितरण कराने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है।
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जिले की करीब 29 लाख की आबादी के इलाज के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित चार अस्पतालों के अलावा 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।
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अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी मुख्यालय पर स्थित होने के कारण करीब डेढ़ हजार से दो हजार के मध्य होती है। यहां इलाज की रफ्तार में सबसे बड़ा ब्रेकर दवाओं की उपलब्धता का है। जिले भर में दवाओं की भारी कमी है।
मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर्स की शरण में जाना मजबूरी होती थी। यहां डॉक्टरों का कमीशन भी तय होता है। ऐसे में मरीजों के ऊपर काफी बोझ बढ़ जाता है।
इन्हीं दुश्वारियों से निजात दिलाने के लिए जिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या व संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय अयोध्या में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं।
शुरुआती दौर में तो कुछ काम चलाने भर को दवाएं रखी गईं, लेकिन उनका स्टॉक खत्म होते ही यहां तालाबंदी तक की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अस्पताल में स्थापित होने के कारण यहां करीब 600 प्रकार की दवाओं की डिमांड है लेकिन उपलब्धता 100 की भी नहीं है।
आज तक यहां सर्जिकल, ईएनटी, नेत्ररोग, चर्मरोग की एक भी दवा नहीं प्राप्त हुई। इसके अलावा इयर ड्रॉप, मधुमेह, रक्तचाप की दवा भी मौजूद नहीं है। प्रतिदिन की ओपीडी में मिलने वाली दवाएं भी यहां नहीं मिल पाती हैं।
इन्हीं बदहाली की वजह से यहां ओपीडी समय के बाद अक्सर ताला लटका मिलता है। श्रीराम अस्पताल में पेट की समस्या का इलाज कराने गए अरविंद यादव ने बताया कि अस्पताल में कुछ दवा नहीं मिली।
जन औषधि केंद्र से भी लौटाया गया। मजबूरी में बाहर के मेडिकल स्टोर से 350 रुपये की दवा लेना पड़ा। जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पहुंचे मरीज नीलम, मीरा, प्रेमकुमार, आशीष वर्मा, सुनीता पांडेय, कल्पना तिवारी ने बताया कि ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के बाद अस्पताल से मामूली दवाएं ही मिलीं।
डॉक्टरों ने बाहर से दवा लेने के लिए एक छोटी पर्ची लिखकर थमा दी। जन औषधि केंद्र पर एक भी दवा नहीं मिली और बाहर से काफी महंगी दवाएं खरीदना पड़ा। ऐसे ही सभी जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में खुले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के मैनेजर फिरोज आलम ने बताया कि आर्डर करने के लिए पहले आओ-पहले पाओ की नीति चल रही है। एक तो दवाएं अपर्याप्त हैं, ऊपर से मात्रा भी कम है। इसलिए मजबूरी में मरीजों को लौटाना पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि सूचना मिली है कि सभी जन औषधि केंद्रों पर दवाएं मौजूद नहीं हैं। ऐसे में इसके खोलने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है।