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गड्ढों में उलझा विभाग, नया प्रस्ताव कोई नहीं

Sun, 18 Jun 2017 10:19 PM IST
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:19 PM IST
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गड्ढों में उलझा विभाग, नया प्रस्ताव कोई नहीं
गड्ढों में उलझा विभाग, नया प्रस्ताव कोई नहीं
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- नई सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी के हाथ खाली
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए तीन माह बीत रहे हैं। यहां पीडब्ल्यूडी के पास नया कुछ भी नहीं हैं। नयी सड़कों के लिए न तो कोई रूपरेखा बनी है और न कोई प्रस्ताव बने हैं। पूरा विभाग सिर्फ सड़कों के गड्ढों को भरने में उलझा हुआ है। इस तरह से अगले सत्र के लिए विभाग के हाथ खाली हैं।
विभाग नई और पुरानी सड़कों के फेर में उलझ चुका है। अभियंताओं की मानें तो शासन की ओर से गड्ढों को भरने के लिए जितना बजट आवंटित किया वह ऊंट के मुंह में जीरा समान है। दरअसल, शासन की ओर से जो बजट आवंटित हुआ वह पैच, नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के लिये दिया गया। लेकिन खुद अभियंता बताते हैं कि उन्होंने पूरी तरह से बदहाल सड़कों को विशेष मरम्मत और बड़े-बड़े गड्ढों वाली सड़कों को नवीनीकरण के लिए चिह्नित करके प्रस्ताव किये थे। जबकि छोटे-छोटे गड्ढों की सड़कों को पैच के लिये भेजा गया। बताया जा रहा है कि जो बजट का आवंटन हुआ, उसमें पैच पर पूरा पैसा मिला। जबकि बदहाल व जर्जर सड़कों पर महज 20 फीसदी की रकम दी गई। विभाग के मुख्य अभियंता आरआर सिंह का कहना है कि उनका पूरा फोकस सिर्फ सड़कों के गड्ढों को भरने पर है, शासन की ओर से दिए फरमान पर प्राथमिकता दी जा रही है।
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नई सड़कों के लिये चार माह करें इंतजार
वैसे भी अब बारिश सीजन शुरू हो रहा है। इधर तीन माह यानि सितम्बर तक नई सड़कें बन भी नहीं पाएंगी। जानकारों का कहना है कि हर साल जब मई-जून तक सभी सड़कों के प्रस्ताव भेज दिए जाते रहे तो अगस्त से पैसा मिलना शुरू हो जाता। आधे सितंबर से बारिश थमने के बाद सड़कों के बनाने का काम शुरू हो जाता रहा है और अक्टूबर तक बारिश से बदहाल सड़कें भी बन जाया करती रहीं। लेकिन इस बार प्रस्ताव बनाने में नए सिरे से डेढ़ माह कम से कम लगेंगे। शासन से इतना ही वक्त मंजूरी में लगेगा और प्रक्रिया पूरी करने में पूरे चार माह लग सकते हैं।
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ठेकेदारों को लेना होगा रिस्क
इस बार नयी सड़कों के निर्माण व नवीनीकरण आदि करने के लिये ठेकेदारों को भी रिस्क उठाना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि इस तरह सड़कों की निर्माण प्रक्रिया शुरू होने से वित्तीय वर्ष में कुल पांच महीने का वक्त बचेगा। ठेकेदारों को इसी समय में सड़कों को पूरा करने का रिस्क उठाना होगा।
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