{"_id":"5a1b08f24f1c1b96698b576c","slug":"141511721202-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामनगरी में अगले वर्ष होगा कोरिया महोत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामनगरी में अगले वर्ष होगा कोरिया महोत्सव
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। भारत और कोरिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की कवायद तेज हो गई है। अगले वर्ष रामनगरी अयोध्या में कोरिया महोत्सव का आयोजन किया जा सकता है।
भारत और कोरिया के बीच पर्यटन की दृष्टि से भी विभिन्न कार्यों को करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस क्रम में दो सदस्यीय टीम कोरिया की यात्रा कर वापस आई है।
टूर टीम में शामिल बनारस विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राणा पीवी सिंह व रिसर्च फेलो सर्वेश कुमार ने बताया कि एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
विज्ञापन
सियोल नेशनल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुंग क्योन किम ने पूरी यात्रा का मार्गदर्शन किया। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि अयोध्या और कोरिया के गिम हे सिटी के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान पर सहमति बनी है।
अयोध्या में कोरिया महोत्सव, जबकि कोरियो के गिम हे और सियोल में अयोध्या महोत्सव का आयोजन किए जाने का निर्णय लिया गया है।
कोरिया महोत्सव के तहत लखनऊ व अयोध्या में आयोजन होंगे। अभी इसकी तिथि तय नहीं है लेकिन अगले वर्ष अगस्त व सितंबर में यह आयोजन हो सकता है।
कोरिया से लौटे रिसर्च फेलो सर्वेश कुमार ने बताया कि दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित इंटरनेशनल वर्कशाप में अयोध्या के सांस्कृतिक भूदृश्य राष्ट्रीय अस्मिता के संदर्भ में विषय पर संबोधन किया।
जिसमें बताया कि अयोध्या के सांस्कृतिक भूदृश्य किसी तरह राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े हैं। सरयू नदी, अयोध्या के मंदिर, यहां के त्योहार दीपावली, दशहरा आदि के महत्व को विस्तार से बताया।
राम जन्मभूमि की महत्ता व पहचान को भी लेकर प्रजेंटेशन दिया गया। सर्वेश ने बताया कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध को पर्यटन की दृष्टि से बढ़ावा देने के लिए काम शुरू हो रहा है।
बताया कि प्रो. राणा पीवी सिंह व उन्होंने गिम हे शहर के पर्यटन एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन का रूप किस तरह दिया जाए, इस पर वृहद चर्चा की।
जिसके तहत गिम हे शहर के सांस्कृतिक भूदृश्यों की डिजाइन, मैपिंग तैयार की जा रही है। इसके बाद दोनों शहरों की एक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण कोरिया और प्रदेश के बीच कई अहम मामलों पर सहमति बनी है, जिसके तहत अयोध्या स्थित रानी हो के पार्क के डिजाइन नक्शे को अंतिम रूप देने पर भी काम शुरू होने की बात सामने आई है।
अयोध्या और गिम हे सिटी का गहरा नाता
अयोध्या और कोरिया की गिम हे सिटी का गहरा नाता है। सन 48 में अयोध्या से नौका द्वारा राजकुमारी हौ गिम हे सिटी गईं थीं और वहां राजा सूरो से विवाह किया था।
उनकी स्मृति में अयोध्या के नयाघाट पर रानी हौ पार्क भी निर्मित है, जहां प्रति वर्ष कोरियाई दल आकर रानी हौ की स्मृति में विभिन्न आयोजन करता है।
सर्वेश कुमार ने बताया कि एक शोध में पता चला है कि रानी हौ ने जिस पद्धति से कोरिया के राजा सूरो से विवाह किया था, वह रीति और पद्धति हिंदू सनातन धर्म पर आधारित थी।
विज्ञापन
भारत और कोरिया के बीच पर्यटन की दृष्टि से भी विभिन्न कार्यों को करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस क्रम में दो सदस्यीय टीम कोरिया की यात्रा कर वापस आई है।
विज्ञापन
टूर टीम में शामिल बनारस विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राणा पीवी सिंह व रिसर्च फेलो सर्वेश कुमार ने बताया कि एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
विज्ञापन
सियोल नेशनल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुंग क्योन किम ने पूरी यात्रा का मार्गदर्शन किया। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि अयोध्या और कोरिया के गिम हे सिटी के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान पर सहमति बनी है।
अयोध्या में कोरिया महोत्सव, जबकि कोरियो के गिम हे और सियोल में अयोध्या महोत्सव का आयोजन किए जाने का निर्णय लिया गया है।
कोरिया महोत्सव के तहत लखनऊ व अयोध्या में आयोजन होंगे। अभी इसकी तिथि तय नहीं है लेकिन अगले वर्ष अगस्त व सितंबर में यह आयोजन हो सकता है।
कोरिया से लौटे रिसर्च फेलो सर्वेश कुमार ने बताया कि दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित इंटरनेशनल वर्कशाप में अयोध्या के सांस्कृतिक भूदृश्य राष्ट्रीय अस्मिता के संदर्भ में विषय पर संबोधन किया।
जिसमें बताया कि अयोध्या के सांस्कृतिक भूदृश्य किसी तरह राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े हैं। सरयू नदी, अयोध्या के मंदिर, यहां के त्योहार दीपावली, दशहरा आदि के महत्व को विस्तार से बताया।
राम जन्मभूमि की महत्ता व पहचान को भी लेकर प्रजेंटेशन दिया गया। सर्वेश ने बताया कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध को पर्यटन की दृष्टि से बढ़ावा देने के लिए काम शुरू हो रहा है।
बताया कि प्रो. राणा पीवी सिंह व उन्होंने गिम हे शहर के पर्यटन एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन का रूप किस तरह दिया जाए, इस पर वृहद चर्चा की।
जिसके तहत गिम हे शहर के सांस्कृतिक भूदृश्यों की डिजाइन, मैपिंग तैयार की जा रही है। इसके बाद दोनों शहरों की एक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण कोरिया और प्रदेश के बीच कई अहम मामलों पर सहमति बनी है, जिसके तहत अयोध्या स्थित रानी हो के पार्क के डिजाइन नक्शे को अंतिम रूप देने पर भी काम शुरू होने की बात सामने आई है।
अयोध्या और गिम हे सिटी का गहरा नाता
अयोध्या और कोरिया की गिम हे सिटी का गहरा नाता है। सन 48 में अयोध्या से नौका द्वारा राजकुमारी हौ गिम हे सिटी गईं थीं और वहां राजा सूरो से विवाह किया था।
उनकी स्मृति में अयोध्या के नयाघाट पर रानी हौ पार्क भी निर्मित है, जहां प्रति वर्ष कोरियाई दल आकर रानी हौ की स्मृति में विभिन्न आयोजन करता है।
सर्वेश कुमार ने बताया कि एक शोध में पता चला है कि रानी हौ ने जिस पद्धति से कोरिया के राजा सूरो से विवाह किया था, वह रीति और पद्धति हिंदू सनातन धर्म पर आधारित थी।