कांठ: लाउडस्पीकर के बाद अब नया बवाल
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मुरादाबाद के कांठ में मंदिर से जबरिया लाउडस्पीकर उतारे जाने के बाद बवाल के जिस आग में कांठ जल उठा था वह अब भी शांत नहीं हुआ है। अकबरपुर चैदरी के उस गांव में दिलों के बीच की खाई इतनी चौड़ी हो गई है कि हर छोटी बड़ी बात पर दो पक्ष आमने-सामने आ रहे हैं। अब नया बवाल सामने आया है।
आरोप है कि कुआं पूजन को जाती महिलाओं पर दूसरे पक्ष के लोगों ने पत्थर बरसाए और मारपीट की। यह बवाल तब हुआ जबकि गांव में फोर्स तैनात है। मारपीट करने वाले दूसरे पक्ष के बीस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। गांव में तनाव है और फोर्स बढ़ा दी गई है।
कांठ के विधायक अनीसुर्रहमान के गांव अकबरपुर चैदरी में लाउडस्पीकर उतारे जाने के बाद दो पक्ष 27 जून को आमने-सामने आ गए थे। उसके बाद चार जुलाई को ऐसा बवाल हुआ जिसकी लपट अबतक उठ रही है। इसी कांड में 60 भाजपाई अबतक जेल में हैं। ऊपर से शांत दिख रहा गांव दरअसल अंदर ही अंदर अब भी सुलग रहा है।
कुआं पूजन के लिए जा रही महिलाओं से मारपीट
चार दिन पहले गांव में के एक परिवार में बेटे का जन्म हुआ था। इस पर परिवार की कुछ महिलाएं ढोल बाजे के साथ कुआं पूजन के लिए जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही दूसरे पक्ष के लोगों ने एतराज किया। आरोप है कि पूजा करके लौट रही महिलाओं के साथ उन्होंने मारपीट की।
सूचना पर गांव में पहले से तैनात फोर्स और थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की ओर से दूसरे पक्ष के 20 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित करने का आरोप भी लगाया गया है। विवेचना कर रहे सीओ कांठ राहुल कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए गए हैं। सभी आरोपी फरार हैं। बता दें कि अकबरपुर चैदरी में मंदिर से लाउडस्पीकर उतारे जाने के बाद अब तक दोनों पक्षों में तनाव है।
आरोपी सपा नेताओं के संरक्षण में
महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता के आरोपी सपा नेताओं के संरक्षण में पहुंच गए हैं। पुलिस पर कइयों के नाम हटाने के लिए दबाव भी डाला गया। अब गिरफ्तारी न करने के लिए कहा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो नेताओं ने मुकदमा न लिखने के लिए भी पुलिस से कहा था। लेकिन उच्चाधिकारियों की सख्ती के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया।
पुलिस की लापरवाही से जला था कांठ
अकबरपुर चैदरी गांव के मंदिर से लाउडस्पीकर उतारे जाने के बाद हुए बवाल की प्रशासनिक जांच में 18 लोगों ने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। सभी ने कहा है कि पुलिस की लापरवाही से हालात बिगड़े थे। निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। जो किसान खेतों पर काम कर रहे थे उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया।
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक गूंजने वाले बवाल की जांच एडीएम फाइनेंस राजकुमार द्वारा की जा रही है। एसडीएम कांठ आंद्रा वाम्सी अपनी रिपोर्ट पहले ही दे चुके हैं। पब्लिक को भी अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। कुल अट्ठारह लोगों ने अपनी बात रखी है। सोलह लोगों ने लिखित में पक्ष दाखिल किया है। पूर्व विधायक गुलाबो देवी ने भी अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। सभी बयानों में पुलिस और प्रशासन की खिंचाई की गई है।
लोगों का कहना है कि अगर अधिकारियों ने दोनों पक्षों को विश्वास में लेकर कार्रवाई की होती तो शायद यह हालात पैदा न होते। पुलिस ने जबरन मंदिर से लाउडस्पीकर उतारा। बेगुनाह लोगों पर लाठियां बरसाईं। इसके गुस्सा भड़कता चला गया और एक सियासी मुद्दा बन गया। लोग पुलिस के खिलाफ खड़े हो गए। उधर प्रशासनिक जांच में अपना पक्ष रखने का समय बृहस्पतिवार को खत्म हो गया है। अब केवल पुलिस की रिपोर्ट ही रह रही है। रिपोर्ट आने के बाद जांच फाइनल करके जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की स्क्रिप्ट तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि कुछ के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।