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रोटी के लिए बच्चों को रख दिया गिरवी

Sat, 26 Apr 2014 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ललितपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, ललितपुर Updated Sat, 26 Apr 2014 02:09 AM IST
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children mortgaged for bread

यूपी में ललितपुर जिले के मड़ावरा ब्लाक क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत धौरीसागर के मजरा सकरा में दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज सहरिया जाति के लोगों ने सीने पर पत्थर रख कर अपने दस से पंद्रह वर्ष के डेढ़ दर्जन बच्चों को पैसे लेकर मजदूरी करने के लिए राजस्थान के ऊंट व्यापारियों के पास गिरवी रख दिया।

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व्यापारियों को चकमा देकर घर लौटे दस आदिवासी बच्चों ने शोषण के मंजर की जो कहानी बयां की वह दिल दहला देने वाली है।
 
80 परिवारों की आबादी वाले इस गांव के लोगों के मुताबिक ओलावृष्टि के कारण उनके परिवार के समक्ष रोटी का संकट पैदा हो गया।

बच्चों के साथ होता था दुर्व्यवहार

children mortgaged for bread

गांव में कोटे का राशन भी नहीं बंटता है और जंगल का महुआ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। मुआवजा के रूप में चेक भी नहीं बांटे गए, जिसके चलते उन्हें दो से पांच हजार रुपये में ऊंट व भेड़ चराने के लिए अपने बच्चों को राजस्थान भेजना पड़ा।

हाल ही में भेड़ एवं ऊंट व्यापारियों के चंगुल से छूटकर घर लौटे मूलचंद पुत्र नत्थू सहरिया, तिलक पुत्र रतन सहरिया, गोली पुत्र सोनी सहरिया, देवी पुत्र सोहन सहरिया, संजू पुत्र रामलाल सहरिया, महीप पुत्र जालम सहरिया, सुरेन्द्र पुत्र हल्लू सहरिया समेत दस बच्चों ने शोषण व जुल्म की जो कहानी बताई वह रोंगटे खड़ी कर देने वाली है।

उन्होंने बताया कि चिलचिलाती धूप में उनसे ऊंट व भेड़ का हांका कराया जाता था। विरोध करने पर दुर्व्यवहार किया जाता था। गांव के पिम्मा पुत्र पर्वता सहरिया, खेमचंद पुत्र स्व. हरीराम सहरिया, बाबूलाल पुत्र पिम्मा सहरिया, बृजराम पुत्र धनसुवा सहरिया, करन पुत्र सुंदर सहरिया समेत आठ बच्चे अब भी राजस्थान में भेड़ एवं ऊंट चराने का काम कर रहे हैं।

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