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आजम पर दर्ज मुकदमे की वापसी पर कोर्ट ने लगाई रोक

Wed, 03 Jul 2013 12:38 AM IST
रामपुर/ब्यूरो
रामपुर/ब्यूरो Updated Wed, 03 Jul 2013 12:38 AM IST
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case on azam

नगर विकास मंत्री आजम खां पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज मुकदमे की वापसी पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने शासनादेश और चार्जशीट की धाराओं में अंतर होने की वजह से यह रोक लगाई है।

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सपा सरकार ने सपाइयों पर बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक द्वेष के चलते दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने के निर्णय के क्रम में नगर विकास मंत्री आजम खां पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाना है।
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शासन की ओर से गृह सचिव आरएम श्रीवास्तव ने आजम खां पर दर्ज चार मुकदमों को वापस लेने का आदेश जिला प्रशासन को दिया था। चार में से तीन मुकदमे वापस हो चुके हैं।
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आजम खां के खिलाफ 2007 में टांडा थाने में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने इस मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। इस केस को वापस लेने का शासनादेश आने के बाद अभियोजन की ओर से वाद वापसी के लिए प्रार्थना पत्र कोर्ट में दिया गया था।

मंगलवार को सीजेएम वीरेंद्र कुमार पांडे की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से वाद वापस लेने की अपील की गई।

चार्जशीट और शासनादेश में धाराओं की भिन्नता होने की वजह से सीजेएम ने मामले की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश जारी किया।

टांडा थाने में आजम खां के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज हुआ था उसकी चार्जशीट में धारा 504, 171 छ आईपीसी व 3/10 एससी एसटी एक्ट और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लेख किया गया था।

मुकदमा वापसी के लिए जो शासनादेश आया है उसमें 126 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लेख किया गया है। धाराओं में अंतर होने की वजह से ही सीजेएम ने इस मुकदमे की वापसी की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है।

क्या था मामला
2007 में स्वार-टांडा विधानसभा उप चुनाव के दौरान टांडा में आयोजित जनसभा के दौरान आजम खां पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज हुआ था।

बसपा नेता धीरज कुमार शील की ओर से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी और कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया था।


अब क्या होगा
जानकारों की मानें तो धाराओं में अंतर होने का जो आदेश आया है उसे वापस शासन को भेजा जाएगा, जहां से गृह विभाग की ओर से संशोधित आदेश जारी होगा तब आगे की कार्यवाही होगी।

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