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Ayodhya News: गैस कनेक्शन फर्जीवाड़े में 30 साल बाद तीन बरी
Fri, 27 Mar 2026 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:48 PM IST
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अयोध्या। फर्जी गैस कनेक्शन जारी करने के 30 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सतीश कुमार मगन की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
पंकज तिवारी, लाल पांडेय और श्याम लाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया। यह मामला थाना कैंट क्षेत्र की ईगल गैस एजेंसी से जाली टर्मिनेशन वाउचर ट्रांसफर के जरिए गैस कनेक्शन प्राप्त करने से जुड़ा था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने फर्जी कागजात की सूचना दी थी। 29 मार्च 1993 को गैस एजेंसी के मैनेजर लाल की तहरीर पर 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद 7 फरवरी 1996 को पंकज तिवारी, लालजी पांडेय और श्यामलाल के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने तीन गवाहों को पेश किया, लेकिन उनके बयान घटना को साबित नहीं कर सके।
विवेचना पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सतीश कुमार मगन ने गैस कनेक्शन के फर्जीवाड़े की कहानी एवं कथित घटना की जांच में की गई विवेचना पर सख्त टिप्पणी की है। गैस कनेक्शन फर्जीवाड़े के 33 साल पुराने मामले में न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा है कि अदालत में 30 साल तक चली सुनवाई में अभियोजन घटना को साबित करने में असफल रहा है। इंडियन ऑयल की सूचना के आधार पर ही रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। न तो पत्र भेजने वाले को और न ही गैस एजेंसी मालिक को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। विवेचक द्वारा भी कथित टर्मिनेशन वाउचर की जांच के लिए गैस एजेंसी से संपर्क कर कोई पूछताछ नहीं की गई और न ही एजेंसी के किसी अधिकारी या कर्मचारी का बयान दर्ज किया गया। विवेचक द्वारा फर्जी कनेक्शन से निर्गत किए गए गैस सिलिंडर व रेगुलेटर की बरामदगी भी नहीं की गई है जो लचर विवेचना को दर्शाता है।
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पंकज तिवारी, लाल पांडेय और श्याम लाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया। यह मामला थाना कैंट क्षेत्र की ईगल गैस एजेंसी से जाली टर्मिनेशन वाउचर ट्रांसफर के जरिए गैस कनेक्शन प्राप्त करने से जुड़ा था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने फर्जी कागजात की सूचना दी थी। 29 मार्च 1993 को गैस एजेंसी के मैनेजर लाल की तहरीर पर 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद 7 फरवरी 1996 को पंकज तिवारी, लालजी पांडेय और श्यामलाल के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने तीन गवाहों को पेश किया, लेकिन उनके बयान घटना को साबित नहीं कर सके।
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विवेचना पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सतीश कुमार मगन ने गैस कनेक्शन के फर्जीवाड़े की कहानी एवं कथित घटना की जांच में की गई विवेचना पर सख्त टिप्पणी की है। गैस कनेक्शन फर्जीवाड़े के 33 साल पुराने मामले में न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा है कि अदालत में 30 साल तक चली सुनवाई में अभियोजन घटना को साबित करने में असफल रहा है। इंडियन ऑयल की सूचना के आधार पर ही रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। न तो पत्र भेजने वाले को और न ही गैस एजेंसी मालिक को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। विवेचक द्वारा भी कथित टर्मिनेशन वाउचर की जांच के लिए गैस एजेंसी से संपर्क कर कोई पूछताछ नहीं की गई और न ही एजेंसी के किसी अधिकारी या कर्मचारी का बयान दर्ज किया गया। विवेचक द्वारा फर्जी कनेक्शन से निर्गत किए गए गैस सिलिंडर व रेगुलेटर की बरामदगी भी नहीं की गई है जो लचर विवेचना को दर्शाता है।
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