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शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण व उद्यम को जोड़ना होगा : जगदीश

Fri, 04 Jul 2025 09:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jul 2025 09:00 PM IST
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Skill training and enterprise must be combined with education: Jagdish
अयोध्या। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने कहा कि वर्तमान शिक्षा को नई शिक्षा नीति से जोड़ा गया है। इसमें शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण और उद्यम को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है। शिक्षा सिर्फ डिग्री प्राप्त करने के लिए ही न रह जाए। इसके लिए इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों को आपस में समन्वय स्थापित करते हुए काम करना होगा। इस दिशा में तकनीकी और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को विशेष ध्यान देना होगा। नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत शिक्षण संस्थानों को 50 प्रतिशत प्रैक्टिकल से विद्यार्थियों को जोड़ना होगा।
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वह शुक्रवार को डॉ. राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में यूजीसी की विकास-2025 कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। यह आयोजन अवध विश्वविद्यालय और आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें सेंट्रल जोन के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने विमर्श किया।
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स्वागत संबोधन में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षण संस्थानों और उद्योग के बीच हुए रिक्त स्थान को भरने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्थानीय स्तर पर उद्योगों को सहयोग करना होगा। इससे रोजगार सृजन में आसानी होगी। शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार को अपनाना होगा, तभी शिक्षा और रोजगार की मांग को पूरा किया जा सकेगा। रोजगार सृजन के क्षेत्र में युवाओं को अपने माइंड सेटअप में बदलाव लाना होगा। नौकरियां ढूंढने की बजाय अपनी क्षमता के अनुरूप स्वयं रोजगार सृजन करने की दिशा में काम करें। समय की मांग भी यही है।
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शैक्षिक विमर्श सत्र में यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कोई भी गाइड लाइन स्वयं के स्तर पर नहीं तैयार करता है। वह केंद्र और राज्य विश्वविद्यालय के साथ डीम्ड विश्वविद्यालय और प्रमुख शिक्षण संस्थाओं की सलाह और सुझाव के आधार पर नीतियां तय करता है। शिक्षा की नीति में सुझाव के आधार पर ही परिवर्तन किया जाता है। नई शिक्षा नीति पर भी बड़े स्तर पर सुझाव मांगे गए थे।

यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान परिवेश में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा करने की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षण संस्थाओं और विश्वविद्यालय को अपने पूर्व छात्रों से जुड़ने की व्यवस्था करनी होगी। यह रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़ी सहायता होगी। आयाम बदल रहे हैं। युवाओं की पसंद भी बदल रही है।


राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) के अध्यक्ष व पूर्व आईएएस प्रो. निर्मलजीत सिंह कलसी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में देश में 25 करोड़ बच्चे स्कूल में हैं लेकिन सिर्फ चार करोड़ बच्चे उच्च शिक्षा में जाते हैं। इनमें भी ज्यादातर अकुशल ही रह जाते हैं। भारत सरकार का विजन सभी के साथ जुड़कर चलना है। वर्तमान में 507 निजी विश्वविद्यालय और 492 राज्य विश्वविद्यालय हैं। इसके साथ अन्य संस्थान भी जुड़ें। हमें नीति के स्तर पर बदलाव करना है।


एनसीवीटी अध्यक्ष ने कहा कि नई शिक्षा नीति के 16 घटक (कंपोनेंट) हैं। इन्हें हमें हर स्तर पर अपनाना है, तभी हम शिक्षा और इंडस्ट्री दोनों की मांग को पूरा कर पाने में सक्षम होंगे। शैक्षिक सत्र को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, स्ट्रैटेजिक सलाहकार श्रीयोगी श्रीराम और प्रो. विमल राह ने भी संबोधित किया। इस दौरान यूजीसी के संयुक्त सचिव प्रो. अविरल कपूर, अवर सचिव वीना मेनन, डॉ. राधिका, कॉन्फ्रेंस के संयोजक प्रो. एसएस मिश्र, कुलसचिव विनय सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंद्र शुक्ल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. सीके मिश्र, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. शैलेंद्र वर्मा व डॉ. विनोद चौधरी समेत अन्य प्रतिभागी और शिक्षक मौजूद रहे।
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