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Ayodhya News: दशरथ समाधि स्थल के पास विकसित होगी शबरी वन वाटिका

Tue, 04 Nov 2025 08:11 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 08:11 PM IST
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Shabri forest garden will be developed near the tomb of Dashrath
आदर्श शुक्ल
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अयोध्या। सरयू नदी के किनारे दशरथ्र समाधि स्थल के पास शबरी वन वाटिका विकसित की जाएगी। अयोध्या विकास प्राधिकरण 14.44 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कराएगा। इसमें श्रीराम की परम भक्त माता शबरी के जीवन प्रसंग पर आधारित मूर्ति कला अयोध्या आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी।

शबरी भगवान राम की एक परम भक्त थीं। वह आदिवासी भील समुदाय से आती थीं और वन में रहती थीं। उन्होंने मतंग ऋषि की शिष्या बनकर और उनकी सेवा करके भक्ति का मार्ग अपनाया। वह अपने अटूट विश्वास और भक्ति के लिए जानी जाती हैं। इसी कारण भगवान राम ने उनसे भेंट की और उन्हें दर्शन दिए। उनके असीम भक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण को सम्मान देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा पर रामनगरी में इस वन वाटिका के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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इसके निर्माण के लिए दशरथ समाधि स्थल के पास सोलर सिटी के सामने 210 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। पहले चरण में 70 एकड़ क्षेत्र में निर्माण कराया जाएगा। दूसरे चरण में इसे विस्तार देने की योजना है। यहां पर मूर्ति कला के माध्यम से शबरी का भगवान राम के आगमन की प्रतीक्षा करना, उनकी ओर से रास्ता साफ करना, राम को मीठे बेर खिलाने और राम की ओर से नवधा भक्ति (श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन) का ज्ञान देने के दृश्य उकेरे जाएंगे। लैंडस्केप व सोने के हिरन का स्वरूप आकर्षण का विशेष केंद्र होगा।
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अयोध्या में बंदरों के पहले प्रवास स्थल की भी मिलेगी सौगात

अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुराग जैन ने अमर उजाला को बताया कि यहां पर सिटी फॉरेस्ट विकसित करते हुए पौधरोपण कराने के साथ पाथवे, गेट, बाउंड्रीवॉल और पार्किंग स्थल का भी निर्माण कराया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। सिटी फॉरेस्ट में विशेष रूप से फलों के पौधे लगाए जाएंगे ताकि आने वाले समय में इसे अयोध्या में बंदरों के पहले प्रवास स्थल का भी रूप दिया जा सके। इतना ही नहीं यह वाटिका माता शबरी के जीवन दर्शन को नई दृष्टि देते हुए भारतीय लोक कला, परंपरा और समरसता को भी सहेजेगी।
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