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Ayodhya News: खतरे से 17 सेमी ऊपर बह रही सरयू
Fri, 02 Oct 2026 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:28 AM IST
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शुजागंज। खतरे के निशान से ऊपर बह रही सरयू नदी दुश्वारी बढ़ा रही है। रुदौली तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग परेशान हैं। नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को भी खतरे के निशान से 17 सेमी ऊपर दर्ज किया गया।
जलस्तर 92.9 मीटर पर पहुंचने से कैथी मांझा, पटरंगा मांझा और मरौचा मांझा गांव के लोग घरों में कैद हो गए हैं। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता है। कैथी मांझा के रजनीश यादव ने बताया कि नदी के पानी से छह माह तक परेशानी बनी रहती है। कहा कि राहत सामग्री मिलने के बावजूद रहन-सहन और खानपान दुश्वारियों भरा रहता है। विकास की बात दूर गृहस्थी संभालने में ही समय निकल जाता है। इसी गांव के प्रदीप कुमार ने बताया कि इस बार चार महीने तक नदी के घटने-बढ़ने से समस्याएं जटिल हुई हैं। पटरंगा मांझा गांव के राजेंद्र ने बताया कि प्रशासन ने गांव में आने-जाने के लिए नाव उपलब्ध कराई गईं हैं। इससे ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिली है।
बच्चों की पढ़ाई बाधित होने से लोग चिंतित
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को हर समय सुरक्षित स्थान की तलाश रहती है। थोड़ा व्यवस्थित होते ही नदी का पानी फिर बढ़ने लगता है, जिससे गृहस्थी संभालना मुश्किल होता है। पुत्ती लाल के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ी समस्या है, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखता। पूरे वर्ष गृहस्थी संभालने में ही बीत जाता है, जिससे अपेक्षाएं धरी रह जाती हैं। रहना, खाना और सोना बहुत कठिन है।
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स्थायी समाधान की अपेक्षा
स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत सामग्री और पशुओं का चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। नाव की सुविधा से आवागमन में मदद मिली है। ग्रामीण चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षित स्थान मिल जाए ताकि नदी के पानी से छुटकारा मिले। यह उन्हें आधुनिक विकास से जुड़ने और बेहतर जीवन जीने में मदद करेगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सुरक्षित स्थान मिलने से उनकी दुश्वारियां कम होंगी।
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जलस्तर 92.9 मीटर पर पहुंचने से कैथी मांझा, पटरंगा मांझा और मरौचा मांझा गांव के लोग घरों में कैद हो गए हैं। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता है। कैथी मांझा के रजनीश यादव ने बताया कि नदी के पानी से छह माह तक परेशानी बनी रहती है। कहा कि राहत सामग्री मिलने के बावजूद रहन-सहन और खानपान दुश्वारियों भरा रहता है। विकास की बात दूर गृहस्थी संभालने में ही समय निकल जाता है। इसी गांव के प्रदीप कुमार ने बताया कि इस बार चार महीने तक नदी के घटने-बढ़ने से समस्याएं जटिल हुई हैं। पटरंगा मांझा गांव के राजेंद्र ने बताया कि प्रशासन ने गांव में आने-जाने के लिए नाव उपलब्ध कराई गईं हैं। इससे ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिली है।
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बच्चों की पढ़ाई बाधित होने से लोग चिंतित
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को हर समय सुरक्षित स्थान की तलाश रहती है। थोड़ा व्यवस्थित होते ही नदी का पानी फिर बढ़ने लगता है, जिससे गृहस्थी संभालना मुश्किल होता है। पुत्ती लाल के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ी समस्या है, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखता। पूरे वर्ष गृहस्थी संभालने में ही बीत जाता है, जिससे अपेक्षाएं धरी रह जाती हैं। रहना, खाना और सोना बहुत कठिन है।
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स्थायी समाधान की अपेक्षा
स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत सामग्री और पशुओं का चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। नाव की सुविधा से आवागमन में मदद मिली है। ग्रामीण चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षित स्थान मिल जाए ताकि नदी के पानी से छुटकारा मिले। यह उन्हें आधुनिक विकास से जुड़ने और बेहतर जीवन जीने में मदद करेगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सुरक्षित स्थान मिलने से उनकी दुश्वारियां कम होंगी।